दूरस्थ कार्य

फ्रीलांस कॉपीराइट ग्राहक को देना है? देश और अवधि भी लिखें

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|6 मिनट पढ़ने का समय| 1
फ्रीलांस कॉपीराइट ग्राहक को देना है? देश और अवधि भी लिखें

ग्राहक को फ्रीलांस काम का कॉपीराइट देना है तो केवल भुगतान लेना या अंतिम फ़ाइल सौंपना स्पष्ट हस्तांतरण नहीं है। लिखित और हस्ताक्षरित अनुबंध में काम की पहचान, सौंपे गए अधिकार, अवधि, भौगोलिक क्षेत्र तथा रॉयल्टी और अन्य प्रतिफल दर्ज करें।

अवधि न लिखने पर हस्तांतरण पाँच वर्ष का माना जाता है और क्षेत्र न बताने पर वह भारत तक सीमित माना जाता है। इसलिए ग्राहक को विश्वभर में या कॉपीराइट की पूरी वैधानिक अवधि तक अधिकार चाहिए तो अनुबंध में देश अथवा क्षेत्र और समय-सीमा साफ लिखना आवश्यक है।

पहले पता करें कि अधिकार किसके पास हैं

हस्तांतरण वही व्यक्ति कर सकता है जिसके पास संबंधित अधिकार हैं। IP India की आधिकारिक जानकारी बताती है कि सामान्यतः लेखक पहला कॉपीराइट स्वामी होता है, अधिकार रचना बनते ही स्वतः अस्तित्व में आता है और पंजीकरण उसका अनिवार्य आधार नहीं है।

फिर भी हर भुगतान वाला काम इस सामान्य नियम में नहीं आता। रोजगार के दौरान सेवा-अनुबंध के तहत बनाया गया काम तथा किसी व्यक्ति के कहने पर प्रतिफल के बदले तैयार किए गए फोटो, पेंटिंग, पोर्ट्रेट, उत्कीर्णन और सिनेमैटोग्राफ फिल्म जैसी श्रेणियाँ अलग स्वामित्व नियमों के अधीन हो सकती हैं। इसलिए अनुबंध में रचनाकार की भूमिका, काम की श्रेणी और पहले दिए गए किसी लाइसेंस या हस्तांतरण का विवरण देखें।

यदि काम में स्टॉक सामग्री, फॉन्ट, मुक्त स्रोत घटक, ग्राहक की सामग्री या किसी सहयोगी का योगदान शामिल है, तो फ्रीलांसर उन हिस्सों के अधिकार ग्राहक को नहीं दे सकता जो उसके पास हैं ही नहीं। ऐसे हिस्सों को अलग सूची में रखकर उनके लागू लाइसेंस या उपयोग की शर्तें बतानी चाहिए।

हस्तांतरण और लाइसेंस में सही विकल्प चुनें

हस्तांतरण में चुने गए अधिकारों का स्वामित्व ग्राहक को चला जाता है। लाइसेंस ग्राहक को निर्धारित उपयोग की अनुमति देता है, जबकि स्वामित्व रचनाकार के पास रह सकता है। ग्राहक को वास्तव में किन उपयोगों की जरूरत है, इसी आधार पर विकल्प चुनें।

कॉपीराइट अधिनियम की धारा 18 पूर्ण या आंशिक और शर्तों के अधीन हस्तांतरण की अनुमति देती है; सौंपे गए अधिकारों के लिए ग्राहक और बचे हुए अधिकारों के लिए हस्तांतरणकर्ता स्वामी माने जाते हैं। इसलिए “सभी अधिकार” जैसे व्यापक शब्द के बजाय प्रतिलिपि, प्रकाशन, वितरण, जनता तक संचार, अनुवाद और रूपांतरण जैसे आवश्यक उपयोग अलग-अलग बताना अधिक स्पष्ट है।

उदाहरण के लिए, ग्राहक वेबसाइट और विज्ञापन में सामग्री इस्तेमाल करना चाहता है, जबकि लेखक उसे अपने पोर्टफोलियो में दिखाना चाहता है। अनुबंध ग्राहक को आवश्यक व्यावसायिक अधिकार दे सकता है और लेखक के लिए सीमित पोर्टफोलियो अनुमति सुरक्षित रख सकता है। भविष्य में बनने वाले काम का हस्तांतरण उसके अस्तित्व में आने पर ही प्रभावी होता है, इसलिए अधूरे और अंतिम काम की स्थिति भी लिखें।

अनुबंध में पाँच बातें अलग-अलग दर्ज करें

फ्रीलांस डिलिवरेबल से मिलान करते हुए काम, अधिकार, अवधि, क्षेत्र और प्रतिफल के अलग अनुबंध खंडों की जाँच

कॉपीराइट अधिनियम की धारा 19 के अनुसार हस्तांतरण लिखित और हस्तांतरणकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि से हस्ताक्षरित होना चाहिए। उसमें काम, सौंपे गए अधिकार, अवधि, क्षेत्र तथा देय रॉयल्टी और अन्य प्रतिफल का उल्लेख होना चाहिए। किसी सौंपे गए अधिकार का एक वर्ष में प्रयोग न होने पर वह अधिकार समाप्त माना जा सकता है, जब तक अनुबंध में इसके विपरीत व्यवस्था न हो।

  1. काम की पहचान: परियोजना, डिलिवरेबल, भाषा, फ़ाइल नाम और अंतिम स्वीकृत संस्करण लिखें। स्रोत फ़ाइलों, अंतिम निर्यातित फ़ाइलों और अस्वीकृत मसौदों को अलग करें।
  2. सौंपे गए अधिकार: ग्राहक कौन-से उपयोग कर सकता है, उन्हें स्पष्ट सूची में रखें। यह भी बताएं कि हस्तांतरण पूर्ण है या कुछ अधिकार रचनाकार के पास रहेंगे।
  3. अवधि: वर्षों की संख्या, निश्चित अंतिम तारीख या कॉपीराइट की पूरी वैधानिक अवधि में से इच्छित सीमा लिखें। अवधि कब शुरू होगी—हस्ताक्षर, डिलीवरी या भुगतान पर—यह भी तय करें।
  4. क्षेत्र: भारत, चुने हुए देशों की सूची या विश्वभर जैसी निश्चित सीमा दें। “सभी बाजार” जैसे शब्द से यह साफ नहीं होता कि किन देशों की बात है।
  5. प्रतिफल: एकमुश्त शुल्क, रॉयल्टी या दोनों की राशि अथवा गणना और भुगतान की तारीख लिखें। यदि परियोजना शुल्क ही हस्तांतरण का प्रतिफल है तो इसे सीधे दर्ज करें।

अधिकारों को पूरा भुगतान मिलने के बाद प्रभावी करना हो तो प्रभावी होने की शर्त स्पष्ट लिखें। भुगतान से पहले ग्राहक को सीमित उपयोग चाहिए तो उस अंतरिम अवधि के लिए अलग अनुमति तय की जा सकती है।

देश और अवधि छूटने का परिणाम

एक अनुबंध में भारत और दो वर्ष की सीमा तथा दूसरे में स्पष्ट विश्वव्यापी उपयोग की तुलना

एक काल्पनिक उदाहरण लें: भारतीय फ्रीलांस लेखक ने ग्राहक को लेख का कॉपीराइट सौंपने वाला हस्ताक्षरित दस्तावेज दिया, लेकिन उसमें अवधि और क्षेत्र नहीं लिखा। धारा 19 की वैधानिक धारणाओं के कारण ग्राहक यह नहीं मान सकता कि उसे अपने-आप स्थायी और विश्वव्यापी अधिकार मिल गए; अवधि पाँच वर्ष और क्षेत्र भारत माना जाएगा।

यदि ग्राहक उसी लेख को भारत, अमेरिका और सिंगापुर में दस वर्ष तक इस्तेमाल करना चाहता है, तो उन देशों और दस वर्ष की अवधि को अनुबंध में लिखना चाहिए। यदि उपयोग वास्तव में भारत में दो वर्ष के अभियान तक है, तो वही सीमा दर्ज करने से बाकी अवधि और क्षेत्रों के अधिकार लेखक के पास रह सकते हैं। विश्वव्यापी उपयोग वाले सौदे में दूसरे देशों के कानूनों का प्रश्न भी उठ सकता है, जिसके लिए संबंधित क्षेत्र की कानूनी समीक्षा जरूरी हो सकती है।

अनुबंध का नाम अकेले दायरा तय नहीं करता। Saregama India बनाम Suresh Jindal के निर्णय में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने माना कि हस्तांतरण विषयवस्तु और अवधि में सीमित हो सकता है तथा उसका वास्तविक विस्तार अनुबंध की शर्तों से निर्धारित किया जाता है।

हस्ताक्षर से पहले खंड-दर-खंड जाँच

  • दोनों पक्षों के पूरे कानूनी नाम और पते लिखे गए हैं।
  • हस्तांतरणकर्ता ने संबंधित अधिकारों का स्वामी होने की पुष्टि की है।
  • हर काम और अंतिम संस्करण की अलग पहचान मौजूद है।
  • दिए गए और सुरक्षित रखे गए अधिकार अलग-अलग लिखे हैं।
  • प्रभावी तारीख, अवधि और भौगोलिक क्षेत्र निश्चित हैं।
  • रॉयल्टी और अन्य प्रतिफल, भुगतान की तारीख तथा लागू कर-व्यवस्था दर्ज है।
  • पोर्टफोलियो उपयोग और तीसरे पक्ष की सामग्री जैसे अपवाद सूचीबद्ध हैं।
  • एक वर्ष में अधिकार का प्रयोग न होने, भुगतान न मिलने और अवधि समाप्त होने के परिणाम तय हैं।
  • हस्तांतरणकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर और तारीख मौजूद हैं तथा दोनों पक्षों के पास अंतिम प्रति है।

अंतिम अनुबंध से पाँच उत्तर तुरंत मिलने चाहिए: कौन-सा काम सौंपा जा रहा है, कौन-से अधिकार जा रहे हैं, वे कब से और कितने समय के लिए मिलेंगे, किन देशों में लागू होंगे और किस प्रतिफल के बदले दिए जा रहे हैं। इनमें से कोई उत्तर अनुमान पर निर्भर हो तो हस्ताक्षर से पहले उस खंड को दोबारा लिखना चाहिए। जटिल स्वामित्व, कई रचनाकारों या अंतरराष्ट्रीय उपयोग वाले सौदे में भारतीय कॉपीराइट वकील से मसौदे की समीक्षा कराना उचित है।

साझा करें:

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

Web3, AI और क्रिप्टो की नवीनतम खबरें सीधे अपने इनबॉक्स में पाएँ।

0