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15 सितंबर की अग्रिम कर किस्त किसे देनी है? 44ADA वालों का नियम अलग

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|6 मिनट पढ़ने का समय| 12
15 सितंबर की अग्रिम कर किस्त किसे देनी है? 44ADA वालों का नियम अलग

सीधा उत्तर: यदि आप सामान्य तरीके से पेशेवर लाभ पर कर निकालते हैं और अपेक्षित TDS/TCS घटाने के बाद अग्रिम कर देयता ₹10,000 या अधिक है, तो 15 सितंबर 2026 तक वार्षिक अग्रिम कर का कम से कम 45% जमा होना चाहिए। जून में दिया गया अग्रिम कर इसी संचयी लक्ष्य में शामिल होगा; सितंबर में पूरी 45% रकम दोबारा नहीं देनी है।

यदि आप पेशेवर आय के लिए पूर्व धारा 44ADA की अनुमानित कराधान योजना चुनते हैं, जो कर वर्ष 2026-27 में नए कानून की धारा 58 के अंतर्गत आती है, तो सितंबर की किस्त अनिवार्य नहीं है। पात्र पेशेवर अपनी पूरी शुद्ध अग्रिम कर देयता एक किस्त में 15 मार्च 2027 तक चुका सकता है।

पहले तय करें कि कौन-सी समय-सारणी लागू है

पात्रता जाँच के बाद सामान्य किस्तों और मार्च की एकमुश्त समय-सारणी में चुना गया सही रास्ता

सिर्फ स्वयं को फ्रीलांसर कहना मार्च वाली सुविधा के लिए पर्याप्त नहीं है। यह समय-सारणी उस पात्र निवासी करदाता के लिए है जो निर्दिष्ट पेशे की आय पर अनुमानित कराधान प्रावधान चुनता है। आयकर विभाग का नए अधिनियम पर स्पष्टीकरण पुष्टि करता है कि पूर्व धारा 44ADA सहित निवासी करदाताओं की अनुमानित योजनाएँ आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 58 में समेकित की गई हैं और कर वर्ष 2026-27 के अग्रिम भुगतान नए अधिनियम के अनुसार होंगे।

इसलिए दो बातें अलग-अलग जाँचें: क्या आपकी गतिविधि निर्दिष्ट पेशे में आती है, और क्या आप कर वर्ष 2026-27 के लिए वास्तव में अनुमानित योजना चुन रहे हैं? दोनों का उत्तर हाँ हो तो एकमुश्त मार्च समय-सारणी लागू हो सकती है; अन्यथा सामान्य चार किस्तें लागू होंगी। यह विकल्प केवल तारीख नहीं बदलता, इसलिए योजना चुनने से पहले खर्चों के कर व्यवहार को भी गणना में शामिल करें।

सामान्य फ्रीलांसर सितंबर की रकम कैसे निकाले

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 404, 405 और 408 के अनुसार ₹10,000 या अधिक अग्रिम कर देय होने पर सामान्य समय-सारणी में 15 जून तक 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75% और 15 मार्च तक 100% संचयी भुगतान करना है। देय अग्रिम कर की गणना में अनुमानित आयकर से उस आय पर स्रोत पर कटने या एकत्र होने वाला कर घटाया जाता है।

45% सितंबर की अलग दर नहीं, संचयी लक्ष्य है। पूरे कर वर्ष की संभावित करयोग्य आय पर कुल कर निकालें, अपेक्षित TDS/TCS घटाएँ और बची अग्रिम कर देयता का 45% लें। इस लक्ष्य में से जून तक जमा अग्रिम कर घटाने पर सितंबर में दी जाने वाली अतिरिक्त रकम मिलेगी।

एक काल्पनिक उदाहरण में पूरे वर्ष का अनुमानित कर ₹1,80,000 और ग्राहकों से अपेक्षित TDS ₹40,000 है। शुद्ध अग्रिम कर देयता ₹1,40,000 तथा सितंबर तक 45% लक्ष्य ₹63,000 होगा। यदि जून में ₹21,000 दिए जा चुके हैं, तो 15 सितंबर तक ₹42,000 और जमा करने होंगे।

ClearTax की कर वर्ष 2026-27 तालिका भी सामान्य करदाता के लिए 15 सितंबर 2026 तक 45% संचयी लक्ष्य और अनुमानित योजना चुनने वाले पात्र पेशेवर के लिए 15 मार्च 2027 तक 100% भुगतान दिखाती है।

₹10,000 की सीमा TDS घटाने के बाद जाँचें

अनुमानित आयकर से TDS घटाकर ₹10,000 की अग्रिम कर सीमा की जाँच

यह सीमा सकल प्राप्तियों, पेशेवर आय या TDS से पहले निकले कुल कर पर सीधे लागू नहीं होती। पहले सभी करयोग्य आय पर अनुमानित कर निकालें और फिर उसी आय से संबंधित अपेक्षित TDS/TCS घटाएँ। शेष रकम ₹10,000 या अधिक हो तो अग्रिम कर दायित्व बनता है; ठीक ₹10,000 को सीमा से बाहर नहीं माना जाता।

दूसरा काल्पनिक उदाहरण लें। कुल अनुमानित कर ₹28,000 और अपेक्षित TDS ₹20,000 हो तो शुद्ध देयता ₹8,000 है, इसलिए अग्रिम कर की सीमा पूरी नहीं होती। यदि अपेक्षित TDS ₹18,000 हो, तो शेष ठीक ₹10,000 होगा और अग्रिम कर देना पड़ेगा।

अनुमान पूरे कर वर्ष का होना चाहिए, केवल सितंबर तक प्राप्त आय या अब तक कटे TDS का नहीं। नए अनुबंध, बदली हुई आय या कम TDS से शुद्ध देयता बढ़े तो दिसंबर और मार्च की संचयी किस्तों की गणना भी उसी अनुपात में बदलनी होगी।

अनुमानित योजना में सितंबर की किस्त क्यों नहीं है

धारा 58 की संबंधित अनुमानित योजना चुनने वाले करदाता के लिए सामान्य चार-किस्त समय-सारणी लागू नहीं होती। आयकर विभाग के कर भुगतान प्रश्नोत्तर के अनुसार उसे पूरी अग्रिम कर देयता 15 मार्च तक एक किस्त में चुकानी है; विभाग यह भी स्पष्ट करता है कि अग्रिम कर के कम या विलंबित भुगतान पर लागू ब्याज व्यवस्था नए अधिनियम में जारी है।

मान लें कि पात्र पेशेवर धारा 58 की अनुमानित योजना चुनता है। सभी आय शामिल करने पर कुल अनुमानित कर ₹1,50,000 और अपेक्षित TDS ₹30,000 है। शुद्ध अग्रिम कर ₹1,20,000 होगा: सितंबर में 45% देना आवश्यक नहीं, लेकिन पूरी ₹1,20,000 रकम 15 मार्च 2027 तक चुकानी होगी। वह चाहे तो पहले भुगतान कर सकता है; कानून अंतिम समय-सीमा देता है, प्रतीक्षा की बाध्यता नहीं।

यदि पेशेवर योजना के लिए पात्र नहीं है या वास्तविक लाभ के आधार पर आय घोषित करेगा, तो केवल पिछले वर्षों में 44ADA इस्तेमाल करने के कारण मार्च तक रुकना सुरक्षित निष्कर्ष नहीं है। लागू पद्धति कर वर्ष 2026-27 के लिए चुनी गई आय-गणना से तय होगी।

भुगतान का क्रम

सही कर वर्ष और अग्रिम कर प्रकार चुनकर भुगतान तथा चालान रसीद का सत्यापन
  1. अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक पेशेवर और अन्य करयोग्य आय का अनुमान बनाएँ।
  2. लागू कर व्यवस्था, अनुमत कटौतियों, अधिभार और उपकर सहित कुल अनुमानित कर निकालें।
  3. उसी आय से संबंधित अपेक्षित TDS/TCS घटाएँ। शेष रकम ₹10,000 से कम हो तो अग्रिम कर दायित्व नहीं बनता।
  4. सामान्य गणना में 45% संचयी लक्ष्य से पहले जमा अग्रिम कर घटाएँ। पात्र अनुमानित योजना में 15 मार्च तक पूरी शुद्ध देयता चुकाने की व्यवस्था करें।
  5. भुगतान में आयकर अधिनियम, 2025, कर वर्ष 2026-27 और भुगतान प्रकार के रूप में अग्रिम कर चुनें।

आयकर विभाग की चालान बनाने की आधिकारिक प्रक्रिया में e-Filing पोर्टल पर e-Pay Tax खोलना, PAN से आगे बढ़ना, उपयुक्त कर श्रेणी और भुगतान प्रकार चुनना तथा भुगतान के बाद Payment History से चालान रसीद लेना शामिल है। रसीद में रकम, कर वर्ष और भुगतान प्रकार मिलाकर उसे सुरक्षित रखें।

निर्णय का सार यही है: सामान्य लाभ-गणना में 15 सितंबर 2026 तक 45% संचयी भुगतान पूरा करें; पात्र अनुमानित पेशेवर के लिए सितंबर की अनिवार्य किस्त नहीं है, लेकिन TDS/TCS घटाने के बाद बची पूरी अग्रिम कर देयता 15 मार्च 2027 तक चुकानी होगी।

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