
SISFS या CGSS—पहला बंद, दूसरे में बैंक की मंजूरी जरूरी

SISFS में नया आवेदन करने की खिड़की बंद है। Startup India की योजना पुस्तिका के अनुसार स्टार्टअप के लिए अंतिम तारीख 31 मई 2026 थी, हालांकि पहले स्वीकृत मामलों में भुगतान जारी है। इसलिए पात्रता की पुरानी सूची पूरी करने से अब इस योजना में नया आवेदन जमा करने का रास्ता नहीं खुलता।
CGSS में रास्ता ऋण का है, अनुदान का नहीं। Startup India का CGSS विवरण बताता है कि संस्थापक जन समर्थ पोर्टल या सदस्य संस्था से संपर्क कर सकता है; बैंक, पात्र गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या निवेश संस्था परियोजना का मूल्यांकन करके ऋण मंजूर करती है और फिर गारंटी आवरण माँगती है। DPIIT की मान्यता जरूरी पात्रता है, लेकिन उससे ऋण की मंजूरी अपने आप नहीं मिलती।
बीज सहायता में क्या मिलता था और क्या लौटाना पड़ता था

SISFS शुरुआती उत्पाद या विचार को आगे बढ़ाने के लिए थी। SISFS के आधिकारिक दिशानिर्देश अवधारणा की जाँच, नमूना उत्पाद और उत्पाद परीक्षण के लिए अधिकतम ₹20 लाख का अनुदान तथा बाजार में प्रवेश या विस्तार के लिए अधिकतम ₹50 लाख की परिवर्तनीय डिबेंचर, ऋण या ऋण से जुड़ी सहायता तय करते हैं। अनुदान तय पड़ाव पूरे होने पर किस्तों में दिया जाता था। ऋण वाले हिस्से पर चुकौती की शर्तें लागू होती थीं और परिवर्तनीय डिबेंचर का निपटारा उसके समझौते के अनुसार होता था।
इस फर्क से शुरुआती संस्थापक के लिए रकम का अर्थ बदल जाता है। परीक्षण के लिए मिला अनुदान सामान्य ऋण की किस्त नहीं बनता था, जबकि बाजार में प्रवेश के लिए दी गई पूरी राशि को मुफ्त पैसा समझना गलत होता। सहायता चयनित इनक्यूबेटर के माध्यम से पहुँचती थी; वही प्रस्ताव, टीम, उत्पाद की व्यवहार्यता और खर्च की योजना देखकर चयन करता था। पुराने दिशानिर्देशों में आवेदन की प्रक्रिया दर्ज रहना खुली आवेदन खिड़की का प्रमाण नहीं है।
CGSS में निर्णय किसके हाथ में है
CGSS ऋणदाता के जोखिम का एक हिस्सा सँभालती है, इसलिए ऋण देने का निर्णय सदस्य संस्था के पास रहता है। स्टार्टअप अपनी पूँजी की जरूरत और उसे लौटाने की क्षमता उस संस्था के सामने रखता है। सदस्य बैंक के अलावा पात्र गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी और वैकल्पिक निवेश कोष भी इस व्यवस्था में शामिल हो सकते हैं। संस्थापक किस सदस्य संस्था से ऋण चाहता है, उसी के अनुसार आवेदन और मूल्यांकन का रास्ता बदल सकता है।
ऋणदाता कारोबार और प्रस्तावित उपयोग की व्यवहार्यता देखता है तथा योजना की पात्रता जाँचता है। पहले से चूक करने वाले या गैर-निष्पादित परिसंपत्ति के रूप में दर्ज स्टार्टअप गारंटी की पात्रता पूरी नहीं करते। ऋण मंजूर होने के बाद सदस्य संस्था NCGTC के पास आवरण के लिए जाती है। जन समर्थ पर आवेदन दर्ज होना, ऋण मंजूर होना और ऋणदाता को गारंटी मिलना अलग चरण हैं; शुरुआती संस्थापक को अपनी नकदी की जरूरत के साथ संभावित किस्तों का बोझ भी देखना होगा।
गारंटी का प्रतिशत किसे बचाता है

CGSS की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार लेनदेन आधारित आवरण में ₹10 करोड़ तक के ऋण पर चूक राशि का 85% और उससे बड़े ऋण पर 75% गारंटी है; प्रति उधारकर्ता आवरण की अधिकतम सीमा ₹20 करोड़ है। प्रतिशत ऋण की पूरी रकम पर संस्थापक को मिलने वाली छूट नहीं है। इसका उपयोग तब होता है जब पात्र ऋण में चूक के बाद ऋणदाता योजना की शर्तों के अनुसार दावा करता है।
गारंटी मिलने पर भी उधारकर्ता की देनदारी बनी रहती है। सदस्य संस्था बकाया रकम की वसूली करती है, इसलिए गारंटी को कर्ज माफी मानकर चुकौती योजना बनाना जोखिम भरा होगा। जिस ऋण सुविधा को CGSS में शामिल किया गया है, उस पर दूसरी गारंटी योजना का आवरण नहीं जोड़ा जा सकता। इससे दो योजनाओं के प्रतिशत जोड़कर एक ही ऋण के लिए बड़ी सुरक्षा मानने की गुंजाइश भी खत्म होती है।
दोनों योजनाओं की रकम की तुलना कैसे करें
31 जनवरी 2026 तक के राज्यसभा में दिए सरकारी जवाब के अनुसार SISFS के तहत इनक्यूबेटरों ने 3,311 स्टार्टअप के लिए ₹592.12 करोड़ की सहायता मंजूर की थी, जबकि CGSS में 348 ऋणों की लगभग ₹925.90 करोड़ राशि पर गारंटी दी गई थी। उसी जवाब में सूक्ष्म और लघु उद्यमों के ऋण के लिए अलग CGTMSE व्यवस्था भी दर्ज है। ये आँकड़े दोनों कार्यक्रमों की पहुँच दिखाते हैं, किसी नए आवेदक की स्वीकृति की संभावना नहीं।
यहाँ मापी गई रकम भी अलग है। SISFS का आँकड़ा स्टार्टअप के लिए मंजूर बीज सहायता का है; CGSS का आँकड़ा उन ऋणों की राशि का है जिन पर गारंटी दी गई। इसलिए CGSS की बड़ी राशि को उतना सरकारी अनुदान मानना गलत तुलना होगी। इसी तरह स्वीकृत ऋणों की संख्या से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि आज किसी खास बैंक में आवेदन देने पर मंजूरी कितनी आसान होगी। उसका निर्णय प्रस्ताव और ऋणदाता की जाँच पर निर्भर करेगा।
बंद खिड़की के बाद कौन-सा रास्ता प्रासंगिक है
जिस संस्थापक को अवधारणा साबित करने या नमूना उत्पाद बनाने के लिए बिना ऋण वाली सहायता चाहिए, उसके लिए CGSS सीधा विकल्प नहीं है। राज्य की स्टार्टअप योजनाएँ, इनक्यूबेटर की सहायता और NIDHI PRAYAS जैसे प्रोटोटाइप कार्यक्रम अलग जरूरत पूरी कर सकते हैं। उनकी पात्रता और आवेदन अवधि अलग होती है; किसी योजना का सरकारी सूची में नाम होना आवेदन खुले होने का संकेत नहीं देता। इस चरण में उपलब्ध सहायता का स्वरूप देखना, केवल अधिकतम राशि देखना, अधिक उपयोगी है।
जिस कारोबार को ऋण लेकर बाजार में प्रवेश या संचालन बढ़ाना है, वह अपनी DPIIT मान्यता, पूँजी के उपयोग और चुकौती की क्षमता के आधार पर CGSS से जुड़े सदस्य ऋणदाता से बात कर सकता है। सूक्ष्म या लघु उद्यम के रूप में पात्र संस्था ऋणदाता से CGTMSE के बारे में भी पूछ सकती है। यह अलग गारंटी मार्ग है; एक ही ऋण सुविधा पर दोनों योजनाओं का आवरण मानकर वित्त योजना नहीं बनानी चाहिए। चुनाव की धुरी सहायता का चरण, रकम की वापसी और मंजूरी देने वाली संस्था है।
यह भी पढ़ें:
संबंधित लेख


Kotak BizLabs Season 3 खुला—₹30 लाख पाने को शुरुआती कमाई जरूरी

Udyam या Startup India: एक आकार देखता है, दूसरा नवाचार

सरकार से स्टार्टअप फंडिंग: Startup Grants India पर 2,390+ योजनाएं

IndiaAI Startup Financing अनुदान का खुला फॉर्म नहीं—पहले उपलब्ध राह पहचानें

DPIIT पहचान के लिए आवेदन करें—पिच में नवाचार साबित करना जरूरी
हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें
Web3, AI और क्रिप्टो की नवीनतम खबरें सीधे अपने इनबॉक्स में पाएँ।