Quasa
QUASA ऐप का उपयोग करें
आज ही Web3 क्रिप्टो फ्रीलांसिंग के अग्रणी मंच से जुड़ें!
खोलें
व्यापार

Chandra की 16 आकाशगंगाएँ—M106 की दो अतिरिक्त भुजाएँ तारों से नहीं बनीं

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|6 मिनट पढ़ने का समय
Chandra की 16 आकाशगंगाएँ—M106 की दो अतिरिक्त भुजाएँ तारों से नहीं बनीं

NASA ने 25 अगस्त 2026 को 16 आकाशगंगाओं की नई बहु-तरंगदैर्ध्य दीर्घा जारी की। NASA की आधिकारिक घोषणा के अनुसार हर चित्र में Chandra के एक्स-रे आँकड़े हैं, जिन्हें Webb, Hubble, IXPE, Swift, NuSTAR तथा अंतरिक्ष और जमीन पर स्थित दूसरी दूरबीनों के प्रेक्षणों से जोड़ा गया है।

उसी 25 अगस्त की दीर्घा में M106, जिसे NGC 4258 भी कहा जाता है, केंद्रीय उदाहरण है: उसकी दो सामान्य तारकीय भुजाओं के साथ दो अतिरिक्त भुजाएँ दिखती हैं, लेकिन अतिरिक्त जोड़ी मुख्यतः गर्म गैस से बनी है। 27 अगस्त को प्रकाशित Space.com की स्वतंत्र व्याख्या भी नए Chandra–Hubble–Webb संयोजन और इन संरचनाओं का केंद्रीय विशाल कृष्ण विवर से संबंध दर्ज करती है।

M106 की चार भुजाओं की उत्पत्ति एक जैसी नहीं है

M106 के केंद्रीय विशाल कृष्ण विवर की कण-धाराएँ गैस को गर्म करके दो असामान्य भुजाएँ बनाती हुईं।

M106 की सामान्य सर्पिल भुजाओं में तारे, धूल और तारा-निर्माण क्षेत्र हैं। अतिरिक्त जोड़ी आकार में तारकीय भुजाओं जैसी लगती है, पर एक्स-रे में उसका प्रमुख घटक अत्यधिक गर्म गैस है। इसलिए शीर्षक में “तारों से नहीं बनीं” का अर्थ यह नहीं कि वहाँ एक भी तारा नहीं है, बल्कि यह कि इन असामान्य संरचनाओं को आकार देने वाला पदार्थ और ऊर्जा सामान्य सर्पिल भुजाओं से अलग हैं।

आकाशगंगा के केंद्र की ओर गिरता पदार्थ विशाल कृष्ण विवर को सक्रिय करता है। उसके पास से निकलने वाले जेट गैसीय चक्रिका से टकराकर पदार्थ को गर्म करते हैं और प्रघाती तरंगें पैदा करते हैं; गर्म गैस की यही चमक दो वक्र भुजाओं का रूप लेती है। NASA JPL के बहु-दूरबीन अध्ययन में भी जेट के चारों ओर अतितप्त गैस के आवरण और उससे आणविक हाइड्रोजन में चलने वाली प्रघाती तरंगों के बीच संबंध पाया गया था।

इस गतिविधि का असर आकृति तक सीमित नहीं है। जेट और प्रघाती तरंगें केंद्र की गैस को गर्म करके बाहर धकेल सकती हैं, जिससे नए तारे बनाने के लिए उपलब्ध ठंडा ईंधन घटता है। M106 इस तरह दिखाती है कि केंद्रीय कृष्ण विवर अपने आसपास से कहीं बड़े पैमाने पर आकाशगंगा की गैस और विकास को प्रभावित कर सकता है।

नीला, नारंगी और दृश्य प्रकाश अलग पदार्थ दिखाते हैं

M106 में Chandra की एक्स-रे गैस, Hubble के तारे और Webb की धूल अलग भौतिक परतों में।

M106 के संयोजित चित्र के रंग प्राकृतिक दृश्य की साधारण नकल नहीं हैं। Chandra की शाही-नीली एक्स-रे परत कृष्ण विवर के जेट से बनी अतितप्त प्रघाती तरंगें दिखाती है। Hubble के दृश्य-प्रकाश आँकड़े लाल, पीले और हल्के नीले रंगों में तारों तथा चक्रिका को रखते हैं, जबकि Webb की चमकीली नारंगी अवरक्त परत धूल के तंतु सामने लाती है।

इन परतों को मिलाने से एक जैसी दिखने वाली संरचनाओं का भौतिक अंतर खुलता है। दृश्य प्रकाश तारों का वितरण बताता है, अवरक्त प्रेक्षण धूल के पार और उसके भीतर की बनावट दिखाते हैं, जबकि एक्स-रे उन स्थानों को पहचानते हैं जहाँ गैस लाखों डिग्री तक गर्म हुई है। किसी एक तरंगदैर्ध्य में अतिरिक्त भुजाओं का आकार दिख सकता था, लेकिन उनके गर्म और प्रघात-चालित स्वभाव की पूरी व्याख्या नहीं मिलती।

दीर्घा की 16 आकाशगंगाएँ: रूप, दूरबीन और भौतिक प्रक्रिया

Chandra दीर्घा की 16 आकाशगंगाओं में सर्पिल चक्रिकाएँ, विलय, गैसीय पुच्छ, कण-धाराएँ और महापवनें।

Chandra की परत-दर-परत दीर्घा सभी 16 वस्तुओं के संयोजित तथा अलग-अलग तरंगदैर्ध्य वाले चित्र देती है। प्रत्येक प्रविष्टि में पहले आकाशगंगा का प्रमुख रूप, फिर प्रयुक्त वेधशालाएँ और अंत में दिखाई देने वाली मुख्य प्रक्रिया दी गई है:

  • NGC 1672 — डंडाकार सर्पिल: Chandra, Hubble और Webb; केंद्रीय डंडा गैस को भीतर पहुँचाता है, जबकि एक्स-रे पदार्थ ग्रहण कर रहे कृष्ण विवरों को उभारते हैं।
  • II Zw 096 — धूल से ढका विलय: Chandra, Hubble और Webb; गर्म गैस, कृष्ण विवर की गतिविधि और धूल में छिपा तीव्र तारा-निर्माण साथ दिखते हैं।
  • M33 — सामने से दिखती सर्पिल: Chandra, Very Large Telescope और Swift; एक्स-रे युग्म, चमकती हाइड्रोजन गैस और युवा विशाल तारे अलग परतों में मिलते हैं।
  • M106 या NGC 4258 — सर्पिल: Chandra, Hubble और Webb; केंद्रीय कृष्ण विवर के जेट से गर्म गैस तारकीय भुजाओं जैसी दो अतिरिक्त संरचनाएँ बनाती है।
  • NGC 1569 — बौनी अनियमित: Chandra, XMM-Newton और भू-आधारित दृश्य प्रकाश; तारकीय पवनों से फूले लाखों डिग्री गर्म गैस के बुलबुले तारा-विस्फोट का असर दिखाते हैं।
  • M90 — सर्पिल: Chandra, Hubble और भू-आधारित विस्तृत दृश्य; Virgo समूह की गर्म गैस में बढ़ती आकाशगंगा से गैस छिन रही है और पीछे हाइड्रोजन का पुच्छ बन रहा है।
  • Centaurus A — धूलयुक्त विलय वाली विशाल दीर्घवृत्ताकार: Chandra, IXPE, Webb और European Southern Observatory; केंद्रीय कृष्ण विवर का उच्च-ऊर्जा जेट धूल-पट्टी के पार दिखाई देता है।
  • M104 — लगभग किनारे से दिखती चक्रिका: Chandra, Hubble और Webb; चौड़ा केंद्रीय उभार, बाहरी धूल-पट्टी, सघन एक्स-रे स्रोत और गर्म प्रभामंडल इसके मिश्रित सर्पिल तथा दीर्घवृत्ताकार गुण दिखाते हैं।
  • Arp 143 — टकराव से बनी छल्ला-प्रणाली: Chandra और Hubble; छोटी साथी के आमने-सामने गुजरने से प्रघाती तरंग, फैलते तारकीय छल्ले और एक्स-रे युग्म बने।
  • NGC 4725 — एक-भुजा वाली डंडाकार सर्पिल: Chandra और दृश्य-प्रकाश प्रेक्षण; तारा-निर्माण छल्ले में चमकीले एक्स-रे स्रोत हैं और असामान्य भुजा किसी निकटवर्ती आकाशगंगा के गुरुत्वीय प्रभाव की ओर संकेत करती है।
  • NGC 1385 — डंडाकार सर्पिल: Chandra, Hubble और Webb; धूलयुक्त भुजाओं में तारा-निर्माण क्षेत्र और एक्स-रे युग्म स्थानीय तारा-विस्फोटों का वितरण दिखाते हैं।
  • NGC 660 — ध्रुवीय छल्ला आकाशगंगा: Chandra और Gemini Observatory; झुका तारकीय-धूल छल्ला पुराने टकराव का संभावित परिणाम है और केंद्र में बढ़ते विशाल कृष्ण विवर का संभावित एक्स-रे संकेत है।
  • M82 — अनियमित तारा-विस्फोट आकाशगंगा: Chandra, NuSTAR, Hubble, Webb और Spitzer; लाखों डिग्री गर्म गैस की महापवन चक्रिका से हजारों प्रकाश-वर्ष बाहर उठती है।
  • NGC 3256 — विलय करती गैस-समृद्ध सर्पिल जोड़ी: Chandra, Hubble और Webb; प्रघात से गर्म गैस, तारकीय ज्वारीय पुच्छ और धूल के पीछे का तारा-निर्माण अलग होते हैं।
  • NGC 3938 — सामने से दिखती सर्पिल: Chandra और Mount Lemmon Observatory; एक्स-रे युग्म तथा सुपरनोवा अवशेष चक्रिका की धूल-पट्टियों के बीच स्थित किए जा सकते हैं।
  • NGC 4631 — किनारे से दिखती सर्पिल: Chandra, XMM-Newton और भू-आधारित दृश्य प्रकाश; सुपरनोवा से बाहर धकेली गर्म गैस का विशाल प्रभामंडल चक्रिका के ऊपर और नीचे फैला है।

नई दीर्घा है, 16 एकसाथ हुई नई खोजें नहीं

“नई छवियाँ” को 16 नए खगोलीय पिंड या एक ही समय में किए गए नए प्रेक्षण नहीं समझना चाहिए। Chandra की एक्स-रे परतें उसके अंतरिक्ष में बिताए दशकों के दौरान जुटाए गए आँकड़ों से बनी हैं; NASA ने उन्हें दूसरी वेधशालाओं के पूरक प्रेक्षणों के साथ नए संयोजित रूप में प्रस्तुत किया है। नवीनता साझा चयन, प्रसंस्करण और तुलनात्मक प्रस्तुति में है।

दीर्घा अलग-अलग आकाशगंगाओं में समान ऊर्जा-स्रोतों के भिन्न परिणाम साथ रखती है: टक्कर कहीं तारों का छल्ला बनाती है, समूह का वातावरण कहीं गैस छीनता है, और तारकीय पवन या सक्रिय कृष्ण विवर कहीं गर्म गैस बाहर फेंकते हैं। जारी सामग्री M106 की भुजाओं पर किसी नए मापन या नए शोध-पत्र की घोषणा नहीं करती; उसका ठोस योगदान यह स्पष्ट दृश्य तुलना है कि सामान्य तारकीय भुजाएँ और गर्म गैस की असामान्य भुजाएँ एक जैसी दिखकर भी अलग प्रक्रियाओं से बन सकती हैं।

साझा करें:

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

Web3, AI और क्रिप्टो की नवीनतम खबरें सीधे अपने इनबॉक्स में पाएँ।

0