
AWS या Azure: तेज वर्चुअल मशीन की ऊँची कीमत कब वसूल होती है

भारत में AWS या Azure की तेज वर्चुअल मशीन की ऊँची प्रति घंटा दर तभी वसूल होती है जब कम कार्य समय से प्रति काम कुल खर्च घटे या जरूरी समय सीमा पूरी हो। प्रकाशित सीपीयू अध्ययन में समान 4 वर्चुअल सीपीयू और 16 GiB स्मृति वाली ARM मशीनों पर AWS M7g ने चुने हुए गणना कार्य लगभग 0.664 घंटे में पूरे किए, जबकि Azure Dpsv5 को लगभग 0.998 घंटे लगे। अध्ययन में उनकी प्रति घंटा दर क्रमशः USD 0.1632 और USD 0.154 थी, फिर भी गणना का कंप्यूट खर्च क्रमशः USD 0.108 और USD 0.154 निकला।
ये अध्ययन में इस्तेमाल की गई दरें हैं, मुंबई और सेंट्रल इंडिया के मौजूदा मूल्य नहीं। भारतीय कारोबार के लिए तुलना का आधार दोनों क्षेत्रों में समान संसाधन, समान संचालन अवधि और एक ही कार्यभार होना चाहिए। मशीन का किराया, पूरे उपयोग काल की स्थायी डिस्क और इंटरनेट पर भेजे गए डेटा का खर्च जोड़ने के बाद ही तेज विकल्प का आर्थिक लाभ पता चलता है। तय घंटों तक लगातार चालू रहने वाली सेवा में किसी एक काम का जल्दी पूरा होना अपने आप कंप्यूट बिल नहीं घटाता।
प्रकाशित परीक्षण गति के बारे में क्या बताते हैं

काम पूरा होने का समय और प्रोसेसर परीक्षण का अंक अलग माप हैं। सामान्य कंप्यूट मशीनों के अध्ययन में समान 4 वर्चुअल सीपीयू और 16 GiB वाले इंटेल विन्यास पर Azure Dv5 का Geekbench 6 बहु-कोर अंक 3524 था, जबकि AWS M6i का 3297 था। उस परीक्षण में Azure आगे था, लेकिन अंक से किसी कारोबारी अनुप्रयोग का कार्य समय सीधे नहीं निकाला जा सकता।
पहले अध्ययन ने चुने हुए वैज्ञानिक गणना कार्यों का बीता हुआ समय मापा; दूसरे ने प्रोसेसर परीक्षण का अंक। इसलिए दोनों में अलग पक्ष का आगे होना विरोधाभास नहीं है। गणना प्रधान आवधिक काम के लिए बीता समय उपयोगी संकेत है। डेटाबेस, लगातार डिस्क पर लिखने वाला अनुप्रयोग या नेटवर्क के उत्तर पर निर्भर सेवा अलग परिणाम दे सकती है, क्योंकि उसके काम में प्रोसेसर के अलावा दूसरे संसाधन भी समय तय करते हैं। समान वर्चुअल सीपीयू और स्मृति से अलग कंपनियों की मशीनों में समान प्रोसेसर या समान वास्तविक गति मिलने की गारंटी भी नहीं बनती।
प्रकाशित माप निर्णय को दिशा देते हैं, पर वे भारतीय क्षेत्र में उसी कार्यभार का परीक्षण नहीं हैं। विशेष रूप से ARM और इंटेल मशीनों के परिणामों को एक ही पंक्ति में रखकर तेज प्रदाता घोषित करना भ्रामक होगा। अनुप्रयोग जिस वास्तुकला पर चलता है, तुलना भी उसी पर होनी चाहिए। कार्यभार बदलने पर समय का अनुपात बदल सकता है; इसलिए अध्ययन में दिखी प्रति काम बचत को किसी दूसरे अनुप्रयोग की निश्चित बचत नहीं समझना चाहिए।
मुंबई और सेंट्रल इंडिया का तुलनीय मूल्य-पत्र

मूल्य-पत्र में AWS का मुंबई क्षेत्र और Azure का सेंट्रल इंडिया क्षेत्र अलग पंक्तियों में रखें। उदाहरण के लिए दोनों तरफ Linux, इंटेल वास्तुकला, 4 वर्चुअल सीपीयू और 16 GiB स्मृति वाली मशीन चुनें। हर पंक्ति में मशीन का पूरा पहचानकर्ता, क्षेत्र, चुनी हुई छवि, खरीद का तरीका, मुद्रा, प्रति घंटा कंप्यूट दर और बिल योग्य संचालन समय दर्ज हो। समान आकार तुलना की शुरुआत है; मशीन की पीढ़ी और उपलब्ध संसाधन सीमा भी चयन को प्रभावित कर सकती है।
Amazon EC2 की मांग आधारित मूल्य शर्तें कंप्यूट को उपयोग अवधि से जोड़ती हैं और इंटरनेट निकासी का अलग हिसाब देती हैं; AWS विभिन्न सेवाओं और क्षेत्रों में मिलाकर हर महीने पहले 100 GB इंटरनेट निकासी निःशुल्क रखता है। इस साझा छूट को केवल मुंबई की एक मशीन के नाम पूरे का पूरा जोड़ना सही नहीं होगा यदि खाते के दूसरे उपयोग में उसका कुछ हिस्सा पहले ही लग चुका है। कंप्यूट के साथ जुड़े EBS भंडारण की दर भी चुने गए क्षेत्र और डिस्क विन्यास से लेनी होगी।
Azure के Linux मशीन मूल्य पृष्ठ पर प्रबंधित डिस्क और इंटरनेट निकासी कंप्यूट से अलग खर्च हैं। वहां रुकी हुई किंतु अब भी आवंटित मशीन पर कंप्यूट शुल्क जारी रह सकता है; आवंटन हटने पर वह शुल्क रुकता है। इसलिए दोनों तरफ केवल मशीन बंद करने का समय लिखना पर्याप्त नहीं: बिल योग्य स्थिति और डिस्क कितने समय रखी गई, यह भी दर्ज करना होगा। डिस्क हटाए बिना मशीन का कंप्यूट रोकने पर भंडारण का खर्च बना रह सकता है।
एक स्पष्ट रूप से काल्पनिक मूल्य-पत्र में महीने के 120 कंप्यूट घंटे, पूरे महीने रखी 128 GiB डिस्क और 500 GB इंटरनेट निकासी मानें। ये उपयोग की समान धारणाएं हैं, भारतीय क्षेत्रों की प्रकाशित दरें नहीं। दोनों प्रदाताओं की दरें इन्हीं मदों के सामने भरने पर एक ही उपयोग के लिए मासिक खर्च निकलेगा। यदि भुगतान मुद्रा अलग है, तो तुलना में एक ही विनिमय आधार रखें; कर और अनुबंध पर मिलने वाली छूट को भी दोनों तरफ एक जैसे नियम से लागू करें।
डिस्क और इंटरनेट निकासी कहाँ हिसाब बदलते हैं

स्थायी डिस्क का समय मशीन के चलने के समय से अलग हो सकता है। काल्पनिक मूल्य-पत्र में मशीन 120 घंटे चले और डिस्क पूरे महीने रहे, तो डिस्क को केवल 120 घंटे का खर्च मानने से कुल राशि कम दिखाई देगी। दोनों तरफ डिस्क की क्षमता समान रखने के साथ उसके पढ़ने-लिखने की जरूरत भी मिलाएं। सस्ती लेकिन धीमी डिस्क कार्य समय बढ़ाए तो कम भंडारण दर से मिली बचत कंप्यूट में खर्च हो सकती है। अस्थायी स्थानीय स्थान को स्थायी डेटा रखने वाली डिस्क के बराबर भी नहीं माना जा सकता।
इंटरनेट निकासी के लिए भेजे गए कुल डेटा और शुल्क योग्य डेटा को अलग रखें। काल्पनिक 500 GB निकासी में AWS की साझा निःशुल्क मात्रा वास्तव में कितनी उपलब्ध है, इससे उसका देय हिस्सा बदलेगा। Azure में संबंधित निकासी शुल्क उसी उपयोग के लिए अलग भरना होगा। भारत के उपयोगकर्ताओं को बड़ी फाइलें बार-बार भेजने वाली सेवा में यह मद प्रति घंटा मशीन किराये के छोटे अंतर से अधिक असर डाल सकती है। लगभग पूरा डेटा प्रदाता के भीतर रखने वाले काम में इसका वजन कम होगा, हालांकि क्षेत्र या नेटवर्क मार्ग बदलने पर अन्य स्थानांतरण शुल्क भी देखने पड़ सकते हैं।
अतिरिक्त किराया कब वापस आता है
आवधिक काम के लिए पहले हर मशीन का प्रति काम कुल खर्च निकालें: बिल योग्य कंप्यूट समय को क्षेत्र की प्रति घंटा दर से गुणा करें, फिर उस काम से संबंधित डिस्क और इंटरनेट निकासी का हिस्सा जोड़ें। यदि तेज मशीन की प्रति घंटा दर अधिक है लेकिन उसके कम कार्य समय से यह योग घटता है, ऊँचा किराया आर्थिक रूप से वसूल होता है। प्रकाशित ARM गणना में यही स्थिति केवल कंप्यूट खर्च के स्तर पर दिखती है; भारतीय मूल्य-पत्र में डिस्क और निकासी जुड़ने के बाद परिणाम बदल सकता है।
जहाँ मशीनें तय अवधि तक चालू रहती हैं, सवाल प्रति काम बिल से आगे जाता है। तेज मशीन उसी अवधि में अधिक काम पूरा कर सकती है, कम प्रतीक्षा समय दे सकती है या समान मांग के लिए कम मशीनों की जरूरत पैदा कर सकती है। इनमें से जो लाभ वास्तव में कारोबार को मिलता है, उसका मूल्य अतिरिक्त किराये के सामने रखना होगा। यदि मांग सीमित है और दोनों विकल्प समय पर काम पूरा कर देते हैं, तो खाली बची प्रोसेसर क्षमता से खर्च की वसूली नहीं होती।
दोनों विकल्पों का कुल खर्च निकालने के बाद महंगे विकल्प के अतिरिक्त खर्च को उससे बचने वाले कार्य समय से भाग दें। नतीजा बताएगा कि एक घंटा जल्दी पूरा होने के लिए कितना भुगतान हो रहा है। कठोर समय सीमा वाले गणना कार्य में यह राशि स्वीकार्य हो सकती है; समय का आर्थिक मूल्य न हो और सस्ता विकल्प भी काम पूरा कर दे, तो तेज मशीन की ऊँची दर वसूल नहीं होती। क्षेत्रीय दर, चुनी हुई वास्तुकला या खरीद छूट बदलते ही इसी हिसाब के इनपुट और निष्कर्ष भी बदलेंगे।
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