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बैंक खाते लगभग बराबर, फिर भी महिलाएँ गिग काम से बाहर क्यों हैं

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|6 मिनट पढ़ने का समय| 8
बैंक खाते लगभग बराबर, फिर भी महिलाएँ गिग काम से बाहर क्यों हैं

ILO और NCAER ने 24 अगस्त 2026 को भारत की मंच अर्थव्यवस्था में महिलाओं के डिजिटल वित्तीय समावेशन पर संयुक्त नीति-संक्षेप प्रकाशित किया। NCAER के आधिकारिक प्रकाशन-पृष्ठ पर डिजिटल साक्षरता, आवागमन, सुरक्षा, सामाजिक मानदंड और औपचारिक वित्त तक सीमित पहुँच को महिलाओं के प्रवेश और प्रगति की प्रमुख बाधाएँ बताया गया है।

केंद्रीय निष्कर्ष यह है कि बैंक खाता होना और उससे स्वतंत्र रूप से डिजिटल लेनदेन तथा कमाई कर पाना अलग उपलब्धियाँ हैं। 24 अगस्त के स्वतंत्र समाचार विवरण में 2024 में औपचारिक खाता रखने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 89 प्रतिशत और पुरुषों की 88 प्रतिशत बताई गई है, जबकि 2022–23 में ऑनलाइन बैंकिंग कर सकने वालों का अनुपात क्रमशः 25.2 और 47.1 प्रतिशत था। इसलिए लगभग बराबरी केवल खाता-स्वामित्व में है, सक्रिय डिजिटल उपयोग, ऋण-पहुँच या गिग रोजगार में नहीं।

खाते से गिग आय तक चार अलग पड़ाव

बैंक खाता सत्यापित होने के बाद भी डिजिटल उपयोग, ऋण और मंच सक्रियण पर रुकती महिला कामगार की प्रवेश प्रक्रिया

महिलाओं की कम भागीदारी को चार पड़ावों में समझा जा सकता है: औपचारिक खाता, उसका स्वतंत्र डिजिटल उपयोग, काम शुरू करने के लिए ऋण या पूंजी और मंच पर नियमित कमाई। पहले पड़ाव पर लगभग बराबरी के बावजूद अगले चरणों में निजी फोन, पंजीकृत सिम, डिजिटल कौशल, आय का प्रमाण, वाहन या उपकरण और सुरक्षित आवागमन की जरूरत जुड़ जाती है।

मूल संयुक्त नीति-संक्षेप में भारत के मंच कामगारों की संख्या 2020 में अनुमानित 77 लाख, वित्त वर्ष 2024–25 में 1.2 करोड़ और 2029–30 में संभावित 2.35 करोड़ दी गई है; इसमें उद्धृत एक शहरी अध्ययन में दोपहिया डिलीवरी चालकों के बीच महिलाओं की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से कम थी। कामगारों की कुल संख्याएँ अनुमान हैं, जबकि एक प्रतिशत से कम वाला आँकड़ा स्थान-आधारित शहरी डिलीवरी का प्रत्यक्ष अध्ययन है—पूरी गिग अर्थव्यवस्था में महिलाओं की राष्ट्रीय हिस्सेदारी नहीं।

यह सीमा महत्वपूर्ण है। उपलब्ध सामग्री महिलाओं की गहरी कम भागीदारी की पुष्टि करती है, लेकिन सभी ऑनलाइन और स्थान-आधारित मंचों को समेटने वाला कोई नया राष्ट्रीय महिला-प्रतिशत नहीं देती। शीर्षक में “बाहर” होने का अर्थ पूर्ण अनुपस्थिति नहीं, बल्कि बैंकिंग पहुँच के मुकाबले रोजगार में बहुत कमजोर उपस्थिति है।

खाता सक्रिय और स्वतंत्र डिजिटल उपयोग नहीं बनाता

फोन और पंजीकृत सिम पर स्वतंत्र नियंत्रण न होने से अधूरी रहती ऑनलाइन बैंकिंग और गिग पंजीकरण प्रक्रिया

मंच पर पंजीकरण, काम स्वीकार करना, भुगतान देखना और वित्तीय सेवा चुनना प्रायः अनुप्रयोग तथा डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़ा होता है। फोन या पंजीकृत सिम पर महिला का नियंत्रण न हो, उपकरण साझा करना पड़े या ऑनलाइन नुकसान का डर बना रहे तो उसके नाम का खाता भी स्वतंत्र कार्य-साधन नहीं बनता।

व्यापक वार्षिक मॉड्यूलर सर्वेक्षण 2022–23 के उद्धृत परिणामों में इंटरनेट पर खोज, ईमेल और ऑनलाइन बैंकिंग—तीनों की संयुक्त क्षमता 15 वर्ष या अधिक उम्र की 18 प्रतिशत महिलाओं और 30.1 प्रतिशत पुरुषों में थी। ग्रामीण भारत में ऑनलाइन बैंकिंग कर सकने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 17.1 प्रतिशत और पुरुषों की 39.2 प्रतिशत थी। ये डिजिटल क्षमता के सर्वेक्षण-आधारित माप हैं, गिग मंचों पर सक्रिय कामगारों की गणना नहीं।

24 अगस्त की दूसरी स्वतंत्र रिपोर्ट में उपकरण पर महिलाओं की निर्भर पहुँच, औपचारिक वित्त की कमी, डिजिटल साक्षरता, सुरक्षा और सामाजिक बंधनों को परस्पर जुड़ी बाधाएँ बताया गया है। इसका व्यावहारिक असर यह है कि खाता खुलने के बाद भी महिला पंजीकरण से भुगतान और बचत तक की पूरी प्रक्रिया स्वयं नहीं संभाल पाती।

ऋण, सुरक्षा और आवागमन अगला अवरोध हैं

दोपहिया वाहन उपलब्ध होने पर भी जमानत और आय इतिहास के अभाव में रुका गिग काम का वित्तपोषण

स्थान-आधारित गिग काम में प्रवेश से पहले दोपहिया वाहन, स्मार्टफोन, उपकरण या प्रशिक्षण पर खर्च करना पड़ सकता है। प्रवेश निवेश के लिए पूंजी न होने की बात 52 प्रतिशत महिलाओं और 40 प्रतिशत पुरुषों ने कही, जबकि मार्च 2023 में व्यक्तियों को दिए गए बैंकों के बकाया ऋण में महिलाओं की हिस्सेदारी 22.9 प्रतिशत थी। ये अलग माप हैं, लेकिन दोनों यही अंतर दिखाते हैं कि खाता होना ऋण स्वीकृति या जरूरी परिसंपत्ति मिलने के समान नहीं है।

वित्त उपलब्ध हो जाए, तब भी सुरक्षा और आवागमन स्वतंत्र बाधाएँ बने रहते हैं। डिलीवरी या सवारी के काम में अपरिचित इलाकों तक जाना, वाहन चलाना और अलग-अलग समय की पाली स्वीकार करना पड़ सकता है। परिवार की पाबंदियाँ, देखभाल की जिम्मेदारी या असुरक्षित मार्ग उपलब्ध कामों की संख्या घटा सकते हैं और उससे आय भी अनियमित हो सकती है।

अनियमित आय पर निश्चित किस्त अतिरिक्त जोखिम पैदा करती है। इसी कारण प्रस्तावों में छोटी अवधि का ऋण, बचत, सूक्ष्म बीमा और आय या स्वास्थ्य संबंधी झटके के समय किस्त रोकने अथवा पुनर्निर्धारित करने की औपचारिक व्यवस्था शामिल है। उद्देश्य केवल प्रवेश के लिए पैसा देना नहीं, बल्कि कामगार को आय घटने पर कर्ज के जाल में जाने से बचाना है।

डिजिटल आय-बही अवसर भी है और जोखिम भी

मंच पर पूरे काम और भुगतान से सत्यापन योग्य डिजिटल आय-बही बन सकती है। ऋणदाता पारंपरिक जमानत के बजाय इस नकदी प्रवाह से भुगतान क्षमता आँकें तो औपचारिक ऋण इतिहास या अपने नाम की संपत्ति से वंचित महिलाओं के लिए पूंजी का रास्ता खुल सकता है। एक संभावना मंचों और विनियमित वित्तीय संस्थानों की साझेदारी है; दूसरी, सहमति के आधार पर वित्तीय जानकारी साझा करने वाले सार्वजनिक डिजिटल ढाँचे का उपयोग।

यह अभी स्थापित सुविधा नहीं है। मंच संचालक वर्तमान खाता-समेकक व्यवस्था में वित्तीय सूचना देने वाली अधिकृत संस्थाओं में शामिल नहीं हैं और कामगारों की मंच-आय निर्धारित वित्तीय सूचना की मौजूदा श्रेणियों में नहीं आती। इसलिए मंच पर बना आय-रिकॉर्ड ऋणदाताओं के बीच अपने आप स्थानांतरित नहीं हो सकता।

डेटा से ऋण-पहुँच बढ़ाने में नया भेदभाव भी पैदा हो सकता है। सुरक्षा या देखभाल के कारण कम काम स्वीकार करने वाली महिला की आय-बही कमजोर दिख सकती है; यदि वही रिकॉर्ड बिना संदर्भ के ऋण की शर्त तय करे तो पुरानी सामाजिक बाधा डिजिटल निर्णय में दोहराई जाएगी। वापस ली जा सकने वाली सहमति, डेटा सुरक्षा, स्वचालित निर्णयों में पक्षपात की जाँच और शिकायत-निवारण इसलिए वित्तीय विस्तार की बुनियादी शर्तें हैं।

अभी सिफारिशें हैं, लागू योजना नहीं

यह प्रकाशन नई सरकारी योजना, नया नियम या शुरू हो चुकी ऋण सुविधा नहीं है। इसमें नियामकीय परीक्षण के माध्यम से मंच की आय और सामाजिक-सुरक्षा रिकॉर्ड के उपयोग की जाँच, महिलाओं की आय के अनुरूप वित्तीय उत्पाद तथा कम कमाई वाले समय में लचीली अदायगी की सिफारिश की गई है।

अगला निर्णायक प्रश्न यह है कि नियामक मंच से बनी आय-सूचना को सहमति-आधारित ऋण व्यवस्था में कैसे शामिल करेंगे और क्या मंच महिलाओं की भागीदारी, कमाई, ऋण-मंजूरी तथा काम छोड़ने के अलग आँकड़े सार्वजनिक करेंगे। फिलहाल पुष्ट स्थिति यही है: खाता-स्वामित्व का लैंगिक अंतर लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन स्वतंत्र डिजिटल उपयोग, पूंजी, सुरक्षित आवागमन और टिकाऊ गिग आय तक पहुँचने की श्रृंखला अधूरी है।

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