शनि के दक्षिणी ध्रुव पर दस-कोना उभरा—एक भुजा 16,700 किमी से लंबी

शनि के दक्षिणी ध्रुव को घेरती एक विशाल दस-कोनी वायुमंडलीय लहर सामने आई है। NASA की 2 सितंबर 2026 की विज्ञान-विज्ञप्ति के मुताबिक, Hubble के 2023 से मिले अवलोकनों में यह आकृति धीरे-धीरे स्पष्ट हुई और अलग तरंगदैर्घ्यों के आंकड़े बताते हैं कि संरचना वातावरण की कई ऊंचाइयों तक फैली है।
आकार और चाल दोनों इसे असाधारण बनाते हैं। AP की माप-आधारित रिपोर्ट के अनुसार, इसकी एक भुजा 10,000 मील यानी 16,700 किलोमीटर से अधिक लंबी है और पूरा तरंग-प्रतिरूप लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पूर्व की ओर खिसकता है; इसके विपरीत उत्तर का प्रसिद्ध षट्कोण ग्रह के सापेक्ष लगभग स्थिर है।
यह बादलों पर बनी सपाट ज्यामितीय सीमा नहीं

दस-कोना कोई ठोस सतह या अलग पदार्थ से खिंची रेखा नहीं है। यह शनि की एक शक्तिशाली जेट धारा में बनी वायुमंडलीय लहर है, जिसके मोड़ ध्रुव के चारों ओर दस अपेक्षाकृत सीधी भुजाओं जैसा रूप देते हैं। Hubble की ध्रुवीय रूप में बदली गई छवियों में संकेंद्रित पट्टियों के भीतर गहरे क्षेत्र की सीमा पर ये मोड़ पहचाने गए।
अलग-अलग तरंगदैर्घ्य शनि के वातावरण की अलग ऊंचाइयों को जांचते हैं। इन अवलोकनों में दस-कोने की स्थिति थोड़ी बदलने का अर्थ है कि उसकी बनावट ऊर्ध्वाधर दिशा में भी फैली हुई है। इसलिए दिखाई देने वाली बादल-पट्टियां लहर का केवल बाहरी संकेत हैं; पूरी संरचना को एक ही ऊंचाई पर मौजूद नियमित बहुभुज मानना भ्रामक होगा।
आकृति भी किसी कठोर, पूर्णतः नियमित दस-कोने जैसी नहीं है। उसकी भुजाएं बहती गैसों में बने तरंग-प्रतिरूप का हिस्सा हैं, इसलिए ऊंचाई, समय और उपयोग किए गए फिल्टर के साथ उनकी दिखाई देने वाली जगह बदल सकती है। इसी कारण एक भुजा की लंबाई से उसका सटीक व्यास निकालना उचित नहीं होगा।
धीमा प्रतिरूप तेज जेट धारा के भीतर चल रहा है

लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की पूर्वमुखी गति दस-कोने के पूरे प्रतिरूप की चाल है, उसमें बहने वाली गैस की नहीं। किसी जेट धारा में हवा बहुत तेज चल सकती है, जबकि उसके भीतर बनी लहर ग्रह के सापेक्ष धीरे सरकती है। यह अंतर दक्षिणी संरचना की तुलना उत्तरी षट्कोण से करते समय महत्वपूर्ण है।
उत्तर और दक्षिण की आकृतियों में समानता इतनी है कि दोनों ध्रुवीय जेट धाराओं से जुड़ी बहुभुजीय लहरें हैं। लेकिन उत्तर में छह भुजाएं हैं और वह संरचना चार दशक से अधिक समय से लगभग एक ही स्थान पर दिखाई दे रही है; दक्षिण में दस भुजाएं हैं, उसका पुष्ट रिकॉर्ड केवल कुछ वर्षों का है और वह पूर्व की ओर बढ़ रही है। दक्षिणी आकृति के अलग-अलग हिस्सों का गहरापन भी समान नहीं है, जो उसके अभी विकसित होने की संभावना से मेल खाता है।
इसलिए नया दस-कोना उत्तरी षट्कोण की साधारण प्रतिलिपि नहीं है। दोनों की तुलना से यह जांचने का अवसर मिलता है कि जेट की बनावट, आसपास के विक्षोभ और मौसमी रोशनी किसी लहर की भुजाओं, गति और स्थिरता को कैसे प्रभावित करते हैं। अभी उपलब्ध अवलोकन समान रूप दिखाते हैं, समान उत्पत्ति सिद्ध नहीं करते।
संकेत 2023 के आंकड़ों तक पीछे मिले

खोज किसी एक Hubble तस्वीर से नहीं हुई। UC Berkeley Space Sciences Laboratory के विवरण के अनुसार, 2024 में जमा एक भू-आधारित तस्वीर में दक्षिणी ध्रुव के पास लहरदार पट्टी दिखी; इसके बाद 2024 और 2025 की Hubble छवियों को ध्रुवीय दृश्य में बदलने पर लगभग 63 डिग्री दक्षिण अक्षांश पर दस-कोना स्पष्ट हुआ और अभिलेखों की दोबारा जांच ने उसका संकेत 2023 तक पहुंचा दिया।
इस समयरेखा का अर्थ यह नहीं है कि लहर ठीक 2023 में ही बनी थी। शनि के झुकाव के कारण कई वर्षों तक उसका दक्षिणी ध्रुव पृथ्वी से अनुकूल कोण पर दिखाई नहीं देता था। संरचना के 2017 से 2023 के बीच बनने की संभावना जताई गई है, लेकिन अवलोकन-अंतराल के कारण उसकी वास्तविक जन्मतिथि तय नहीं की जा सकती।
Cassini ने 2004 से 2017 तक शनि का अध्ययन किया, पर दक्षिण में ऐसी दीर्घजीवी नियमित संरचना नहीं देखी। 2004 में लगभग 60.5 डिग्री दक्षिण अक्षांश पर जेट धारा में बहुभुजीय विक्षोभ कुछ दिनों के लिए दिखाई दिया था और फिर दोबारा दर्ज नहीं हुआ। नया दस-कोना कई वर्षों के आंकड़ों में क्रमशः स्पष्ट हुआ है, इसलिए इसे उस अल्पकालिक घटना की पुनर्खोज कहना भी अभी उचित नहीं है।
उम्र, कारण और स्थिरता अब भी अज्ञात
दस-कोने के बनने का भौतिक कारण अभी स्थापित नहीं हुआ है। उसके उत्तर में लगभग 55 डिग्री दक्षिण अक्षांश पर एक प्रतिचक्रवाती भंवर देखा गया, जो 2023 में मौजूद था और 2025 में गहरा दिखाई दिया। यह संभव है कि उस भंवर से निकला कोई शुरुआती विक्षोभ जेट धारा में फंसकर बहुभुजीय लहर बना हो, लेकिन मौजूदा तस्वीरें कारण और परिणाम का यह संबंध सिद्ध नहीं करतीं।
दूसरा खुला प्रश्न संरचना की गहराई और रासायनिक बनावट का है। उसका नीला रंग पैदा करने वाले वायुकणों की संरचना ज्ञात नहीं है, और यह भी तय नहीं कि लहर निचले वातावरण में कितनी दूर तक जाती है। अलग ऊंचाइयों पर उसकी उपस्थिति का संकेत मिला है, पर पूर्ण त्रि-आयामी बनावट के लिए अधिक विस्तृत आंकड़े चाहिए।
सबसे बड़ी अनिश्चितता जीवनकाल की है। कुछ वर्षों का रिकॉर्ड यह बताने के लिए पर्याप्त नहीं कि दस-कोना उत्तरी षट्कोण की तरह दशकों तक स्थिर होगा, अधिक मजबूत बनेगा या टूट जाएगा। Hubble और James Webb Space Telescope के अगले अवलोकन तथा बेहतर त्रि-आयामी मॉडल इसकी चाल, गहराई और संभावित मौसमी विकास को परखेंगे; फिलहाल इतना ही पुष्ट है कि लहर मौजूद है, पूर्व की ओर खिसक रही है और 2023 से 2025 के आंकड़ों में अधिक स्पष्ट हुई।
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