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डीप-टेक स्टार्टअप को अब 20 साल की पहचान—कारोबार सीमा ₹300 करोड़

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय| 36
डीप-टेक स्टार्टअप को अब 20 साल की पहचान—कारोबार सीमा ₹300 करोड़

संशोधित DPIIT पात्रता में सामान्य और डीप-टेक स्टार्टअप के लिए अलग सीमाएँ हैं। सामान्य इकाई निगमन या पंजीकरण से 10 वर्ष तक और किसी भी वित्त वर्ष में ₹200 करोड़ से अधिक कारोबार न होने तक पात्र रह सकती है; DPIIT से डीप-टेक मान्यता पाने वाली इकाई के लिए ये सीमाएँ 20 वर्ष और ₹300 करोड़ हैं।

सिर्फ उन्नत तकनीक इस्तेमाल करने या कारोबार को डीप-टेक कहने से विस्तारित सीमा नहीं मिलती। इकाई को सामान्य स्टार्टअप की शर्तों के साथ वैज्ञानिक या अभियांत्रिकी ज्ञान, अपेक्षाकृत अधिक अनुसंधान एवं विकास व्यय, महत्वपूर्ण नवीन बौद्धिक संपदा और लंबे तथा अनिश्चित विकास-चक्र जैसी अतिरिक्त विशेषताएँ दस्तावेजों से साबित करनी होंगी।

सामान्य और डीप-टेक पात्रता का सीधा अंतर

सामान्य स्टार्टअप की 10 वर्ष और ₹200 करोड़ की जाँच के मुकाबले डीप-टेक की 20 वर्ष और ₹300 करोड़ की पात्रता-जाँच

DPIIT की 4 फरवरी 2026 की राजपत्र अधिसूचना सामान्य स्टार्टअप के लिए अधिकतम 10 वर्ष और ₹200 करोड़ की सीमा निर्धारित करती है। इसी अधिसूचना के तहत डीप-टेक के रूप में मान्यता-प्राप्त इकाई को 20 वर्ष और ₹300 करोड़ की अलग सीमा मिलती है।

  • सामान्य स्टार्टअप: निगमन या पंजीकरण से अधिकतम 10 वर्ष और किसी भी वित्त वर्ष में कारोबार ₹200 करोड़ से अधिक नहीं।
  • डीप-टेक स्टार्टअप: निगमन या पंजीकरण से अधिकतम 20 वर्ष और किसी भी वित्त वर्ष में कारोबार ₹300 करोड़ से अधिक नहीं।

यह केवल मौजूदा वित्त वर्ष के कारोबार की जाँच नहीं है। निगमन या पंजीकरण के बाद किसी भी पिछले वित्त वर्ष में लागू सीमा पार होने पर इकाई संबंधित श्रेणी में स्टार्टअप नहीं रहती। उम्र की गणना भी मान्यता मिलने की तारीख से नहीं, निगमन या पंजीकरण की तारीख से होती है।

पुराने मार्गदर्शकों में लिखी ₹100 करोड़ की सीमा अब सामान्य DPIIT मान्यता के लिए सही नहीं है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा के अनुसार सामान्य सीमा ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ की गई और डीप-टेक के लिए 20 वर्ष तथा ₹300 करोड़ का प्रावधान जोड़ा गया।

कौन-से संस्था प्रकार आवेदन कर सकते हैं

कंपनी, भागीदारी, LLP और पंजीकृत सहकारी समिति के संस्था-दस्तावेजों की समान DPIIT पात्रता-जाँच

पात्रता अब केवल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तक सीमित नहीं है। भारत में निगमित या पंजीकृत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पंजीकृत भागीदारी फर्म, सीमित दायित्व भागीदारी यानी LLP, केंद्रीय रजिस्ट्रार के पास पंजीकृत बहु-राज्यीय सहकारी समिति और राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सहकारी समिति आवेदन कर सकती है।

Startup India का पात्रता पृष्ठ इन संस्था प्रकारों के साथ सामान्य श्रेणी के लिए 10 वर्ष और ₹200 करोड़ तथा डीप-टेक के लिए 20 वर्ष और ₹300 करोड़ की सीमाएँ दिखाता है। सहकारी संस्था का पात्र कानूनी स्वरूप होना आवेदन का रास्ता खोलता है, लेकिन इससे मान्यता अपने-आप नहीं मिलती।

हर आवेदक को उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा के नवाचार, विकास अथवा सुधार पर काम करना चाहिए। वैकल्पिक रूप से उसका कारोबारी मॉडल विस्तार योग्य और रोजगार या संपत्ति सृजन की उच्च संभावना वाला हो सकता है। इसलिए केवल नया पंजीकरण या पात्र कानूनी ढाँचा पर्याप्त नहीं है।

डीप-टेक होने की अतिरिक्त कसौटी

अनुसंधान व्यय, नवीन बौद्धिक संपदा और लंबे विकास-चक्र के प्रमाणों से डीप-टेक दावे की जाँच

डीप-टेक कोई तैयार क्षेत्र-सूची या स्वघोषित लेबल नहीं है। समाधान नए वैज्ञानिक या अभियांत्रिकी ज्ञान अथवा प्रगति पर आधारित और अभी विकासाधीन होना चाहिए। इसके साथ कुल आय या वित्तपोषण के मुकाबले अनुसंधान एवं विकास पर अपेक्षाकृत अधिक व्यय, महत्वपूर्ण नवीन बौद्धिक संपदा का स्वामित्व या सृजन तथा उसके व्यावसायीकरण के कदम भी अपेक्षित हैं।

चौथी विशेषता विकास की लंबी समय-सीमा, दीर्घकालिक परियोजना अवधि, अधिक पूंजी या अवसंरचना की जरूरत और पर्याप्त तकनीकी या वैज्ञानिक अनिश्चितता है। एक स्वतंत्र अधिसूचना-आधारित रिपोर्ट लंबे विकास-चक्र, अनुसंधान की तीव्रता और पूंजी की अधिक जरूरत को विस्तारित पात्रता का आधार बताती है।

इसका अर्थ है कि सामान्य सॉफ्टवेयर, कोई AI उपकरण या उपलब्ध तकनीकों को जोड़कर बनाई गई सेवा अपने-आप डीप-टेक नहीं बनती। DPIIT निर्धारित ढाँचे, मानदंडों और दिशानिर्देशों के अनुसार आवेदक के दस्तावेजों तथा सूचनाओं से तय करेगा कि अतिरिक्त विशेषताएँ पूरी होती हैं या नहीं।

आवेदन में निगमन या पंजीकरण प्रमाणपत्र और कारोबार का विवरण तो चाहिए ही; डीप-टेक दावे के लिए अनुसंधान गतिविधियों, उनके व्यय, बौद्धिक संपदा, व्यावसायीकरण की प्रगति और तकनीकी अनिश्चितता से जुड़े प्रमाण भी प्रासंगिक होंगे। मान्यता देने से पहले DPIIT अतिरिक्त दस्तावेज या सूचना मांग सकता है और पात्रता पूरी न होने पर कारण बताते हुए आवेदन अस्वीकार कर सकता है।

पुनर्गठित कारोबार पर रोक क्यों निर्णायक है

नई कंपनी, LLP या सहकारी संस्था बनाकर किसी मौजूदा कारोबार को उसी रूप में स्थानांतरित करना पात्रता का रास्ता नहीं है। मौजूदा व्यवसाय के विभाजन या पुनर्गठन से बनी इकाई को स्टार्टअप नहीं माना जाएगा। यह रोक सामान्य और डीप-टेक दोनों श्रेणियों पर लागू होती है।

पात्रता को दो स्तंभों में जाँचा जा सकता है। पहला स्तंभ कानूनी और संख्यात्मक है—संस्था का प्रकार, निगमन या पंजीकरण की तारीख और प्रत्येक वित्त वर्ष का कारोबार। दूसरा वास्तविक गतिविधि का है—नवाचार या विस्तार योग्य मॉडल, स्वतंत्र नया कारोबार और डीप-टेक दावा होने पर वैज्ञानिक ज्ञान, अनुसंधान व्यय, नवीन बौद्धिक संपदा तथा लंबे अनिश्चित विकास के प्रमाण। एक स्तंभ की कमी दूसरे की मजबूती से पूरी नहीं होती।

DPIIT मान्यता और कर-छूट अलग निर्णय हैं

DPIIT की स्टार्टअप मान्यता मिलने का अर्थ यह नहीं कि आयकर अधिनियम की धारा 80-IAC के तहत कटौती भी स्वतः मिल गई। आयकर विभाग का स्टार्टअप मार्गदर्शन दोनों परिभाषाओं और शर्तों को अलग बताता है: 80-IAC लाभ के लिए अलग वैधानिक पात्रता और अंतर-मंत्रालयी बोर्ड का प्रमाणपत्र आवश्यक है।

इस अंतर का सहकारी संस्थाओं पर सीधा असर है। वे DPIIT मान्यता के लिए पात्र संस्था प्रकार हो सकती हैं, लेकिन 80-IAC कटौती कंपनी और LLP तक सीमित है। सामान्य या डीप-टेक श्रेणी तय करने के बाद मान्यता की उम्र और कारोबार सीमा जाँचनी चाहिए; कर लाभ की पात्रता को अलग चरण मानना चाहिए। DPIIT मान्यता आवेदन की प्रक्रिया में प्रपत्र और मान्यता तथा कर-छूट का अंतर विस्तार से समझाया गया है।

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