PLA प्लास्टिक का ‘व्यावसायिक’ आरंभ—100 टन की इकाई अभी पायलट है

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय| 4
PLA प्लास्टिक का ‘व्यावसायिक’ आरंभ—100 टन की इकाई अभी पायलट है

24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने PLA आधारित जैव-आधारित प्लास्टिक के व्यावसायिक उपयोग का औपचारिक शुभारंभ किया; मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, BIRAC की ₹75 करोड़ सहायता उत्तर प्रदेश के कुंभी में 100 टन सालाना क्षमता वाली PLA और सह-पॉलिमर अनुसंधान इकाई के लिए है, जिसे Balrampur Chini Mills Limited अपने एकीकृत परिसर में स्थापित करेगी। व्यावसायिक उपयोग का शुभारंभ हो चुका है, जबकि अनुसंधान इकाई अभी प्रस्तावित पायलट है।

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उसी कुंभी परिसर में 80,000 टन सालाना नियोजित क्षमता वाला अलग व्यावसायिक PLA संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। रिपोर्ट अनुसंधान सुविधा को प्रस्तावित बताती है। इसलिए औपचारिक शुभारंभ से बड़े संयंत्र का संचालन या नियमित औद्योगिक आपूर्ति शुरू होने का निष्कर्ष नहीं निकलता।

अनुदान से कुंभी में क्या बनेगा

सरकारी सहायता का उद्देश्य नई सामग्री और उसे बनाने की प्रक्रिया को पायलट पैमाने पर विकसित करना है। सुविधा में विशेष उपयोगों के लिए PLA के अलग रूप और उन्नत सह-पॉलिमर तैयार किए जाने हैं। PLA का सामान्य नाम होने से हर रूप के गुण एक जैसे नहीं हो जाते: जिस वस्तु में सामग्री लगेगी, उसके अनुसार उसके प्रदर्शन और निर्माण विधि का चुनाव करना होगा। अनुसंधान इकाई इसी विकास कार्य के लिए प्रस्तावित है, किसी एक तैयार उत्पाद की नियमित आपूर्ति के लिए नहीं।

पायलट का दूसरा काम तकनीकी और आर्थिक आँकड़े तैयार करना है। उसमें सामग्री का प्रदर्शन, निर्माण प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव और लागत से जुड़ी जानकारी जुटेगी, ताकि प्रयोगशाला में बनी विधि को बड़े संयंत्र के लिए ढाला जा सके। घोषित सालाना क्षमता परीक्षण व्यवस्था का आकार बताती है; उससे बिकने वाली सामग्री की मात्रा तय नहीं होती। वास्तविक उत्पादन का आकलन सुविधा का कामकाज शुरू होने और प्रक्रिया स्थिर होने के बाद ही किया जा सकेगा।

ग्राहक सत्यापन का पड़ाव

किसी नए PLA रूप को व्यावसायिक उपयोग तक ले जाने में ग्राहक सत्यापन अहम है। पायलट में बने नमूनों से यह जाँचा जाना है कि सामग्री अपने लक्षित उपयोग की अपेक्षाओं पर खरी उतरती है या नहीं। उसके बाद आवश्यकता के अनुसार सामग्री के गुण या बनाने की प्रक्रिया बदली जा सकती है। यह चरण सह-पॉलिमर के लिए मायने रखता है, क्योंकि उन्हें विशेष उपयोगों की जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाना है।

योजना में उत्पाद विकास और ग्राहक सत्यापन को उत्पादन विस्तार की तैयारी से जोड़ा गया है। ग्राहक की प्रतिक्रिया से यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सा रूप आगे बढ़े, किसमें सुधार चाहिए और कौन-सी विधि व्यावहारिक लागत पर काम कर सकती है। अभी सत्यापन के परिणाम, ग्राहकों के नाम या नियमित खरीद की मात्रा घोषित नहीं की गई है। ऐसे परिणाम मिलने पर ही प्रस्तावित सामग्री की बाजार तक पहुँच का अधिक ठोस आकलन संभव होगा।

बड़ा संयंत्र अलग परियोजना है

कुंभी का व्यावसायिक संयंत्र पायलट से अलग भूमिका निभाएगा। उसकी योजना नियमित औद्योगिक उत्पादन के लिए है, जबकि अनुदान पाने वाली सुविधा नई सामग्री और प्रक्रिया तैयार करेगी। आकार का अंतर भी यही दिखाता है: शोध पायलट सीमित मात्रा में विकास और सत्यापन के लिए है; बड़े संयंत्र को औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन करना होगा। एक ही परिसर में होने से दोनों सुविधाओं की घोषित क्षमता या काम एक-दूसरे में नहीं जुड़ जाते।

यह पहल सरकार के BioE3 ढाँचे के अंतर्गत आती है, जो जैव प्रौद्योगिकी को अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार से जोड़ता है। Balrampur Chini Mills Limited की व्यावसायिक PLA योजना नवीकरणीय चीनी-आधारित कच्चे माल को जैव-प्लास्टिक में बदलने पर आधारित है। पायलट में विकसित विशेष सामग्री और प्रक्रिया से मिलने वाला अनुभव उस औद्योगिक योजना के लिए उपयोगी हो सकता है। इसके लिए नमूनों का प्रदर्शन, लागत और ग्राहकों की प्रतिक्रिया अहम जानकारी देंगे।

औपचारिक शुभारंभ किसी खास PLA रूप की नियमित आपूर्ति या बड़े संयंत्र के चालू होने की तारीख नहीं बताता। सामग्री चुनने वाले ग्राहक को उसके गुणों और परीक्षण परिणामों की जरूरत होगी; बड़े पैमाने की उपलब्धता संयंत्र के संचालन और लगातार उत्पादन पर निर्भर करेगी। इसी क्रम में पायलट का शोध कार्य और व्यावसायिक संयंत्र का निर्माण अलग-अलग स्थिति में हैं।

जैव-आधारित PLA का पर्यावरणीय अर्थ

चीनी से प्राप्त कच्चे माल का इस्तेमाल यह बताता है कि प्लास्टिक का स्रोत क्या है; इस्तेमाल के बाद उसका व्यवहार अलग सवाल है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी की व्याख्या के अनुसार, पौधों से बना प्लास्टिक अपने आप जैव-अपघटनीय नहीं होता और खाद बनाने योग्य सामग्री को विघटित होने के लिए निर्धारित परिस्थितियाँ चाहिए। इसलिए जैव-आधारित और जैव-अपघटनीय को एक ही गुण मानने से तैयार वस्तु के बारे में गलत निष्कर्ष निकल सकता है।

सरकारी पहल PLA को जैव-आधारित, जैव-अपघटनीय सामग्री के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन किसी खास तैयार वस्तु का पर्यावरणीय परिणाम उसके चुने हुए रूप और उपयोग के बाद उपलब्ध निपटान व्यवस्था पर निर्भर करेगा। औद्योगिक खाद बनाने की परिस्थितियाँ साधारण खुले वातावरण से अलग हो सकती हैं। ग्राहक सत्यापन सामग्री के उपयोग संबंधी प्रदर्शन का जवाब देगा; निपटान के दावे के लिए तैयार उत्पाद और उसके अनुरूप परीक्षण को देखना होगा।

अगला ठोस चरण कुंभी के पायलट से नमूनों, प्रक्रिया की लागत और ग्राहक परीक्षण के परिणाम आना है। उनसे स्पष्ट होगा कि विकसित किए जा रहे PLA रूपों में कौन-से औद्योगिक उत्पादन तक पहुँच सकते हैं और नियमित आपूर्ति की तैयारी किस स्थिति में है।

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