
GalaxEye को ₹63.84 करोड़—0.5 मीटर तस्वीर अभी TRL-9 से दूर

भारत के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने नई दिल्ली से 24 सितंबर 2026 को जारी सरकारी घोषणा में बेंगलुरु की GalaxEye Space Solutions के साथ ₹63.84 करोड़ की सहायता का समझौता बताया; ₹247.69 करोड़ की OptoSAR परियोजना का लक्ष्य 0.5 मीटर से कम विभेदन और तकनीक को TRL-6 से TRL-9 तक ले जाना है। बोर्ड के अनुसार सहायता विकास, अभियांत्रिकी, परीक्षण और सत्यापन के लिए है।
24 सितंबर के इस समझौते पर 25 सितंबर की Inc42 रिपोर्ट में बोर्ड सचिव राजेश कुमार पाठक का उद्देश्य “supporting their journey towards commercialisation” उद्धृत है। समझौता परियोजना को आगे बढ़ाने का वित्तीय कदम है; प्रस्तावित विभेदन पर तस्वीरें देने वाली परिचालन सेवा की शुरुआत अभी घोषित नहीं हुई है।
सहायता और तकनीकी तैयारी की चरण-सारणी
घोषित सहायता पूरी स्वीकृत लागत का लगभग एक चौथाई है। दोनों रकमों का अंतर ₹183.85 करोड़ बैठता है, लेकिन केवल इस अंतर से शेष खर्च का वित्तीय स्रोत तय नहीं होता। सहायता का रूप भी मायने रखता है: वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण-पत्र तय शर्तों पर हिस्सेदारी में बदल सकते हैं, इसलिए समझौते की रकम को बिना शर्त अनुदान या पहले से जारी नकदी मानना उचित नहीं होगा।
नासा की तकनीकी तैयारी स्तर सूची में TRL-6 से TRL-9 तक नमूने के प्रदर्शन, अंतिम प्रणाली के परीक्षण और वास्तविक अभियान में सफल संचालन के अलग-अलग प्रमाण बताए गए हैं। GalaxEye की घोषित योजना को वित्तपोषण के चरण के साथ रखकर देखें तो बाकी काम इस तरह समझ आता है:
- वित्तपोषण: परियोजना की स्वीकृत लागत ₹247.69 करोड़ है और सहायता ₹63.84 करोड़। समझौते का वित्तीय विवरण सहायता का माध्यम वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण-पत्र बताता है; उसमें रकम जारी होने की तारीख और रूपांतरण की शर्तें नहीं दी गई हैं।
- TRL-6: प्रणाली या उसके हिस्से के प्रतिनिधि नमूने को काम की परिस्थितियों में अपनी मुख्य क्षमता दिखानी होती है। बोर्ड ने इसे आगे की विकास यात्रा का शुरुआती स्तर बताया है; यह अंतिम उपग्रह के नियमित संचालन का प्रमाण नहीं है।
- TRL-7: अधिक परिपक्व प्रोटोटाइप को उस वातावरण और मंच पर प्रदर्शन करना होता है जहाँ अंतिम प्रणाली चलेगी। उपग्रह के लिए रडार, प्रकाशीय संवेदक और उनसे जुड़ी प्रणालियों को साथ काम करते दिखाना इस दिशा का अहम हिस्सा होगा।
- TRL-8: अंतिम विन्यास वाली प्रणाली को परीक्षण और प्रदर्शन से उड़ान के योग्य सिद्ध करना होता है। अलग-अलग हिस्सों का चलना पर्याप्त नहीं; एकीकृत प्रणाली के अपेक्षित प्रदर्शन का सत्यापन जरूरी है।
- TRL-9: अंतिम प्रणाली को वास्तविक अभियान में सफलतापूर्वक चलना होता है। कक्षा से मिली तस्वीरों और संचालन के परिणामों से ही लक्षित क्षमता का परिचालन प्रमाण बनेगा।
यह क्रम सहायता की भूमिका स्पष्ट करता है। धन विकास और परीक्षण की अगली अवस्थाओं को सहारा देगा, जबकि प्रत्येक तकनीकी स्तर के लिए अपना प्रदर्शन चाहिए। समझौते में उन परीक्षणों का उद्देश्य बताया गया है, उनके पूरा हो जाने का परिणाम नहीं। सार्वजनिक विवरण से यह भी तय नहीं होता कि शेष परियोजना लागत किस समय और किन स्रोतों से जुटेगी।
OptoSAR में रडार और प्रकाशीय चित्र कैसे जुड़ेंगे
OptoSAR का प्रस्ताव सिंथेटिक अपर्चर रडार और विद्युत-प्रकाशीय इमेजिंग को एक पृथ्वी-अवलोकन प्रणाली में मिलाने का है। प्रकाशीय संवेदक सतह का दृश्य विवरण देते हैं, लेकिन बादल और कम रोशनी तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। रडार अपना संकेत भेजता है, इसलिए वह दिन के उजाले पर निर्भर नहीं रहता और बादलों के पार सतह का अवलोकन कर सकता है।
संयुक्त चित्र का लाभ तभी मिलेगा जब दोनों संवेदकों के अवलोकन को एक ही भूभाग से ठीक तरह मिलाया जाए। दृश्य और रडार आँकड़ों में सतह का रूप अलग दिख सकता है; उन्हें जोड़ने की प्रक्रिया में स्थान, अवलोकन के समय और तस्वीर की गुणवत्ता का मेल महत्वपूर्ण है। परियोजना का प्रस्ताव मौसम और रोशनी बदलने पर अधिक निरंतर जानकारी पाने का है, पर उस परिणाम की गुणवत्ता को कक्षा में जाँचना बाकी है।
बोर्ड ने व्यापक क्षेत्र और दूर की निगरानी, लोगों तथा वाहनों का पता लगाने और लक्ष्यों का वर्गीकरण संभावित उपयोगों में रखा है। ये उपयोग प्रस्तावित क्षमता की दिशा बताते हैं। किसी खास भूभाग में पहचान कितनी भरोसेमंद होगी, यह संवेदकों से मिले आँकड़ों और संयुक्त तस्वीर के परीक्षण पर निर्भर करेगा। इसी वजह से लक्षित विभेदन को आज उपलब्ध तस्वीरों की गुणवत्ता के बराबर नहीं रखा जा सकता।
Drishti के बाद अगला निर्णायक प्रमाण
GalaxEye का पहले का Mission Drishti उपग्रह कक्षा में पहुँचा था, लेकिन इमेजिंग शुरू होने से पहले उससे संपर्क टूट गया। Drishti मिशन की रिपोर्ट के अनुसार प्रक्षेपण 3 मई 2026 को हुआ और कंपनी ने 7 जुलाई को संपर्क टूटने की जानकारी दी; शुरुआती कक्षीय संचालन के कुछ काम हुए थे, पर उपग्रह ने संयुक्त OptoSAR तस्वीर नहीं दी। इस अनुभव से अगली उड़ान में सिर्फ उपग्रह के चालू होने के बजाय उसके इमेजिंग पेलोड के काम करने का प्रमाण भी अहम हो जाता है।
रडार और प्रकाशीय संवेदकों को कक्षा में चलाकर एक ही क्षेत्र के उपयोगी आँकड़े लेना अगली परीक्षा होगी। उसके बाद उन आँकड़ों को मिलाकर तस्वीर बनानी, लक्षित बारीकी मापनी और परिणाम को बार-बार प्राप्त कर सकना दिखाना होगा। शुरुआती कक्षीय संचालन का अनुभव इस काम में मदद कर सकता है, लेकिन पिछली उड़ान से तस्वीर की गुणवत्ता का प्रमाण नहीं मिला।
कंपनी आगे के OptoSAR उपग्रहों पर काम कर रही है। उनकी उड़ान और उससे मिलने वाले सत्यापित चित्र ही बताएँगे कि प्रस्तावित रडार–प्रकाशीय संयोजन नियमित पृथ्वी-अवलोकन में कितनी दूर तक पहुँचा है। तब उपयोगकर्ताओं के लिए तस्वीर की बारीकी के साथ उसकी उपलब्धता और भरोसेमंदी का आकलन भी संभव होगा।
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