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Anthropic ने ओपन-वेट्स मॉडल्स पर प्रतिबंध का विरोध किया

|अपडेट किया गया: |लेखक: व्याचेस्लाव वासिपेनोक|7 मिनट पढ़ने का समय| 321
Anthropic ने ओपन-वेट्स मॉडल्स पर प्रतिबंध का विरोध किया

Anthropic के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Dario Amodei ने 27 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि कंपनी ने ओपन-वेट्स मॉडल्स पर प्रतिबंध की कभी वकालत नहीं की। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी नीति-निर्माताओं और तकनीकी कंपनियों के बीच चीनी ओपन-वेट्स मॉडल्स के इस्तेमाल, सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस तेज है। Anthropic की आधिकारिक घोषणा में कहा गया है कि खतरनाक क्षमताओं से रहित ओपन-वेट्स मॉडल सार्वजनिक हित में हो सकते हैं।

हालांकि, कंपनी खुले मॉडल भारों को बिना शर्त सुरक्षित नहीं मानती। Amodei ने चेतावनी दी कि अत्यधिक सक्षम मॉडल्स के सार्वजनिक भार जारी होने के बाद सुरक्षा-नियंत्रण हटाना, उपयोग पर निगरानी रखना या मॉडल को वापस लेना मुश्किल हो जाता है। उनका प्रस्ताव व्यापक प्रतिबंध के बजाय उन्नत चिप्स पर नियंत्रण, औद्योगिक स्तर पर मॉडल-डिस्टिलेशन पर कार्रवाई और पर्याप्त रूप से सक्षम सभी मॉडल्स के अनिवार्य सुरक्षा परीक्षण पर केंद्रित है।

27 जुलाई की घोषणा में Anthropic ने क्या कहा

Anthropic का केंद्रीय स्पष्टीकरण यह है कि ओपन-वेट्स मॉडल्स को एक अलग श्रेणी मानकर प्रतिबंधित करना कंपनी की नीति नहीं है। ऐसे मॉडल्स के प्रशिक्षित भार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे डेवलपर, शोधकर्ता और व्यवसाय उन्हें अपने सर्वर या निजी क्लाउड पर चला सकते हैं। कंपनी ने यह भी माना कि इससे स्थानीय नियंत्रण, प्रतिस्पर्धा और शोध की पहुंच बढ़ सकती है।

Amodei के अनुसार, समस्या ओपन-वेट्स शब्द से अपने-आप पैदा नहीं होती। चिंता तब बढ़ती है जब किसी मॉडल में साइबर हमलों, जैविक नुकसान या अन्य गंभीर दुरुपयोग से जुड़ी पर्याप्त क्षमता हो। इसलिए Anthropic का तर्क मॉडल के वितरण के तरीके और उसकी वास्तविक क्षमता के बीच अंतर करने का है।

इस स्पष्टीकरण की पृष्ठभूमि में एक उद्योग-पत्र भी है, जिसमें कई कंपनियों ने ओपन-वेट्स मॉडल्स पर जल्दबाजी में प्रतिबंध लगाने से बचने की अपील की थी। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, Nvidia, Microsoft, Meta, Google, OpenAI और अन्य कंपनियां इस समर्थन अभियान में शामिल हुईं, जबकि Anthropic ने उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसी अनुपस्थिति के बाद कंपनी पर अपने बंद मॉडल-व्यवसाय को प्रतिस्पर्धा से बचाने का आरोप लगा।

ओपन-वेट्स मॉडल्स में लाभ और नियंत्रण की सीमा

ओपन-वेट्स मॉडल की स्थानीय तैनाती में शोध की सुविधा और दूरस्थ सुरक्षा नियंत्रण की सीमा

ओपन-वेट्स मॉडल्स का प्रमुख लाभ यह है कि उपयोगकर्ता किसी बाहरी एपीआई पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना मॉडल चला सकते हैं। इससे संस्थानों को अपने डेटा और कार्यप्रवाह पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। शोधकर्ता मॉडल के व्यवहार का स्वतंत्र मूल्यांकन कर सकते हैं, जबकि डेवलपर स्थानीय जरूरतों के अनुसार उसके उपयोग को अनुकूलित कर सकते हैं।

यह लाभ सुरक्षा की चुनौती के साथ आता है। बंद मॉडल सेवा में प्रदाता संदिग्ध अनुरोधों को रोक सकता है, खाते सीमित कर सकता है, सुरक्षा नियम बदल सकता है या मॉडल की पहुंच वापस ले सकता है। सार्वजनिक भार वाले मॉडल में उपयोगकर्ता की स्थानीय प्रति पर ऐसे उपाय सीधे लागू करना कठिन होता है। भार डाउनलोड होने के बाद उन्हें कॉपी, संशोधित और अलग बुनियादी ढांचे पर चलाया जा सकता है।

इसी कारण Anthropic ने ओपन-वेट्स मॉडल्स को अनिवार्य रूप से अधिक सुरक्षित मानने वाले तर्क को स्वीकार नहीं किया। कंपनी का कहना है कि यह प्रश्न पहले से तय करने के बजाय परीक्षण से समझा जाना चाहिए कि सार्वजनिक भार किसी खास क्षमता के दुरुपयोग का जोखिम कितना बढ़ाते हैं और कौन-से सुरक्षा उपाय प्रभावी हो सकते हैं।

चीनी AI मॉडल्स पर चिंता प्रतिबंध से अलग क्यों है

चीनी AI मॉडल्स की सुरक्षा चिंता को ओपन-वेट्स पर सामान्य प्रतिबंध से अलग करती नीतिगत तुलना

Anthropic की चिंता केवल इस बात से संबंधित नहीं है कि किसी मॉडल के भार खुले हैं। कंपनी ने अधिक शक्तिशाली AI प्रणालियां विकसित करने में चीन और अन्य अधिनायकवादी सरकारों की क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया है। Amodei के अनुसार, मुख्य जोखिम यह है कि ऐसी सरकारें अमेरिका से अधिक सक्षम मॉडल बनाकर सैन्य बढ़त या व्यापक निगरानी और दमन के लिए उनका इस्तेमाल कर सकती हैं।

कंपनी ने औद्योगिक स्तर पर मॉडल-डिस्टिलेशन को भी अलग समस्या बताया है। इसमें कम सक्षम या छोटे मॉडल को बेहतर मॉडल के आउटपुट से प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे मूल मॉडल को शुरू से प्रशिक्षित करने की तुलना में कम गणनात्मक संसाधन लग सकते हैं। Anthropic का तर्क है कि इस व्यवहार पर लक्षित कानूनी और व्यावसायिक कार्रवाई होनी चाहिए, न कि सभी ओपन-वेट्स मॉडल्स पर एक समान रोक।

Axios की स्वतंत्र रिपोर्टिंग में भी Amodei के प्रस्तावों को तीन हिस्सों में बताया गया है: उन्नत चिप्स और चिप-निर्माण उपकरणों पर कड़ा नियंत्रण, औद्योगिक डिस्टिलेशन पर कार्रवाई और पर्याप्त रूप से सक्षम खुले तथा बंद दोनों प्रकार के मॉडल्स का अनिवार्य सुरक्षा परीक्षण।

इसका अर्थ यह नहीं है कि चीन में बने हर मॉडल को असुरक्षित माना गया है। मॉडल की राष्ट्रीयता अपने-आप में सुरक्षा का निर्णायक प्रमाण नहीं है। किसी प्रणाली का मूल्यांकन उसकी क्षमताओं, प्रशिक्षण और परीक्षण की पारदर्शिता, सुरक्षा दस्तावेज, पहुंच-नियंत्रण और वास्तविक तैनाती के संदर्भ में होना चाहिए।

AI नियमन की बहस अब किस दिशा में जा सकती है

Anthropic का रुख नियामकों के सामने वितरण-आधारित और क्षमता-आधारित नियमों का अंतर रखता है। वितरण-आधारित नियमों में सार्वजनिक भार उपलब्ध कराने को ही जोखिम का मुख्य संकेत माना जा सकता है। क्षमता-आधारित नियमों में यह देखा जाएगा कि मॉडल साइबर सुरक्षा, जैविक जोखिम, स्वचालन या अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में कितना सक्षम है।

क्षमता-आधारित व्यवस्था अधिक सटीक हो सकती है, लेकिन उसे लागू करना कठिन है। नियामकों को यह तय करना होगा कि किस स्तर की क्षमता पर अतिरिक्त परीक्षण आवश्यक होगा और छोटे शोध मॉडल्स को अनावश्यक बोझ से कैसे बचाया जाए। साथ ही, सार्वजनिक भारों के बाद होने वाले संशोधनों और स्थानीय तैनाती के लिए निर्माता, वितरक और उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी अलग-अलग परिभाषित करनी होगी।

Anthropic ने पर्याप्त रूप से सक्षम सभी मॉडल्स, चाहे वे खुले हों या बंद, के लिए सुरक्षा परीक्षण का समर्थन किया है। कंपनी के बयान के अनुसार, साइबर, जैविक और मॉडल-संरेखण से जुड़े जोखिमों की जांच रिलीज से पहले होनी चाहिए। ऐसे परीक्षण का वैश्विक स्तर पर प्रभावी होना तभी संभव होगा जब अलग-अलग देश और प्रमुख प्रयोगशालाएं समान या तुलनीय मानकों पर सहयोग करें।

भारतीय तकनीकी बाजार के लिए इसका सीमित लेकिन महत्वपूर्ण संकेत

भारत में इस बहस का महत्व मुख्य रूप से स्थानीय तैनाती, डेटा नियंत्रण और शोध की स्वतंत्रता से जुड़ा है। भारतीय स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालय और बड़े संस्थान ओपन-वेट्स मॉडल्स का उपयोग बाहरी सेवा पर निर्भरता घटाने या विशेष कार्यों के लिए मॉडल को अनुकूलित करने के लिए कर सकते हैं। लेकिन Anthropic की घोषणा भारत में किसी नए नियम, उपलब्धता या प्रतिबंध की घोषणा नहीं है।

इसलिए भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए अभी सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि “ओपन-वेट्स” को “सुरक्षित” या “असुरक्षित” का स्वतः प्रमाण न माना जाए। किसी मॉडल को अपनाने से पहले लाइसेंस, भार जारी करने की शर्तें, ज्ञात सीमाएं, सुरक्षा परीक्षण, डेटा प्रबंधन और संशोधित संस्करणों की जवाबदेही अलग-अलग समझनी होगी। यह सामान्य सावधानी है, Anthropic द्वारा भारत के लिए जारी अनुपालन निर्देश नहीं।

28 जुलाई 2026 तक क्या स्पष्ट है

उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर Anthropic ने ओपन-वेट्स मॉडल्स की पूरी श्रेणी पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया है। कंपनी ऐसे मॉडल्स को, यदि उनमें खतरनाक क्षमताएं नहीं हैं, व्यवसायों, डेवलपरों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सार्वजनिक संसाधन मानती है। साथ ही, वह अत्यधिक सक्षम मॉडल्स के दुरुपयोग, सार्वजनिक भार वापस न ले पाने और चीनी AI विकास से जुड़े रणनीतिक जोखिमों को गंभीर मानती है।

अब आगे की चर्चा इस बात पर होगी कि उन्नत चिप्स, मॉडल-डिस्टिलेशन और सुरक्षा परीक्षण के लिए सरकारें कौन-से ठोस नियम बनाती हैं। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि वैश्विक परीक्षण व्यवस्था में अलग-अलग देश कैसे शामिल होंगे और ओपन-वेट्स मॉडल्स के स्थानीय संशोधनों की जिम्मेदारी किस पर तय होगी। फिलहाल Anthropic का संदेश प्रतिबंध का नहीं, बल्कि लक्षित नियंत्रण और क्षमता-आधारित सुरक्षा जांच का है।

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