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Creator economy India: ‘Gems of India’ चैलेंज से जमीनी क्रिएटर्स को मंच

|अपडेट किया गया: |लेखक: व्याचेस्लाव वासिपेनोक|6 मिनट पढ़ने का समय| 378
Creator economy India: ‘Gems of India’ चैलेंज से जमीनी क्रिएटर्स को मंच

Creator economy India में ताजा बड़ा घटनाक्रम 21 जुलाई 2026 को सामने आया, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने MyWAVES पर ‘Gems of India’ चैलेंज का पायलट चरण शुरू किया। मंत्रालय की आधिकारिक मीडिया सूचना में लॉन्च की तारीख दर्ज है, जबकि मंत्रालय की विस्तृत घोषणा के अनुसार इसका लक्ष्य जमीनी स्तर के डिजिटल क्रिएटर्स को पहचानना, विकसित करना और देश के जिलों की स्थानीय कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना है।

पायलट चरण में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, गोवा और लद्दाख शामिल हैं। प्रविष्टियां 1 से 31 अगस्त 2026 तक MyWAVES के जरिए जमा की जा सकेंगी। Adgully की 21 जुलाई की रिपोर्ट और AffairsCloud के 23 जुलाई के विवरण में भी यही कार्यक्रम, भागीदारी की अवधि और YouTube तथा Meta की साझेदारी की पुष्टि की गई है।

चैलेंज में क्या जमा करना होगा

जिले की विरासत पर 1 से 3 मिनट का वीडियो MyWAVES पर जमा करता स्थानीय क्रिएटर

‘Gems of India’ का केंद्रीय विचार जिले की विशिष्ट पहचान को छोटे डिजिटल वीडियो में प्रस्तुत करना है। प्रतिभागियों को अपने जिले की संस्कृति, विरासत, पर्यटन, परंपराओं, इतिहास या उल्लेखनीय उपलब्धियों पर 1 से 3 मिनट का मौलिक वीडियो बनाकर MyWAVES पर अपलोड करना होगा। इसका अर्थ यह है कि यह केवल सामान्य मनोरंजन प्रतियोगिता नहीं है; चयन का विषय स्थानीय कहानी और उसके डिजिटल प्रस्तुतीकरण से सीधे जुड़ा है।

मंत्रालय के अनुसार प्रविष्टियों को जिला, राज्य और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाएगा। पायलट चरण का संचालन MyWAVES, Prasar Bharati, My Bharat तथा संबंधित राज्य और जिला प्रशासन के सहयोग से होगा। स्थानीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों को भी क्रिएटर जुटाने और सामग्री तैयार करने में शामिल किया जाएगा।

इस पहल में YouTube और Meta की भूमिका मुख्य रूप से उनके क्रिएटर समुदायों के जरिए पहुंच बढ़ाने की बताई गई है। उपलब्ध आधिकारिक विवरण में इन कंपनियों को पारिस्थितिकी तंत्र साझेदार कहा गया है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वे हर प्रविष्टि का चयन करेंगी या पुरस्कार तय करेंगी। मूल्यांकन के लिए जिला और राज्य स्तर की जूरी गठित की जानी है, जिसमें संस्कृति, विरासत, पर्यटन, मीडिया और अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

पुरस्कार और पायलट चरण की सीमा

घोषित पुरस्कार ढांचा तीन स्तरों पर है। प्रत्येक जिले में अधिकतम 20 जिला पुरस्कार दिए जा सकते हैं और प्रत्येक पुरस्कार की राशि ₹50,000 है। राज्य स्तर पर प्रत्येक जिले से चुने गए एक उत्कृष्ट क्रिएटर को ₹2 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के लिए ₹5 लाख की राशि बताई गई है, लेकिन आधिकारिक घोषणा इसे बाद के राष्ट्रीय विस्तार से जोड़ती है।

इसलिए 1 अगस्त से शुरू होने वाला चरण पूरे भारत की खुली प्रतियोगिता नहीं है। फिलहाल इसमें केवल सात क्षेत्र शामिल हैं और इसका उद्देश्य पहले एक पायलट के रूप में प्रक्रिया, भागीदारी और जूरी व्यवस्था को परखना है। मंत्रालय ने कहा है कि पायलट से मिले अनुभव के आधार पर कार्यक्रम को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा। विस्तार की अंतिम तारीख, राष्ट्रीय चरण की विस्तृत नियमावली और पात्रता की पूरी सूची अभी उपलब्ध घोषणा में स्पष्ट नहीं की गई है।

भारत की creator economy में इसका महत्व

गैर-महानगरीय जिलों और क्षेत्रीय भाषाओं के क्रिएटर नेटवर्क को दर्शाता पायलट विस्तार

इस कार्यक्रम का महत्व केवल सरकारी पुरस्कारों तक सीमित नहीं है। 14 जुलाई 2026 को Indian School of Business और Hashfame द्वारा जारी अध्ययन के अनुसार भारत में क्रिएटर्स की संख्या 2020 के लगभग 9.6 लाख से बढ़कर 2025 में 41.2 लाख हो गई। अध्ययन में कहा गया है कि 66 प्रतिशत क्रिएटर्स अब गैर-महानगरीय बाजारों से आते हैं और इन्हीं बाजारों में क्रिएटर आधार की वृद्धि महानगरों की तुलना में तेज रही है।

ISB की रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2020 से 2025 के बीच वार्षिक क्रिएटर अभियानों की संख्या लगभग 14,000 से बढ़कर 42,000 हुई, लेकिन अधिकांश क्रिएटर्स को अब भी साल में केवल एक भुगतान वाला अभियान मिलता है। इसका संकेत यह है कि भागीदारी बढ़ने के बावजूद स्थायी आर्थिक अवसर समान रूप से विकसित नहीं हुए हैं। ‘Gems of India’ इसी असंतुलन को सीधे हल करता है, ऐसा अभी कहना जल्दबाजी होगी; हालांकि यह छोटे शहरों और जिलों के क्रिएटर्स को औपचारिक पहचान और एक केंद्रीकृत प्रस्तुति मंच जरूर देता है।

भाषा भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ISB-Hashfame अध्ययन में हिंदी क्रिएटर्स की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत बताई गई है, जबकि तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मराठी, बंगाली, मलयालम, गुजराती और भोजपुरी जैसे भाषाई समुदाय मिलकर क्रिएटर आधार का बड़ा भाग बनाते हैं। जिले-केंद्रित प्रतियोगिता स्थानीय भाषा और स्थानीय संदर्भों को स्वाभाविक रूप से जगह दे सकती है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब जूरी मूल्यांकन में भाषाई और क्षेत्रीय विविधता को पर्याप्त महत्व मिले।

मंच के सामने व्यावहारिक चुनौती

‘Gems of India’ की सफलता का पहला परीक्षण भागीदारी की संख्या नहीं, बल्कि सामग्री की गुणवत्ता और प्रतिनिधित्व होगा। किसी जिले को केवल पर्यटन स्थल या लोकप्रिय त्योहार तक सीमित कर देने से कार्यक्रम का उद्देश्य संकुचित हो सकता है। इसके विपरीत, स्थानीय शिल्प, मौखिक इतिहास, भोजन, पर्यावरण, सामुदायिक पहल या कम चर्चित उपलब्धियों पर आधारित वीडियो उस विविधता को बेहतर दिखा सकते हैं जिसे मंत्रालय सामने लाना चाहता है। यह संपादकीय आकलन है, आधिकारिक चयन मानदंड नहीं।

दूसरी चुनौती MyWAVES के उपयोग और सामग्री अधिकारों से जुड़ी है। उपलब्ध घोषणाओं में वीडियो की अवधि, जमा करने की समय-सीमा, शामिल क्षेत्र और जूरी संरचना दी गई है, लेकिन कॉपीराइट, पुनःप्रयोग, संगीत के लाइसेंस, भाषा, आयु-सीमा, तकनीकी प्रारूप और अपील प्रक्रिया की पूरी जानकारी इन प्रकाशित विवरणों में नहीं मिलती। प्रतिभागियों को अंतिम नियमावली जारी होने तक इन बिंदुओं पर अनुमान लगाकर सामग्री प्रकाशित नहीं करनी चाहिए।

सामग्री उत्पादन की क्षमता भी क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। Sandisk के अध्ययन पर आधारित ETBrandEquity की जुलाई रिपोर्ट में कहा गया कि 75 प्रतिशत भारतीय क्रिएटर्स साप्ताहिक रूप से सामग्री प्रकाशित करते हैं, लेकिन 60 प्रतिशत उभरते क्रिएटर्स को नियमित रूप से भंडारण या कार्यप्रवाह संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए केवल प्रतियोगिता की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी; स्थानीय संस्थानों और प्रशासन को तकनीकी मार्गदर्शन तथा जमा करने की स्पष्ट सहायता भी देनी पड़ सकती है।

26 जुलाई तक क्या स्पष्ट है और आगे क्या देखना होगा

26 जुलाई 2026 तक पुष्टि की गई स्थिति यह है कि पायलट लॉन्च हो चुका है, प्रविष्टियां अगस्त में खुलेंगी, सात क्षेत्र इसमें शामिल हैं, वीडियो की अवधि 1 से 3 मिनट है और जिला तथा राज्य स्तर पर नकद पुरस्कार रखे गए हैं। YouTube और Meta प्रचार तथा क्रिएटर समुदायों को जोड़ने वाले साझेदार हैं, जबकि मूल्यांकन के लिए प्रशासनिक जूरी व्यवस्था प्रस्तावित है।

अभी प्रतीक्षित जानकारी में विस्तृत पात्रता, तकनीकी अपलोड नियम, सामग्री अधिकार, जूरी के नाम, परिणाम की तारीख और राष्ट्रीय विस्तार का कार्यक्रम शामिल है। जब तक ये विवरण प्रकाशित नहीं होते, ‘Gems of India’ को भारत की पूरी creator economy के लिए तत्काल आय-स्रोत मानना सही नहीं होगा। फिलहाल यह एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण संस्थागत प्रयोग है, जो यह परखेगा कि स्थानीय डिजिटल कहानीकारों को राष्ट्रीय क्रिएटर ढांचे में किस तरह शामिल किया जा सकता है।

संदर्भ के लिए, भारत में YouTube से जुड़े हालिया क्रिएटर बदलावों के आंकड़ों पर भारत के YouTube चैनल आंकड़े भी उपयोगी संदर्भ देते हैं, लेकिन ‘Gems of India’ की पात्रता और पुरस्कार संबंधी अंतिम जानकारी के लिए मंत्रालय की अगली आधिकारिक सूचना ही निर्णायक होगी।

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