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विदेशी ग्राहक का भुगतान आया: RBI प्रयोजन कोड काम देखकर चुनें

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय| 3
विदेशी ग्राहक का भुगतान आया: RBI प्रयोजन कोड काम देखकर चुनें

P0802 हर विदेशी ग्राहक से आए भुगतान का सार्वभौमिक प्रयोजन कोड नहीं है। इसे तभी चुनें जब भुगतान वास्तव में सॉफ्टवेयर कार्यान्वयन या परामर्श के लिए हो और सेवा SOFTEX में शामिल श्रेणी की न हो। डेटा प्रसंस्करण, विज्ञापन, प्रबंधन परामर्श और दृश्य-श्रव्य काम के लिए अलग कोड हो सकते हैं।

प्रयोजन कोड और GST में सेवा-निर्यात का दर्जा दो अलग निर्णय हैं। पहला बैंक को प्राप्ति की प्रकृति बताता है; दूसरा आपूर्तिकर्ता, ग्राहक, आपूर्ति-स्थान, भुगतान के माध्यम और दोनों पक्षों के कानूनी संबंध पर निर्भर करता है। सही कोड भरना इन GST शर्तों का विकल्प नहीं है।

पदनाम नहीं, भुगतान के बदले किया गया काम देखें

RBI की प्रयोजन-कोड सूची कंप्यूटर और सूचना सेवाओं, अन्य कारोबारी सेवाओं तथा व्यक्तिगत, सांस्कृतिक और मनोरंजन सेवाओं को अलग वर्गों में रखती है। इसलिए “फ्रीलांस सेवा” या “परामर्श शुल्क” जैसा सामान्य चालान-विवरण सही कोड तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

  • P0802 — सॉफ्टवेयर कार्यान्वयन या परामर्श: ग्राहक के सॉफ्टवेयर का कार्यान्वयन या उससे जुड़ा परामर्श इसका संभावित दायरा है। आधिकारिक विवरण में SOFTEX के अंतर्गत आने वाले काम को इससे बाहर रखा गया है। केवल कंप्यूटर पर काम करने या कोड लिखने से निष्कर्ष न निकालें।
  • P0803 — डेटाबेस और डेटा प्रसंस्करण: भुगतान का मुख्य परिणाम डेटा का प्रसंस्करण या डेटाबेस-संबंधी सेवा है तो यह श्रेणी P0802 से अधिक निकट हो सकती है। साथ में विश्लेषण या सलाह दी गई हो तो अनुबंध की प्रमुख सेवा देखें।
  • P1006 — व्यवसाय और प्रबंधन परामर्श: कारोबारी रणनीति, प्रबंधन और जनसंपर्क संबंधी परामर्श इस श्रेणी में आता है। काम के दौरान प्रस्तुति, स्प्रेडशीट या कोई डिजिटल उपकरण बनाना उसे सॉफ्टवेयर सेवा नहीं बना देता।
  • P1007 — विज्ञापन या व्यापार-मेला सेवा: मौजूदा बैंक सूची में यह विज्ञापन और व्यापार-मेला सेवा के लिए दिखता है। बाजार अनुसंधान को बिना जाँच इसी कोड में न रखें।
  • P1101 — दृश्य-श्रव्य और संबंधित सेवा: चलचित्र या वीडियो निर्माण, वितरण और प्रदर्शन से जुड़ा काम इस श्रेणी के निकट हो सकता है। सामान्य ग्राफिक डिजाइन या हर रचनात्मक सुपुर्दगी को अपने-आप इसमें रखना उचित नहीं है।

पुरानी और मौजूदा सूचियों के शब्दों में अंतर भी मिल सकता है। उदाहरण के लिए, पुराना RBI अनुलग्नक P1007 में बाजार अनुसंधान और जनमत सर्वेक्षण भी लिखता है, जबकि IDFC FIRST Bank की आवक प्रेषण सूची P1007 को विज्ञापन और व्यापार-मेला सेवा बताती है तथा बाजार अनुसंधान और जनमत सर्वेक्षण को P1014 में रखती है। इसलिए पुराने इंटरनेट लेख या पीडीएफ से कोड उठाने के बजाय अपने बैंक की वर्तमान चयन-सूची और विवरण की पुष्टि करें।

कोड तय करने के चार चरण

  1. मुख्य सुपुर्दगी पहचानें: ग्राहक ने किस परिणाम के लिए भुगतान किया—सॉफ्टवेयर कार्यान्वयन, डेटा प्रसंस्करण, विज्ञापन, प्रबंधन सलाह या दृश्य-श्रव्य उत्पादन?
  2. अनुबंध और चालान मिलाएँ: दोनों में सेवा का विशिष्ट और समान वर्णन रखें। केवल सुविधाजनक कोड पाने के लिए काम का नया नाम न गढ़ें।
  3. निकटवर्ती कोडों का पूरा दायरा पढ़ें: खास तौर पर P0802 के साथ SOFTEX की सीमा और विज्ञापन तथा बाजार अनुसंधान के अलग वर्गीकरण को देखें।
  4. बैंक से लिखित पुष्टि माँगें: अनुबंध, चालान, मुद्रा, रकम, भुगतानकर्ता और प्रस्तावित कोड देकर बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग से पूछें कि उपलब्ध वर्तमान सूची में कौन-सा कोड स्वीकार होगा। भुगतान मंच ने पहले कोई कोड लगाया हो तो बैंक के प्राप्ति-प्रमाण में दर्ज कोड भी जाँचें।

मिश्रित अनुबंध में एक ही उत्तर हमेशा उपयुक्त नहीं होगा। यदि सॉफ्टवेयर कार्यान्वयन और प्रबंधन परामर्श की अलग कीमतें हैं, तो उन्हें चालान में अलग मदों के रूप में दिखाएँ और बैंक से पूछें कि एक प्रमुख कोड पर्याप्त है या प्राप्ति को अलग वर्गीकृत करना होगा।

GST में सेवा-निर्यात की पाँचों शर्तें पूरी होनी चाहिए

IGST अधिनियम की धारा 2(6) पाँच संयुक्त शर्तें देती है: सेवा का आपूर्तिकर्ता भारत में हो; प्राप्तकर्ता भारत से बाहर हो; आपूर्ति-स्थान भारत से बाहर हो; भुगतान परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में, अथवा RBI की अनुमति वाले मामलों में INR में, प्राप्त हो; और आपूर्तिकर्ता तथा प्राप्तकर्ता एक ही व्यक्ति के केवल अलग प्रतिष्ठान न हों। इनमें से कोई शर्त अधूरी हो तो सही प्रयोजन कोड अकेले सेवा को निर्यात नहीं बनाता।

इसलिए विदेशी कंपनी का नाम और विदेशी मुद्रा में बना चालान निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। अनुबंध में वास्तविक प्राप्तकर्ता कौन है, सेवा किस प्रतिष्ठान को दी गई और भुगतान किसने किया—इन तथ्यों को बैंक तथा GST दस्तावेजों में संगत रूप से दिखना चाहिए।

आपूर्ति-स्थान केवल विदेशी बिलिंग पता नहीं है

जब आपूर्तिकर्ता या प्राप्तकर्ता में से कोई भारत से बाहर हो, तो IGST अधिनियम की धारा 13 लागू होती है। इसका सामान्य नियम प्राप्तकर्ता का स्थान है, लेकिन वस्तु या व्यक्ति की भौतिक उपस्थिति, अचल संपत्ति, कार्यक्रम और मध्यस्थ सेवा जैसी विशिष्ट श्रेणियों के अलग नियम हैं।

मसलन, केवल यह कहना कि ग्राहक विदेश में है, मध्यस्थता का प्रश्न हल नहीं करता। यदि फ्रीलांसर अपनी सेवा अपने खाते पर देने के बजाय किसी अन्य मुख्य आपूर्ति को केवल व्यवस्थित या सुगम करता है, तो तथ्य और अनुबंध अलग परिणाम दे सकते हैं।

CBIC का डेटा होस्टिंग स्पष्टीकरण इस भेद का सीमित उदाहरण देता है: उसमें वर्णित व्यवस्था में भारतीय प्रदाता को मध्यस्थ या अचल संपत्ति से सीधे जुड़ा सेवा-प्रदाता नहीं माना गया और धारा 13(2) के अनुसार विदेशी ग्राहक का स्थान अपनाया गया। परिपत्र ने साथ ही स्पष्ट किया कि सेवा-निर्यात के लिए धारा 2(6) की शेष शर्तें भी पूरी होनी चाहिए; यह निष्कर्ष हर डेटा या तकनीकी अनुबंध पर स्वतः लागू नहीं होता।

बैंक और GST अभिलेख अलग रखें, तथ्य समान

बैंक के लिए अनुबंध या कार्यादेश, विशिष्ट सेवा-विवरण वाला चालान, ग्राहक और भुगतानकर्ता का विवरण, आवक प्रेषण सूचना तथा बैंक द्वारा स्वीकार किया गया प्रयोजन कोड सुरक्षित रखें। मंच, ग्राहक और वास्तविक भुगतानकर्ता के नाम अलग हों तो उनके संबंध का उपलब्ध प्रमाण भी रखें।

GST अभिलेख में इन्हीं दस्तावेजों के साथ प्राप्तकर्ता का विदेशी स्थान, लागू आपूर्ति-स्थान नियम, भुगतान-प्राप्ति और दोनों पक्षों की कानूनी पहचान जाँचें। व्यावहारिक क्रम यही है: वास्तविक काम से वर्तमान प्रयोजन कोड मिलाएँ, बैंक से उसकी पुष्टि कराएँ और उसके बाद अलग वैधानिक परीक्षण से सेवा-निर्यात तय करें।

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