
छोटा ब्लैक होल, विशाल असर—जेट आकाशगंगा के बाहर गैस गरम करते मिले

भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की 25 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, रमन अनुसंधान संस्थान और एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं ने पाया कि केंद्रीय ब्लैक होल के रेडियो जेट की दिशा में, आकाशगंगा के दिखने वाले भाग से बाहर हाइड्रोजन गैस अधिक चमकती है। यह उस प्रक्रिया का मजबूत साक्ष्य है जिसमें अपेक्षाकृत छोटे केंद्रीय क्षेत्र से निकली ऊर्जा दूर के गैस भंडार को प्रभावित करती है।
शोधकर्ताओं ने गैस का तापमान बढ़ते हुए सीधे नहीं मापा। उन्होंने आयनित हाइड्रोजन की चमक देखी, जो जेट के रास्ते में गैस की दशा बदलने का संकेत देती है। यह भंडार आगे चलकर नए तारों को बनाने वाली गैस दे सकता है; इसलिए जेट का वहाँ तक पहुँचना आकाशगंगा के विकास के लिए अहम है, हालांकि अध्ययन ने तारों के निर्माण में आई कमी नहीं मापी।
जेट किस गैस भंडार तक पहुँचते हैं
आकाशगंगा का दिखने वाला तारकीय चक्र उसके गैसीय परिवेश की सीमा नहीं है। उसके बाहर विरल गैस का घेरा फैला होता है, जिसे आकाशगंगा-परिवेश माध्यम, या CGM, कहते हैं। एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन विवरण के अनुसार यह घेरा दिखने वाले भाग से लगभग 10–20 गुना तक विस्तृत हो सकता है। इसकी गैस ठंडी होकर भीतर आती है और पर्याप्त सघन होने पर तारों के निर्माण में भाग लेती है।
सक्रिय अतिविशाल ब्लैक होल के पास से निकलने वाले रेडियो जेट गर्म प्लाज्मा की संकरी धाराएँ हैं। वे तारकीय चक्र पार कर बाहरी गैस से संपर्क कर सकते हैं। इसीलिए केंद्र का आकार छोटा होने पर भी उसके आसपास की गतिविधि का असर बहुत दूर तक पहुँचने का भौतिक रास्ता मौजूद है: जेट ऊर्जा को बाहर ले जाता है और रास्ते की गैस उसकी प्रतिक्रिया दर्ज करती है।
DESI और LOFAR ने मंद चमक कैसे पकड़ी
किसी एक आकाशगंगा के बाहर यह हाइड्रोजन चमक इतनी मंद है कि उसकी साफ तस्वीर लेना मुश्किल है। रमन अनुसंधान संस्थान के शोध विवरण में प्रमुख लेखिका नम्रता रॉय ने कहा, “We could not simply take a picture of one galaxy and see the effect clearly.” इसलिए शोधकर्ताओं ने अनेक आकाशगंगाओं के कमजोर मापों को एक साथ जोड़ा।
LOFAR रेडियो सर्वेक्षण से उन्हें जेट की दिशा और फैलाव का पता चला। DESI के प्रकाशीय आँकड़ों में उन्होंने उन दूरस्थ क्वासारों के स्पेक्ट्रा लिए जिनकी दृष्टि-रेखा सामने की रेडियो आकाशगंगा के गैसीय घेरे से होकर गुजरती थी। आकाशगंगा की दूरी के अनुरूप स्पेक्ट्रा को जोड़ने पर उस बाहरी गैस से आने वाली हाइड्रोजन-अल्फा, या H-अल्फा, प्रकाश-रेखा खोजी जा सकती थी।
इन मापों में रेडियो चित्र और प्रकाशीय स्पेक्ट्रम अलग काम करते हैं। रेडियो आँकड़े बताते हैं कि जेट आकाश में किस दिशा में फैला है; प्रकाशीय रेखा उस दिशा में गैस की प्रतिक्रिया दिखाती है। हर क्वासार की दृष्टि-रेखा को जेट के सापेक्ष रखने से शोधकर्ता जेट के पास की गैस की तुलना उससे हटकर स्थित गैस से कर सके।
सभी दिशाओं का औसत लेने पर संकेत क्यों दब गया
मूल अध्ययन में 324 रेडियो आकाशगंगा–क्वासार जोड़ियाँ थीं। जेट की धुरी से 20 डिग्री के भीतर की 74 दृष्टि-रेखाओं में H-अल्फा संकेत पाँच सिग्मा से अधिक मजबूत मिला, जबकि सभी दिशाओं को मिलाने पर उसकी सांख्यिकीय ताकत दो सिग्मा से कम थी। यहाँ सिग्मा माप के शोर की तुलना में संकेत की मजबूती बताता है।
अंतर का कारण गैस की दिशात्मक प्रतिक्रिया है। जेट के रास्ते का चमकता हिस्सा दूसरी दिशाओं के मंद मापों के साथ जोड़ दिया जाए तो औसत में उसका अलग निशान धुँधला पड़ जाता है। इसलिए सभी दिशाओं का कमजोर औसत बाहरी गैस पर असर न होने का प्रमाण नहीं है; वह बताता है कि असर पूरे घेरे में समान रूप से फैला नहीं दिखा।
दो चमकते क्षेत्र और ठंडी गैस की जाँच
जेट की दिशा में भी चमक हर जगह बराबर नहीं थी। उसका एक मजबूत क्षेत्र आकाशगंगा के तारकीय भाग से ठीक बाहर, भीतरी गैस घेरे के पास मिला। दूर रेडियो लोबों के आसपास संकेत फिर बढ़ा, जबकि बीच की दूरी पर वह कमजोर था। ये वे क्षेत्र हो सकते हैं जहाँ आगे बढ़ता जेट आसपास की गैस से अधिक प्रभावी ढंग से संपर्क करता है।
शोधकर्ताओं ने अपेक्षाकृत ठंडी गैस की जाँच मैग्नीशियम के अवशोषण से भी की। जेट की दिशा और उससे हटकर मिली दृष्टि-रेखाओं में इस गैस के अवशोषण, मात्रा के संकेत और रेखा की चौड़ाई में वैसा स्पष्ट दिशात्मक अंतर नहीं था जैसा H-अल्फा चमक में था। इससे ऐसी व्याख्या को बल मिलता है कि ठंडी गैस का भंडार कई दिशाओं में मौजूद है, लेकिन जेट अपने रास्ते के कुछ बादलों को विशेष रूप से चमका या आयनित कर रहा है।
H-अल्फा चमक घनत्व, दबाव या आयनीकरण में बदलाव से बढ़ सकती है। जेट के आसपास गैस का संपीड़न, झटके और उथल-पुथल संभावित प्रक्रियाएँ हैं; मौजूदा माप इनमें किसी एक को अकेला कारण तय नहीं करते। इसी कारण बाहरी गैस में ऊर्जा पहुँचने का दिशात्मक निशान मजबूत है, पर चमक से पूरे गैस घेरे का ताप या उसमें जमा कुल ऊर्जा सीधे नहीं निकाली जा सकती।
तारों के निर्माण के लिए इसका क्या अर्थ है
नए तारे बनने के लिए गैस को ठंडा होकर भीतर पहुँचना और फिर सघन होना पड़ता है। जेट यदि बाहरी भंडार के रास्ते में गैस को गरम, आयनित या विक्षुब्ध रखता है, तो उस हिस्से से भविष्य में तारे बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही केंद्र के ब्लैक होल और दूरस्थ गैस भंडार के बीच वह संबंध है जिसे नए माप अधिक स्पष्ट बनाते हैं।
अध्ययन ने किसी आकाशगंगा में समय के साथ तारों के बनने की दर घटते हुए नहीं देखी। उसके लिए यह जानना होगा कि जेट की ऊर्जा गैस की अलग-अलग अवस्थाओं में कितनी देर रहती है और गैस बाद में कितनी तेजी से भीतर आती है। आगे के अवलोकन और ऐसे नमूनों से मेल खाते सिमुलेशन इस दिशात्मक चमक को आकाशगंगा की दीर्घकालीन वृद्धि से जोड़ सकेंगे।
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