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NASA ने ग्रहण का पीछा जेट से किया—तीन मिनट में क्या मापा

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय| 12
NASA ने ग्रहण का पीछा जेट से किया—तीन मिनट में क्या मापा

12 अगस्त 2026 के पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान NASA का WB-57 अनुसंधान जेट चंद्रमा की चलती छाया के साथ उड़ा। NASA+ का कार्यक्रम पृष्ठ अब घटना को संपन्न दिखाता है और WB-57 से छाया का पीछा करते समय मिली फुटेज को ग्रहण कवरेज में सूचीबद्ध करता है।

इसी अभियान में NASA समर्थित छात्र दलों को आइसलैंड और स्पेन से वैज्ञानिक गुब्बारे छोड़ने थे। Space.com की 11 अगस्त की स्वतंत्र व्याख्या ने जेट और गुब्बारों को एक समन्वित अभियान के रूप में दर्ज किया था। महत्वपूर्ण अंतर यह है कि शीर्षक के “तीन मिनट” केवल जेट से कोरोना देखने की अनुमानित अवधि हैं; गुब्बारों के वायुमंडलीय माप इससे कहीं लंबी समय-श्रृंखला के लिए तय किए गए थे।

गति ने समय बढ़ाया, ऊंचाई ने साफ और विस्तृत दृश्य दिया

चंद्रमा की चलती छाया के साथ बादलों के ऊपर उड़ता NASA WB-57, जिससे पूर्णता का अवलोकन जमीन की अपेक्षा अधिक देर चला

जमीन पर एक कैमरा उतनी ही देर पूर्णता में रहता है, जितनी देर चंद्रमा की गहरी छाया उसके स्थान के ऊपर होती है। उसी दिशा में उड़ता विमान छाया के भीतर कुछ अधिक समय रह सकता है। NASA की मिशन रूपरेखा में WB-57 की गति 460 मील प्रति घंटा और कोरोना देखने की खिड़की करीब तीन मिनट थी, जबकि जमीन पर इस ग्रहण की अधिकतम पूर्णता दो मिनट 18 सेकंड थी। यानी दावा तीन अतिरिक्त मिनट का नहीं, कुल करीब तीन मिनट के हवाई अवलोकन का है।

करीब 50,000 फुट की ऊंचाई ने अलग लाभ दिया। वहां विमान अधिकांश बादलों के ऊपर था और कैमरों के सामने जमीन की अपेक्षा कम धूल तथा जलवाष्प आती है। निचले वायुमंडल में अवशोषित हो जाने वाली कुछ अवरक्त तरंगदैर्ध्य भी इतनी ऊंचाई से उपकरणों तक पहुंच सकती हैं। इसलिए गति ने संभावित अवलोकन-अवधि बढ़ाई, जबकि ऊंचाई ने मौसम का जोखिम घटाया और मापी जा सकने वाली रोशनी की सीमा विस्तृत की।

चार कैमरों का लक्ष्य कोरोना की बदलती बनावट था

NASA के वैज्ञानिक मिशन-विवरण में जेट की नाक पर लगे SCIFLI Multispectral Airborne Imager, यानी SAMI, के चार उच्च-विभेदन कैमरे, कम से कम 20 छवियां प्रति सेकंड की दर, 50,000 फुट की उड़ान और करीब तीन मिनट की अवलोकन-खिड़की दर्ज हैं। कैमरों को दृश्य तथा अवरक्त प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों में कोरोना की संरचनाएं, बाहर बहता पदार्थ और तेज बदलाव पकड़ने थे।

यदि कोई कैमरा पूरे 180 सेकंड न्यूनतम घोषित दर पर चला हो, तो गणना लगभग 3,600 फ्रेम बनती है। यह संभावित मात्रा है, प्रकाशित परिणाम नहीं: वास्तविक उपयोगी फ्रेम, रिकॉर्डिंग की अवधि और डेटा की गुणवत्ता अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। कई तरंगदैर्ध्यों का लाभ यह है कि एक ही सौर क्षेत्र के अलग भौतिक गुणों की तुलना की जा सकती है, जो सामान्य रंगीन तस्वीर से संभव नहीं होती।

वैज्ञानिक इन रिकॉर्डों से सौर प्रॉमिनेंस की उत्पत्ति, कोरोना के लगभग दस लाख डिग्री तक गर्म होने और कोरोना से सौर पवन में पहुंचने वाले पदार्थ के संबंध की जांच करना चाहते हैं। 2024 के अभियान में कुछ चमकीली विशेषताएं जरूरत से अधिक प्रकाशित हो गई थीं; 2026 के लिए एक्सपोजर समय बदलने और डेटा-प्रसंस्करण को तेज करने वाले सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की योजना थी। इससे बेहतर डेटा मिलने की संभावना बढ़ती है, लेकिन परिणाम सिद्ध नहीं हो जाते।

आइसलैंड और स्पेन के गुब्बारों ने अलग प्रश्न चुने

आइसलैंड में ग्रहण से पहले और बाद में छोड़े गए गुब्बारे, जो वायुमंडलीय सीमा-परत के बदलाव मापते हैं

आइसलैंड में दो दलों की योजना 80 छोटे गुब्बारे छोड़ने की थी—40 प्रति दल। उड़ानें ग्रहण से 18 घंटे पहले शुरू होकर आठ घंटे बाद तक चलनी थीं। यह क्रम पूर्णता के कुछ मिनटों को अलग से देखने के बजाय सामान्य स्थिति, अचानक अंधेरे की प्रतिक्रिया और बाद की वापसी की तुलना के लिए बनाया गया था।

उनका मुख्य विषय वायुमंडलीय सीमा-परत था, यानी धरातल के सीधे संपर्क में रहने वाला निचला वायुमंडल। इसकी मोटाई सतह के तापमान और हवा की नमी सहित कई कारकों से बदलती है। 2023 और 2024 के गुब्बारा अभियानों में साफ आकाश वाले स्थानों पर यह परत पतली हुई थी, लेकिन बादल वाले स्थानों पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं मिली। आइसलैंड के लंबे अगस्त-दिन ने यह जांचने का अलग अवसर दिया कि अचानक घटा सौर ताप कमजोर रात्रिकालीन प्रभाव के बीच परत को कितना बदलता है।

स्पेन में तीन दलों के लिए छह बड़े गुब्बारे तय थे। उनके 360-डिग्री कैमरों को ऊपर से आगे बढ़ती चंद्र-छाया दर्ज करनी थी, जबकि दूसरे उपकरण ओजोन का स्तर मापने के लिए थे। 2024 के समान प्रयोगों में पूर्णता के दौरान ओजोन घटा था; 2026 का ग्रहण अलग मौसम और दिन के बाद के समय में हुआ, इसलिए नई समय-श्रृंखला से यह देखा जा सकेगा कि संकेत दोहराया गया या स्थानीय दशाओं ने उसे बदला।

इस तरह अभियान को केवल “लगभग 80 गुब्बारों” का प्रयोग कहना अधूरा है। सार्वजनिक योजना में आइसलैंड के 80 छोटे गुब्बारों के अतिरिक्त स्पेन के छह गुब्बारे थे। पहले समूह का केंद्रीय प्रश्न सीमा-परत का विकास था; दूसरे का उद्देश्य छाया की चौतरफा रिकॉर्डिंग और ओजोन में संभावित बदलाव था।

अभी अभियान और लक्ष्य पुष्ट हैं, वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं

स्पेन के ऊपर चंद्र-छाया दर्ज करता और सूर्य का प्रकाश घटने पर ओजोन मापता वैज्ञानिक गुब्बारा

तीनों मंच अलग पैमाने पर काम करते हैं। जमीन ग्रहण का स्थानीय संदर्भ देती है; तेज, ऊंचा जेट कोरोना को बादलों के ऊपर अधिक देर और कई तरंगदैर्ध्यों में देखता है; गुब्बारे बदलते वायुमंडल के भीतर से समय के साथ तापमान, नमी, सीमा-परत और ओजोन संबंधी संकेत जुटाते हैं। यही विभाजन बताता है कि जेट और गुब्बारे एक-दूसरे के विकल्प नहीं थे।

फिलहाल सार्वजनिक पृष्ठ घटना, जेट कवरेज और प्रयोगों के घोषित मापन-लक्ष्यों की पुष्टि करते हैं, लेकिन वास्तविक उपयोगी फ्रेमों की संख्या, गुब्बारों की सफल उड़ानों का अंतिम हिसाब और विश्लेषित वैज्ञानिक परिणाम उपलब्ध नहीं कराते। इसलिए यह कहना सही है कि तीन मिनट की खिड़की कोरोना के तेज बदलाव दर्ज करने के लिए बनाई गई थी—यह नहीं कि कोरोना के ताप, सौर पवन, सीमा-परत और ओजोन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर तीन मिनट में मिल गए।

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