Quasa
QUASA ऐप का उपयोग करें
आज ही Web3 क्रिप्टो फ्रीलांसिंग के अग्रणी मंच से जुड़ें!
खोलें
प्रौद्योगिकी

NASA का AI सूर्य के सक्रिय क्षेत्र 12 घंटे पहले देख सकता है—अभी चेतावनी नहीं

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय
NASA का AI सूर्य के सक्रिय क्षेत्र 12 घंटे पहले देख सकता है—अभी चेतावनी नहीं

NASA ने 14 अगस्त 2026 को COFFIES से जुड़े एक प्रयोगात्मक AI मॉडल का विवरण प्रकाशित किया, जो सूर्य की सतह पर सक्रिय क्षेत्र उभरने से पहले उसके संभावित स्थान का अनुमान लगाता है। NASA के तकनीकी विवरण में इसकी पूर्वानुमान सीमा अधिकतम 12 घंटे बताई गई है और साफ किया गया है कि मॉडल अभी वास्तविक समय के परिचालन पूर्वानुमान के लिए तैयार नहीं है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि उपग्रह संचालकों या रेडियो सेवाओं को नई 12 घंटे की चेतावनी मिलने लगी है। मॉडल सौर ज्वाला, कोरोनल द्रव्य उत्सर्जन या पृथ्वी पर भू-चुंबकीय प्रभाव का सीधा अनुमान नहीं लगाता; वह उस पहले चरण को पहचानने की कोशिश करता है जिसमें चुंबकीय सक्रिय क्षेत्र सूर्य की दिखाई देने वाली सतह पर उभरता है।

12 घंटे का पूर्वानुमान किस चीज का है

SDO/HMI अवलोकनों में शांत सौर क्षेत्र से सक्रिय चुंबकीय क्षेत्र के क्रमिक उभार की तुलना

मॉडल का लक्ष्य अगले 12 घंटों की सतत प्रकाश-तीव्रता का अनुमान बनाना है। जब मजबूत चुंबकीय क्षेत्र सूर्य की सतह तक पहुंचता है और सूर्य-कलंक बनने लगते हैं, तब संबंधित इलाके की प्रकाश-तीव्रता घट सकती है। अनुमानित गिरावट से शोधकर्ता यह पहचानते हैं कि सक्रिय क्षेत्र कहां उभर सकता है।

इसलिए शीर्षक में 12 घंटे का अर्थ हर घटना के लिए 12 घंटे की सुनिश्चित अग्रिम सूचना नहीं है। यह उस समय-अवधि की ऊपरी सीमा है जिसके लिए मॉडल प्रकाश-तीव्रता का भविष्य मान निकालता है। परीक्षण में सबसे संवेदनशील विन्यास ने कड़े उभार-मापदंड के तहत औसतन 4.73 घंटे की अग्रिम पहचान दर्ज की थी—यानी व्यवहार में मिले आरंभिक संकेत और अधिकतम पूर्वानुमान क्षितिज अलग संख्याएं हैं।

सक्रिय क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे आगे चलकर सौर ज्वालाओं और कोरोनल द्रव्य उत्सर्जन के स्रोत बन सकते हैं। फिर भी किसी सक्रिय क्षेत्र का उभरना अपने आप यह साबित नहीं करता कि वहां शक्तिशाली विस्फोट होगा, निकला पदार्थ पृथ्वी की ओर जाएगा या पृथ्वी के पास पहुंचकर संचार और उपग्रह प्रणालियों को प्रभावित करेगा।

मॉडल ध्वनिक और चुंबकीय संकेतों में क्या खोजता है

टाइलों में बांटे सौर क्षेत्र में ध्वनिक शक्ति और चुंबकीय बदलाव के बाद प्रकाश-तीव्रता की गिरावट

सूर्य के भीतर से ऊपर आती चुंबकीय संरचना को सतह पर दिखाई देने से पहले सीधे देखना कठिन है। मॉडल उसके अप्रत्यक्ष संकेतों का उपयोग करता है: सतह पर मापी गई ध्वनिक शक्ति में सूक्ष्म बदलाव, दृष्टि-रेखा चुंबकीय क्षेत्र की समय-श्रृंखला और बाद में होने वाली सतत प्रकाश-तीव्रता की गिरावट। ये आंकड़े NASA के Solar Dynamics Observatory पर लगे Helioseismic and Magnetic Imager से आते हैं।

19 जनवरी 2026 के प्राथमिक अध्ययन में स्लाइडिंग-विंडो ट्रांसफॉर्मर को SDO/HMI से देखे गए 46 सक्रिय क्षेत्रों पर जांचा गया और 12 घंटे आगे की प्रकाश-तीव्रता का अनुमान बनाया गया। इनपुट में 2–3, 3–4, 4–5 और 5–6 मिलीहर्ट्ज की चार आवृत्ति-पट्टियों की ध्वनिक शक्ति तथा चुंबकीय माप शामिल थे।

ट्रांसफॉर्मर का संवेदनशील विन्यास समय-श्रृंखला में आने वाले छोटे शुरुआती बदलावों को पकड़ने के लिए बनाया गया था। अध्ययन में इसने LSTM आधार मॉडल के मुकाबले समग्र त्रुटि 10.6 प्रतिशत घटाई, लेकिन अनुमानों में अधिक विचरण भी दिखा। अधिक संवेदनशीलता के साथ बढ़ा हुआ शोर महत्वपूर्ण सीमा है: किसी एक संदिग्ध स्थान को केवल मॉडल के आउटपुट के आधार पर वास्तविक उभार नहीं माना जा सकता।

भारत के उपग्रह और रेडियो सेवाओं के लिए संभावित अर्थ

यदि बड़े और विविध परीक्षणों में यह तरीका विश्वसनीय साबित होता है, तो किसी संभावित सक्रिय क्षेत्र का स्थान पहले मिलने से सौर वेधशालाएं उस इलाके पर जल्दी ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। यह आगे की उन अलग भविष्यवाणियों के लिए आरंभिक संदर्भ बन सकता है जिनमें ज्वाला की संभावना, कोरोनल द्रव्य उत्सर्जन की दिशा और पृथ्वी के पास संभावित प्रभाव का आकलन किया जाता है।

भारत में इसकी प्रासंगिकता उपग्रह संचार, नेविगेशन, मौसम अवलोकन और रेडियो संपर्क जैसी उन प्रणालियों से जुड़ती है जिन पर गंभीर अंतरिक्ष-मौसम घटनाएं असर डाल सकती हैं। लेकिन COFFIES मॉडल ने भारतीय उपग्रहों के लिए कोई परिचालन सेवा प्रदर्शित नहीं की है और उसका आउटपुट किसी भारतीय चेतावनी प्रणाली में शामिल होने की पुष्टि भी नहीं हुई है।

अभी मॉडल को इस पूरी कारण-श्रृंखला की पहली कड़ी के रूप में देखना उचित है। सक्रिय क्षेत्र का अनुमान संभावित सौर गतिविधि का शुरुआती संकेत हो सकता है, पर उससे पृथ्वी-केंद्रित जोखिम निकालने के लिए घटना की प्रकृति, तीव्रता, दिशा और यात्रा-समय पर अलग अवलोकन और मॉडल चाहिए।

परिचालन चेतावनी से पहले क्या सत्यापित होना बाकी है

संग्रहीत सौर घटनाओं पर COFFIES अनुमानों, सही स्थानों और गलत सकारात्मक संकेतों का सत्यापन

अध्ययन का परीक्षण आकार सीमित था और सबसे संवेदनशील मॉडल में अधिक विचरण मिला। वास्तविक सेवा बनाने से पहले उसे अधिक ज्ञात उभारों के साथ शांत सौर क्षेत्रों पर भी जांचना होगा, ताकि ऐसे संकेतों की दर मापी जा सके जिनके बाद कोई सक्रिय क्षेत्र नहीं उभरता। अलग अवलोकन परिस्थितियों, अधूरे आंकड़ों और उपकरण से आने वाले शोर का असर भी स्थापित करना बाकी है।

NJIT का SolARED अवलोकन पोर्टल उस शोध-संग्रह में 2010 से 2023 के बीच दर्ज 50 बड़े सक्रिय क्षेत्रों की ध्वनिक शक्ति, चुंबकीय फ्लक्स और सतत प्रकाश-तीव्रता की समय-श्रृंखलाएं दिखाता है। यह शोध और पुनःपरीक्षण के लिए उपयोगी आधार है, लेकिन अपने आप किसी लगातार चलने वाली चेतावनी सेवा की विश्वसनीयता सिद्ध नहीं करता।

अगला निर्णायक चरण अधिक घटनाओं और शांत अवधियों पर स्वतंत्र सत्यापन होगा, जिसमें संभावित स्थान की सटीकता, छूटे हुए उभार और गलत सकारात्मक संकेत अलग-अलग मापे जाएं। फिलहाल पुष्टि इतनी ही है: COFFIES का मॉडल 12 घंटे आगे तक सक्रिय क्षेत्र के उभार से जुड़ी प्रकाश-तीव्रता का प्रयोगात्मक अनुमान बनाता है; वह NASA, NOAA या किसी भारतीय एजेंसी की परिचालन चेतावनी नहीं है।

यह भी पढ़ें:

साझा करें:

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

Web3, AI और क्रिप्टो की नवीनतम खबरें सीधे अपने इनबॉक्स में पाएँ।

0