DPIIT स्टार्टअप मान्यता के लिए आवेदन कैसे करें: पात्रता, NSWS प्रपत्र और कर-छूट का अंतर

DPIIT स्टार्टअप मान्यता के लिए पहले संस्था का कानूनी स्वरूप, आयु, कारोबार, स्वामित्व और नवाचार संबंधी पात्रता जाँचें। पात्र होने पर NSWS में खाता बनाकर Registration as a Startup को केंद्रीय अनुमोदनों में जोड़ें, संस्था की सही जानकारी तथा सहायक दस्तावेज दें और प्रपत्र जमा करें।
DPIIT मान्यता और धारा 80-IAC का प्रमाणन अलग निर्णय हैं। मान्यता प्रमाणपत्र मिलने से आयकर लाभ स्वतः सक्रिय नहीं होता; योग्य प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या LLP को कर-छूट के लिए अलग आवेदन और प्रमाणन की आवश्यकता होती है।
पात्रता का निर्णय किस क्रम में करें

प्रपत्र खोलने से पहले नीचे दिए प्रश्नों का क्रम से उत्तर दें। किसी अनिवार्य शर्त का उत्तर “नहीं” होने पर केवल विवरण की भाषा सुधारना पर्याप्त नहीं होगा; पहले संस्था की वास्तविक कानूनी या कारोबारी स्थिति देखनी होगी।
- क्या संस्था भारत में अनुमत स्वरूप में पंजीकृत है? प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, धारा 59 के तहत पंजीकृत साझेदारी फर्म, LLP तथा केंद्र, राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के लागू कानून के तहत पंजीकृत सहकारी समिति पात्र स्वरूपों में शामिल हैं। एकल स्वामित्व पात्र स्वरूप नहीं है।
- क्या संस्था आयु सीमा के भीतर है? सामान्य संस्था के लिए निगमन या पंजीकरण से दस वर्ष की अवधि लागू है। DPIIT द्वारा डीप टेक स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त संस्था के लिए यह अवधि बीस वर्ष तक हो सकती है।
- क्या कारोबार सीमा नहीं टूटी? निगमन या पंजीकरण के बाद किसी भी वित्त वर्ष में सामान्य संस्था का कारोबार INR 200 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए। मान्यता प्राप्त डीप टेक स्टार्टअप के लिए सीमा INR 300 करोड़ है।
- क्या व्यवसाय पात्र गतिविधि दिखाता है? संस्था उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा के नवाचार, विकास या सुधार पर काम कर रही हो अथवा उसमें रोजगार या धन सृजन की उच्च संभावना वाला विस्तार-योग्य व्यवसाय मॉडल हो।
- क्या संस्था पुराने व्यवसाय के विभाजन या पुनर्गठन से नहीं बनी? पुरानी गतिविधि को नई इकाई में स्थानांतरित कर देना अपने-आप नया स्टार्टअप सिद्ध नहीं करता।
4 फरवरी 2026 की DPIIT राजपत्र अधिसूचना इन पात्र स्वरूपों, दस वर्ष और INR 200 करोड़ की सामान्य सीमाओं तथा मान्यता प्राप्त डीप टेक स्टार्टअप के लिए बीस वर्ष और INR 300 करोड़ की विशेष सीमाओं को निर्धारित करती है। अधिसूचना के अनुसार डीप टेक स्थिति का आधार वैज्ञानिक या अभियांत्रिकी ज्ञान पर आधारित समाधान, अपेक्षाकृत अधिक अनुसंधान व्यय, महत्वपूर्ण नवीन बौद्धिक संपदा और लंबी तथा अनिश्चित विकास अवधि जैसी विशेषताएँ हैं; केवल तकनीकी क्षेत्र में काम करना पर्याप्त दावा नहीं है।
स्वामित्व और समूह-संरचना की अलग जाँच क्यों जरूरी है
मूल पात्रता पूरी होने पर भी संस्था की उत्पत्ति, प्रवर्तक हिस्सेदारी और संबंधित इकाइयाँ मान्यता को प्रभावित कर सकती हैं। आवेदन से पहले संगठन-चित्र बनाकर होल्डिंग कंपनी, सहायक कंपनी, संयुक्त उद्यम, विदेशी निगमन, विलय तथा समान गतिविधि वाली दूसरी इकाइयों को पहचानें।
DPIIT के मौजूदा मान्यता दिशानिर्देश विलय, अलगाव, अधिग्रहण, समामेलन या अवशोषण से बनी परिणामी संस्थाओं को सामान्यतः बाहर रखते हैं, हालांकि Companies Act की धारा 233 के तहत दो या अधिक स्टार्टअप कंपनियों अथवा स्टार्टअप और छोटी कंपनी के कुछ विलयों के लिए सीमित अपवाद है। इन्हीं दिशानिर्देशों में होल्डिंग या सहायक कंपनी, संयुक्त उद्यम से बनी संस्था और भारत से बाहर निगमित इकाई को अपात्र बताया गया है तथा भारतीय प्रवर्तकों की कम-से-कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी की शर्त रखी गई है।
- मान्यता मिलने के बाद किसी कंपनी की होल्डिंग या सहायक कंपनी बनने अथवा संयुक्त उद्यम में प्रवेश करने पर मान्यता समाप्त की जा सकती है।
- समान पता, समान उत्पादन शृंखला या सेवाएँ और कम-से-कम एक साझा निदेशक, नामित साझेदार या साझेदार वाली अतिरिक्त संस्था को अलग स्टार्टअप के रूप में मान्यता नहीं दी जाती।
- केवल साझा निदेशक या साझेदार होना स्वतः निषेध नहीं है, लेकिन संबंधित-पक्ष लेनदेन स्वतंत्र बाजार शर्तों पर होने चाहिए।
- कानून द्वारा स्पष्ट रूप से निषिद्ध क्षेत्र में काम करने वाली संस्था पात्र नहीं है। वैध लेकिन विनियमित गतिविधि के लिए क्षेत्रीय लाइसेंस अलग विषय है।
एक स्वरूप से दूसरे अनुमत स्वरूप में परिवर्तन अपने-आप रोक नहीं है। फिर भी लाभ की अवधि मूल निगमन, पंजीकरण या पुराने व्यवसाय के आरंभ से जुड़ सकती है, इसलिए पुरानी गतिविधि की तारीख छिपाना सही उपाय नहीं है।
एकल स्वामित्व को आवेदन से पहले क्या करना होगा
एकल स्वामित्व सीधे DPIIT मान्यता के लिए आवेदन नहीं कर सकता। उसे पहले प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पंजीकृत साझेदारी, LLP या किसी अन्य अनुमत स्वरूप में बदलना होगा और फिर उसी नई पंजीकृत संस्था से आवेदन करना होगा।
रूपांतरण के बाद नया प्रमाणपत्र मिलने का अर्थ यह नहीं कि व्यवसाय की आयु शून्य से शुरू हो गई। प्रपत्र में मूल कारोबार शुरू होने की तारीख, परिवर्तन का क्रम और नए पंजीकरण विवरण को सुसंगत रखें; दिशानिर्देश एकल स्वामित्व से बदली संस्था की मान्यता को मूल व्यवसाय आरंभ होने की तारीख से जोड़ते हैं।
आवेदन से पहले जाँचें कि कानूनी नाम, CIN या LLPIN, PAN, पंजीकृत पता और प्रवर्तक विवरण नवीनतम अभिलेखों से मेल खाते हैं। यदि पुराना ब्रांड नाम अब भी वेबसाइट, अनुबंध या चालान में है, तो आवेदन में दोनों संस्थाओं का संबंध स्पष्ट करना उपयोगी होगा।
NSWS प्रपत्र के लिए कौन-सी सामग्री तैयार रखें
मूल दस्तावेजों में निगमन या पंजीकरण प्रमाणपत्र और व्यवसाय की प्रकृति का विवरण आवश्यक हैं। व्यावहारिक रूप से प्रपत्र पूरा करने के लिए संस्था तथा अधिकृत आवेदक की पहचान, प्रवर्तकों या साझेदारों की जानकारी और नवाचार के दावे से सीधे जुड़े प्रमाण भी पहले व्यवस्थित रखने चाहिए।
- संस्था का कानूनी नाम, निगमन या पंजीकरण संख्या, तारीख और पंजीकृत कार्यालय;
- PAN तथा संस्था के नियंत्रण वाला ईमेल और मोबाइल नंबर;
- निदेशकों, नामित साझेदारों या साझेदारों और वर्तमान हिस्सेदारी की जानकारी;
- समस्या, लक्षित उपयोगकर्ता, मौजूदा विकल्प और संस्था द्वारा किए गए वास्तविक सुधार का संक्षिप्त विवरण;
- उत्पाद प्रदर्शन, प्रक्रिया-प्रवाह, बौद्धिक संपदा अभिलेख, उपयोगकर्ता या राजस्व प्रगति और रोजगार संबंधी प्रासंगिक प्रमाण;
- रूपांतरण, नाम परिवर्तन, CIN या LLPIN परिवर्तन और मूल व्यवसाय आरंभ होने का क्रम;
- संबंधित संस्थाओं, साझा प्रबंधन, समान पते और संबंधित-पक्ष लेनदेन का स्पष्टीकरण।
हर उपलब्ध प्रमाण अपलोड करना जरूरी नहीं है। दस्तावेज तभी उपयोगी है जब वह प्रपत्र के किसी दावे को सत्यापित करे; उदाहरण के लिए पुरस्कार नवाचार का सहायक संकेत हो सकता है, लेकिन वह उत्पाद की कार्यप्रणाली या मौजूदा विकल्प से अंतर नहीं समझाता।
NSWS पर आवेदन कैसे जमा करें

Startup India की आधिकारिक मान्यता और कर-छूट सूचना के अनुसार आवेदक को NSWS पर खाता बनाकर डैशबोर्ड में “Add Approvals” और “Central Approvals” खोलना, “Registration as a Startup” जोड़ना और प्रपत्र जमा करना है; इसी सूचना में सरकारी शुल्क न होने और मान्यता के बाद 80-IAC के अलग आवेदन की भी पुष्टि की गई है। किसी निजी सलाहकार की फीस को सरकारी आवेदन शुल्क न मानें।
- NSWS खाता बनाएँ: संस्था के संस्थापक या अधिकृत अधिकारी के नियंत्रण वाला ईमेल और मोबाइल नंबर प्रयोग करें। निजी मध्यस्थ को खाते का स्थायी नियंत्रण न दें।
- प्रोफाइल को मूल अभिलेख से मिलाएँ: कानूनी नाम, संस्था-प्रकार, CIN या LLPIN, PAN, निगमन तारीख और पता दर्ज करते समय पंजीकरण प्रमाणपत्र सामने रखें।
- अनुमोदन जोड़ें: डैशबोर्ड में “Add Approvals” खोलें, “Central Approvals” चुनें और “Registration as a Startup” को अपने डैशबोर्ड में जोड़ें।
- संस्था और प्रबंधन विवरण भरें: अधिकृत प्रतिनिधि, निदेशक या साझेदार, प्रवर्तक हिस्सेदारी, क्षेत्र और गतिविधि की जानकारी अद्यतन अभिलेख के अनुसार दें।
- पात्रता का आधार समझाएँ: उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा का वास्तविक सुधार अथवा रोजगार या धन सृजन की संभावना वाला विस्तार-योग्य मॉडल स्पष्ट करें।
- दस्तावेज जोड़ें: प्रत्येक फ़ाइल पठनीय हो और प्रपत्र में दिए नाम, तारीख तथा दावे से मेल खाए। फ़ाइल के प्रकार, आकार और अनिवार्य चिह्नों के लिए स्क्रीन पर दिख रहे निर्देश को अंतिम मानें।
- पूर्वावलोकन और घोषणा जाँचें: कारोबार, हिस्सेदारी, संबंधित संस्थाओं और पुराने व्यवसाय के इतिहास से जुड़े उत्तर दोबारा पढ़ें। असत्य या अधूरी घोषणा केवल अस्वीकृति ही नहीं, बाद में मान्यता समाप्त होने का जोखिम भी बना सकती है।
- जमा करने का अभिलेख रखें: आवेदन पहचान संख्या सुरक्षित करें और NSWS डैशबोर्ड तथा पंजीकृत ईमेल पर स्पष्टीकरण या स्थिति-सूचना देखते रहें।
स्क्रीन क्रम, क्षेत्र या वर्ण-सीमा बदल सकती है। इसलिए पुराने स्क्रीनशॉट की हूबहू नकल करने के बजाय वर्तमान प्रपत्र के अनिवार्य क्षेत्रों और निर्देशों का पालन करें।
मान्यता और 80-IAC कर-छूट में क्या अंतर है
मान्यता सरकारी स्टार्टअप परिभाषा के तहत संस्था की स्थिति तय करती है; 80-IAC योग्य व्यवसाय से आय पर कटौती के लिए अलग कर-प्रमाणन है। दोनों की पात्र संस्था, आवेदन और परिणाम समान नहीं हैं।
- DPIIT मान्यता: पात्र प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पंजीकृत साझेदारी फर्म, LLP या पंजीकृत सहकारी समिति आवेदन कर सकती है। निर्णय संस्था की परिभाषा, संरचना और व्यवसाय-विवरण पर आधारित होता है।
- 80-IAC प्रमाणन: केवल DPIIT-मान्यता प्राप्त प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या LLP आवेदन कर सकती है। मान्यता इस आवेदन की पूर्वशर्त है, मंजूरी नहीं।
- निर्णय प्रक्रिया: मान्यता के लिए DPIIT दस्तावेजों और सूचना की जाँच कर सकता है। 80-IAC प्रमाणपत्र के आवेदन पर अंतर-मंत्रालयी प्रमाणन बोर्ड विचार करता है।
- दस्तावेज: कर आवेदन में संस्था, PAN और गतिविधि के विवरण के साथ लागू होने पर पिछले तीन वित्त वर्षों के लेखापरीक्षित खाते तथा नवाचार, संपत्ति सृजन और रोजगार सृजन के प्रमाण माँगे जाते हैं।
- दावा: आयकर रिटर्न में लाभ का दावा केवल DPIIT मान्यता प्रमाणपत्र के आधार पर न करें। अलग प्रमाणन और उस वित्त वर्ष पर लागू आयकर शर्तें पूरी होना आवश्यक है।
इसलिए पंजीकृत साझेदारी या सहकारी समिति DPIIT मान्यता प्राप्त कर सकती है, लेकिन उसी कानूनी स्वरूप में 80-IAC प्रमाणन की पात्र नहीं होती। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या LLP के लिए भी सही स्वरूप केवल पहला चरण है; कर-पात्रता का अलग परीक्षण बाकी रहता है।
व्यवसाय-विवरण को जाँचने योग्य कैसे बनाएँ
अच्छा विवरण चार प्रश्नों का सीधा उत्तर देता है: ग्राहक की समस्या क्या है, मौजूदा तरीका कहाँ कम पड़ता है, संस्था ने क्या नया या बेहतर बनाया है और इसे बड़े स्तर पर कैसे अपनाया जा सकता है। “नवाचारी मंच” या “उन्नत तकनीक” जैसे विशेषण बिना कार्यात्मक अंतर के उपयोगी प्रमाण नहीं हैं।
विवरण का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है: लक्षित उपयोगकर्ता और उसका मौजूदा कार्यप्रवाह; उससे उत्पन्न स्पष्ट कठिनाई; संस्था के उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा द्वारा किया गया विशिष्ट सुधार; उपलब्ध सत्यापन; और विस्तार का व्यावहारिक तरीका। बाजार के आकार या संस्थापकों के अनुभव को नवाचार का विकल्प न बनाएँ।
एक सशर्त उदाहरण में, केवल यह लिखना कि सेवा AI पर आधारित है, पर्याप्त नहीं होगा। आवेदन को बताना चाहिए कि तकनीक कौन-सा निर्णय या कार्यप्रवाह सुधारती है, पुराने विकल्प से कार्यात्मक अंतर क्या है और इस अंतर का कौन-सा प्रदर्शन, उपयोगकर्ता संकेत या तकनीकी प्रमाण उपलब्ध है।
जमा करने से पहले अंतिम जाँच-सूची
- एकल स्वामित्व के नाम से आवेदन नहीं किया गया है और रूपांतरण का पूरा इतिहास बताया गया है;
- संस्था दस वर्ष तथा लागू कारोबार सीमा के भीतर है, या डीप टेक की विशेष सीमा का दावा उचित मान्यता और प्रमाण पर आधारित है;
- पुराने व्यवसाय के विभाजन या पुनर्गठन को नई गतिविधि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है;
- होल्डिंग, सहायक कंपनी, संयुक्त उद्यम, विदेशी निगमन और भारतीय प्रवर्तक हिस्सेदारी की जाँच की गई है;
- समान पते या गतिविधि वाली संबंधित संस्था और साझा निदेशक या साझेदार छिपाए नहीं गए हैं;
- प्रपत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र, PAN और हिस्सेदारी अभिलेख में नाम, तारीख और संख्या समान हैं;
- नवाचार का विवरण प्रचारात्मक दावे के बजाय उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा का वास्तविक अंतर बताता है;
- NSWS खाता और पंजीकृत संपर्क संस्था के नियंत्रण में हैं;
- DPIIT प्रमाणपत्र को 80-IAC प्रमाणन मानकर कर लाभ का दावा नहीं किया गया है।
यदि जाँच में केवल प्रस्तुति की कमी मिले, तो उत्तर और प्रमाण को स्पष्ट करें। यदि समस्या स्वामित्व, पुनर्गठन, संबंधित संस्था या कानूनी स्वरूप में है, तो आवेदन जमा करने से पहले कंपनी सचिव, चार्टर्ड अकाउंटेंट या संबंधित विधिक सलाहकार से उसके प्रभाव का मूल्यांकन कराएँ।
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