
मुफ्त उत्पाद लौटाया तो 194R नहीं—रखा तो TDS कट सकता है

समीक्षा के लिए मिला उत्पाद काम पूरा होने के बाद ब्रांड को लौटा दें, तो CBDT के धारा 194R संबंधी परिपत्र के अनुसार वह क्रिएटर का लाभ नहीं माना जाता। उत्पाद अपने पास रखने पर वह लाभ बन सकता है और लागू सीमा पूरी होने पर ब्रांड को स्रोत पर कर कटौती, यानी TDS, की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। निर्णायक बात उत्पाद का ‘मुफ्त’ कहलाना नहीं, बल्कि समीक्षा के बाद उसका क्या हुआ है।
ICMAI की व्याख्या भी लौटाए गए समीक्षा उत्पाद पर कटौती का दायित्व न होने और रखे गए उत्पाद के लाभ बनने का अंतर बताती है। इसलिए सौदे की लिखित शर्त के साथ वास्तविक वापसी या उत्पाद रखने का रिकॉर्ड भी चाहिए। यदि शुरुआत में वापसी तय थी, लेकिन बाद में ब्रांड ने उत्पाद रखने दिया, तो शुरुआती शर्त अंतिम स्थिति नहीं बताती।
सौदे में वापसी की शर्त कैसे दर्ज करें
उत्पाद स्वीकार करते समय ब्रांड के संदेश या अनुबंध में लिखवा लें कि वह समीक्षा के लिए अस्थायी तौर पर दिया जा रहा है या समीक्षा के बाद आपके पास रहेगा। वापसी तय हो तो उत्पाद का नाम, उपलब्ध मॉडल या क्रमांक, प्राप्ति की तारीख, वापसी की समय-सीमा और ब्रांड का पता या संग्रह की व्यवस्था दर्ज करें। इन विवरणों से बाद में यह पहचानना संभव होगा कि लौटाई गई वस्तु वही थी जो समीक्षा के लिए मिली थी।
ब्रांड की ओर से भेजे गए संदेश और उत्पाद मिलने की पुष्टि एक ही सौदे के रिकॉर्ड में रखें। यदि समीक्षा पूरी होने के बाद ब्रांड वापसी की शर्त बदलता है, तो उसका नया संदेश भी सुरक्षित करें और लिखित रूप में स्पष्ट करें कि उत्पाद किस तारीख से आपके पास रहने वाला है। इस्तेमाल करके लौटाए गए उत्पाद और मेहनताने के रूप में रखे गए उत्पाद को एक जैसी प्रविष्टि में दर्ज करने से मूल्य तथा कटौती का हिसाब उलझ सकता है।
लौटाया उत्पाद: कौन-सा प्रमाण उपयोगी है
वापसी साबित करने के लिए किसी एक अनिवार्य रसीद पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। उपयोगी रिकॉर्ड वह है जो प्राप्त उत्पाद की पहचान, उसे भेजने की कार्रवाई और ब्रांड तक उसकी सुपुर्दगी को जोड़ सके। यह दस्तावेजी क्रम व्यावहारिक सुझाव है, कानून में निर्धारित दस्तावेजों की अलग सूची नहीं।
- उत्पाद मिलने की पुष्टि और वापसी की लिखित शर्त सुरक्षित रखें। उपलब्ध हो तो मॉडल या क्रमांक दोनों में एक जैसा दर्ज करें।
- समीक्षा समाप्त होने पर ब्रांड से वापसी का पता या संग्रह की व्यवस्था लिखित संदेश में तय करें।
- कूरियर की बुकिंग और ट्रैकिंग के साथ सुपुर्दगी की पुष्टि रखें। ब्रांड स्वयं उत्पाद ले जाए तो उससे प्राप्ति की लिखित पुष्टि मांगें।
- अपने सौदा-रिकॉर्ड में प्राप्ति और वापसी की तारीखों के सामने संबंधित संदेश तथा सुपुर्दगी का प्रमाण जोड़ें।
केवल कूरियर बुकिंग से यह स्पष्ट नहीं होता कि उत्पाद ब्रांड तक पहुंच गया। पार्सल लौट आने या गलत पते पर पहुंचने की स्थिति में सुपुर्दगी का रिकॉर्ड खास तौर पर काम आता है। यदि उत्पाद क्षतिग्रस्त होने, आंशिक रूप से इस्तेमाल होने या बदले हुए समझौते के कारण वापस नहीं गया, तो उस सौदे के तथ्य अलग से दर्ज करें और उसकी कर-स्थिति विशेषज्ञ से जांचें।
उत्पाद रखने पर उसका मूल्य क्या होगा
रखे गए उत्पाद के लिए छपी हुई अधिकतम खुदरा कीमत को अपने आप कटौती का आधार न मानें। ब्रांड ने उत्पाद खरीदकर दिया है तो उसकी खरीद कीमत आधार है; ब्रांड उसे स्वयं बनाता है तो ग्राहकों से ली जाने वाली कीमत आधार है। अन्य मामलों में उचित बाजार मूल्य देखा जाता है। कटौती के लिए लाभ का मूल्य तय करते समय वस्तु एवं सेवा कर शामिल नहीं किया जाता।
ब्रांड से पूछें कि उसने कौन-सा आधार अपनाया और संबंधित खरीद विवरण या ग्राहक बिक्री दर क्या है। अपने रिकॉर्ड में उत्पाद की पहचान, प्राप्ति की तारीख, उसे रखने का निर्णय, बताया गया मूल्य और मूल्य का आधार लिखें। यदि अभियान की बातचीत में बताई गई कीमत और कर प्रविष्टि का मूल्य अलग हैं, तो अंतर का कारण लिखित रूप में लें। इस तरह ब्रांड की कटौती और क्रिएटर के आय-रिकॉर्ड में एक ही वस्तु को अलग-अलग मूल्य पर दर्ज होने का कारण समझा जा सकेगा।
₹20,000 की सीमा कैसे गिनें
आयकर अधिनियम की धारा 393(1) की तालिका में व्यवसाय या पेशे से जुड़े ऐसे लाभ के लिए 10% की दर और ₹20,000 की सीमा दी गई है। सीमा से अधिक मूल्य होने पर कटौती पूरे संबंधित मूल्य पर देखी जाती है, केवल सीमा से ऊपर के हिस्से पर नहीं। इसलिए एक उत्पाद का मूल्य देखकर फैसला करने के बजाय उसी प्रदाता से उसी प्राप्तकर्ता को कर वर्ष में मिले संबंधित लाभों का कुल मूल्य देखें। सीमा के बराबर कुल मूल्य और उससे अधिक कुल मूल्य का परिणाम अलग हो सकता है।
प्रत्येक ब्रांड के लिए लौटाए गए और रखे गए उत्पादों की अलग प्रविष्टियां बनाएं। लौटे उत्पाद को रखे गए लाभों के योग में जोड़ देने से सीमा का आकलन बिगड़ेगा; रखे गए दूसरे लाभ को छोड़ देने से योग कम दिखेगा। ब्रांड से यह भी मिलाएं कि लाभ व्यक्तिगत क्रिएटर को दिया गया था या किसी ऐसी व्यावसायिक इकाई को, जिसके नाम पर सौदा और कर प्रविष्टि है। कटौती की जिम्मेदारी देने वाले पक्ष की है, लेकिन सही प्राप्तकर्ता और मूल्य बताने में क्रिएटर का रिकॉर्ड मदद करता है।
आयकर अधिनियम, 2025 के आरंभ और संक्रमण प्रावधानों के अनुसार नया अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ; पुराने अधिनियम के परिपत्र संबंधित नए प्रावधान से असंगत न होने पर जारी रहते हैं। नए कर वर्ष के सौदे में ब्रांड से वर्तमान प्रावधान का उल्लेख कराएं और पुराने कर वर्ष की प्रविष्टि को उस समय लागू कानून से मिलाएं।
कर भुगतान और कटौती का प्रमाण
जब लाभ केवल वस्तु के रूप में मिलता है, तो उससे सीधे नकद कर काटना संभव नहीं होता। उत्पाद देने वाले पक्ष को उसे उपलब्ध कराने से पहले आवश्यक कर चुकाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है। ब्रांड से लिखित रूप में स्पष्ट करें कि मूल्य क्या माना गया है, कर का भुगतान कौन करेगा और आपके नाम पर कौन-सी राशि दर्ज होगी। केवल मौखिक आश्वासन को कर जमा होने का प्रमाण न मानें।
कर कटौती दर्ज होने के बाद ब्रांड से उसका प्रमाणपत्र मांगें। आयकर विभाग की कटौती प्रमाणपत्र संबंधी मार्गदर्शिका में नए फॉर्म 131 को पुराने फॉर्म 16A का समकक्ष बताया गया है। प्रमाणपत्र पर अपना कर पहचान नंबर, ब्रांड का विवरण, दर्ज लाभ का मूल्य और कर की राशि अपने सौदा-रिकॉर्ड से मिलाएं। अंतर मिलने पर ब्रांड से प्रविष्टि ठीक कराने को कहें। TDS का प्रमाण अंतिम आयकर देनदारी तय नहीं करता; आय में वस्तु का मूल्य कैसे शामिल होगा, यह अपनी पूरी कर-स्थिति के साथ विशेषज्ञ से जांचें।
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