Mrk 501 में दूसरी X-ray आवाज—शांत जेट ने डिस्क की झलक दी

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय
Mrk 501 में दूसरी X-ray आवाज—शांत जेट ने डिस्क की झलक दी

भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 25 सितंबर 2026 की सूचना में बताया कि कम सक्रिय ब्लेज़र Mrk 501 के X-ray विकिरण में एक अतिरिक्त, अपेक्षाकृत कम ऊर्जा वाला घटक मिला है। नैनीताल के आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के अध्ययन में इसे केंद्रीय कृष्ण विवर के आसपास की अभिवृद्धि डिस्क से विकिरण का पहला संभावित संकेत माना गया है। डिस्क के योगदान की पुष्टि के लिए और अवलोकन चाहिए।

शोधकर्ता रिया भौमिक और आलोक सी. गुप्ता ने NASA के NICER और NuSTAR से एक ही समय में लिए गए आँकड़ों का विश्लेषण किया। मूल शोधपत्र के अनुसार, चार ब्लेज़रों के 13 संयुक्त स्पेक्ट्रा में Mrk 421 के आठ, Mrk 501 के तीन और PG 1553+113 तथा PKS 2155-304 के एक-एक स्पेक्ट्रम थे; सामान्य जेट मॉडल Mrk 421 के चार और Mrk 501 के दो स्पेक्ट्रा को संतोषजनक ढंग से नहीं समझा सका। इस तरह असामान्यता पूरे नमूने में नहीं, छह स्पेक्ट्रा में दिखी।

संयुक्त अवलोकनों में असामान्यता कहाँ मिली

NICER ने अपेक्षाकृत कम ऊर्जा और NuSTAR ने अधिक ऊर्जा वाले X-ray विकिरण को दर्ज किया। दोनों के आँकड़े साथ रखने से शोधकर्ता एक ही समय के व्यापक स्पेक्ट्रम पर जेट से आने वाले विकिरण का मॉडल लगा सके। उन्होंने पहले ऐसा वक्राकार मॉडल इस्तेमाल किया जो ब्लेज़रों के X-ray स्पेक्ट्रा को समझाने में आम है और उसमें हमारी आकाशगंगा के पदार्थ से होने वाला अवशोषण भी शामिल किया। ज्यादातर स्पेक्ट्रा का शुरुआती मिलान संतोषजनक रहा।

Mrk 501 के एक स्पेक्ट्रम को इसी मॉडल ने समझा दिया। बाकी दो में मापे गए और मॉडल से अपेक्षित विकिरण के बीच कम ऊर्जा की ओर अंतर बचा। यह अंतर महत्त्वपूर्ण है: यदि केवल जेट वाला मॉडल पूरा विकिरण समझा देता, तो किसी दूसरे घटक की जरूरत नहीं पड़ती। शोधकर्ताओं ने अतिरिक्त गर्म स्रोत जैसा घटक जोड़कर इन दोनों स्पेक्ट्रा का बेहतर मिलान पाया। उन्होंने उस घटक को अभिवृद्धि प्रवाह से संभावित विकिरण के रूप में समझा।

Mrk 501 में डिस्क की व्याख्या कैसे बनी

ब्लेज़र का जेट लगभग पृथ्वी की दिशा में होता है। इस कारण उसका बढ़ा हुआ विकिरण केंद्रीय कृष्ण विवर के आसपास से आने वाले कमजोर योगदान को ढक सकता है। Mrk 501 की अपेक्षाकृत शांत अवस्था में जेट का देखा गया विकिरण कम था, इसलिए दूसरे योगदान को स्पेक्ट्रम में अलग पहचानने की गुंजाइश बढ़ी। अतिरिक्त घटक इसी स्थिति में उभरा; जेट तब भी दर्ज हो रहा था और मॉडल में उसका हिस्सा बना रहा।

यह निष्कर्ष डिस्क की सीधी तस्वीर से नहीं निकला है। दूरबीनों ने X-ray फोटॉन मापे; अलग-अलग भौतिक स्रोतों का योगदान उनके ऊर्जा-वितरण से निकाले गए मॉडल पर आधारित है। गर्म घटक जोड़ने से मिलान बेहतर होना डिस्क वाली व्याख्या के पक्ष में जाता है, लेकिन मॉडल का अच्छा मिलान अपने आप उस विकिरण की उत्पत्ति तय नहीं करता। इसलिए Mrk 501 के लिए पहली संभावित पहचान कहना उपलब्ध आँकड़ों की सीमा के अनुरूप है।

कम सक्रिय अवस्था के निर्धारण में भी एक सावधानी है। संबंधित अवलोकन-दिनों पर MAXI/GSC की प्रत्यक्ष माप उपलब्ध नहीं थी। शोधकर्ताओं ने आसपास के दिनों की माप और पहले दर्ज अधिक चमकीली अवस्थाओं से तुलना करके Mrk 501 को कम चमक वाली अवस्था में रखा। इस तुलना से यह समझ आता है कि जेट का योगदान उस समय अपेक्षाकृत कमजोर क्यों माना गया, जबकि अतिरिक्त घटक की उत्पत्ति को अलग से परखना अभी बाकी है।

दूसरे ब्लेज़रों से तुलना क्या जोड़ती है

Mrk 421 के चार स्पेक्ट्रा में भी जेट के वक्राकार मॉडल के साथ कम ऊर्जा वाला अतिरिक्त घटक जोड़ने पर मिलान बेहतर हुआ। इस ब्लेज़र में अभिवृद्धि प्रवाह से X-ray योगदान की संभावना पहले के अध्ययनों में उठ चुकी थी। Mrk 501 के मामले में शोधकर्ताओं को उसके X-ray स्पेक्ट्रा में ऐसे योगदान का पिछला दावा नहीं मिला। इसीलिए समान विश्लेषण से निकला संकेत दोनों वस्तुओं के लिए अलग स्थिति रखता है।

Mrk 421 के उन्हीं स्पेक्ट्रा में एक संकरा अतिरिक्त उभार भी दिखा। उसे व्यापक कम ऊर्जा वाले घटक या Mrk 501 के परिणाम के साथ नहीं मिलाना चाहिए। DD India की रिपोर्ट के अनुसार, उस संकरे उभार की उत्पत्ति अस्पष्ट है और वह उपकरण या पृष्ठभूमि के प्रभाव से जुड़ा हो सकता है। यह संभावना विशेष रूप से उस उभार की व्याख्या पर लागू होती है।

बाकी दो ब्लेज़रों, PG 1553+113 और PKS 2155-304, में वैसा अतिरिक्त नरम घटक नहीं मिला। PG 1553+113 के स्पेक्ट्रम में सिलिकॉन से जुड़ी एक अलग अवशोषण विशेषता के लिए मॉडल में बदलाव करना पड़ा; PKS 2155-304 का स्पेक्ट्रम सामान्य वक्राकार मॉडल से समझाया गया। इस फर्क से अध्ययन का दायरा स्पष्ट होता है: एक ही उपकरण-जोड़ी और विश्लेषण पद्धति ने हर वस्तु में डिस्क जैसा संकेत नहीं दिखाया।

Mrk 501 में अब सबसे उपयोगी तुलना अलग-अलग चमक वाली अवस्थाओं के नए, संयुक्त अवलोकनों से होगी। कम सक्रिय दौर में अतिरिक्त घटक फिर दिखाई दे और जेट के तेज होने पर उसका सापेक्ष हिस्सा बदले, तो दोनों योगदान अलग करने का आधार मजबूत होगा। दूसरे उपकरणों के आँकड़े यह जाँचने में भी मदद करेंगे कि कम ऊर्जा वाला हिस्सा चुने गए मॉडल और पृष्ठभूमि के अनुमान पर कितना निर्भर है।

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