नकली शोध संस्थान के पीछे रूसी अभियान—चोरी के लेखों ने उसका भेद खोला

OpenAI की आधिकारिक जाँच के अनुसार, कंपनी ने 25 अगस्त 2026 को रूस से संचालित होने की अत्यधिक संभावना वाले ChatGPT खातों के एक समूह को बंद करने की जानकारी दी। ये खाते खुद को इज़राइल स्थित विशेषज्ञ समुदाय बताने वाले International Burke Institute (IBI) का प्रचार कर रहे थे और रूस में प्रतिबंधित पहुँच के लिए VPN का सहारा ले रहे थे।
IBI ने वास्तविक अकादमिक सामग्री की नकल, गलत लेखक श्रेय, अपुष्ट विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित संस्थाओं के कथित सहयोग से विश्वसनीयता का आवरण बनाया था। ChatGPT का इस्तेमाल मुख्यतः प्रचार सामग्री और टिप्पणियाँ तैयार करने में हुआ; चोरी के लेखों, असंभव विशेषज्ञ-सूची और अस्वाभाविक भाषा ने उस आवरण की कमजोरियाँ उजागर कर दीं।
ChatGPT ने संस्थागत मुखौटे का प्रचार बढ़ाया
अभियान के संचालक रूसी भाषा में निर्देश देकर मुख्यतः अंग्रेजी प्रचार सामग्री बनवा रहे थे। उन्होंने मॉडल से ऐसे भाषाई संकेत हटाने को भी कहा जो उनकी रूसी पृष्ठभूमि प्रकट कर सकते थे। तैयार सामग्री X, LinkedIn, Facebook, Substack और Telegram पर प्रकाशित होकर पाठकों को IBI के लेखों तक ले जाती थी।
कुछ खाते संस्था की पहचान से चल रहे थे, जबकि अन्य सामान्य उपयोगकर्ताओं जैसे दिखते थे और उसकी सामग्री साझा करते थे। वास्तविक Substack पोस्ट के लिए तैयार उत्तरों में भी पाठकों से IBI का चैनल अपनाने को कहा जाता था। अलग-अलग देशों पर केंद्रित Telegram चैनलों के लिए पहचान और प्रचार सामग्री बनाई गई, फिर उनकी गतिविधि का सार रूसी में माँगा गया।
IBI की वेबसाइट पर मिले नकल किए गए अकादमिक लेख ChatGPT से तैयार नहीं हुए थे। AI का मुख्य काम पहले से मौजूद सामग्री को अलग-अलग मंचों और भाषाओं के अनुकूल प्रचार में बदलना था। इसलिए यह केवल मशीन से भ्रामक लेख लिखवाने का मामला नहीं था, बल्कि पहले से तैयार संस्थागत पहचान को व्यापक वितरण देने की कोशिश थी।
चोरी के शोध ने विशेषज्ञता के दावे को कमजोर किया

IBI से जुड़ी वेबसाइट फरवरी 2025 में पंजीकृत हुई और उसने स्वयं को इज़राइल स्थित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ समुदाय के रूप में पेश किया। सितंबर 2025 से मई 2026 के बीच प्रकाशित और विशेषज्ञ परिचयों से जुड़े 36 लेखों की जाँच में 34 दूसरी वेबसाइटों से नकल किए हुए मिले। कुछ लेख वर्षों पुराने थे और कई को मूल लेखक के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से प्रकाशित किया गया था।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित एक लेख को नॉटिंघम विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर के नाम से दिखाया गया, जबकि उसके मूल लेखक ब्रैडफर्ड विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर Yunas Samad थे। एक अन्य मामले में अमेरिकी आव्रजन शोध संस्था की सामग्री को खाद्य रसायन पढ़ाने वाली ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर की तस्वीर और पहचान से जोड़ दिया गया। मूल शोध की भाषा कायम रखते हुए स्रोत और लेखक बदलने से IBI की अपनी विशेषज्ञता का भ्रम पैदा किया गया।
विशेषज्ञ सूची में Francis Fukuyama और Noam Chomsky जैसे प्रसिद्ध नाम भी दिखाई देते थे। कुछ परिचय ऐसे लोगों के थे जिनकी मृत्यु वेबसाइट बनने से पहले हो चुकी थी। इससे स्पष्ट हुआ कि किसी वास्तविक व्यक्ति का नाम, तस्वीर या प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय का उल्लेख अपने आप उस व्यक्ति का संस्था से संबंध सिद्ध नहीं करता।
साझेदारों के नाम थे, पर संबंध का प्रमाण नहीं

IBI की वेबसाइट पर UN और UNICEF सहित प्रतिष्ठित संस्थाओं को साझेदारों की तरह प्रदर्शित किया गया था। Le Monde की स्वतंत्र पड़ताल में UNICEF ने कहा कि IBI उसका स्वीकृत साझेदार नहीं था और दोनों के संयुक्त कार्य का कोई अभिलेख नहीं मिला।
प्रतिष्ठित संस्था का चिह्न या प्रसिद्ध विशेषज्ञ का परिचय तभी संबद्धता का मजबूत प्रमाण बनता है, जब दूसरे पक्ष के आधिकारिक अभिलेख में भी वही संबंध दर्ज हो। IBI के मामले में नकल किए गए लेख, विषय से मेल न खाने वाली विशेषज्ञता और स्वतंत्र पुष्टि का अभाव परस्पर जुड़े संकेत थे।
वेबसाइट का प्रमुख प्रकाशन एक कथित संप्रभुता सूचकांक था, जिसमें रूस को अनुकूल और कई पश्चिमी देशों को प्रतिकूल रूप में पेश किया गया था। प्रचार खाते पाठकों को इसी तरह की सामग्री तक ले जा रहे थे। शोध संस्था जैसी बाहरी पहचान ने राजनीतिक संदेश को सीधे प्रचार की तुलना में अधिक विश्वसनीय दिखाने का आधार दिया।
भाषाई चूक और अभिलेखों के मिलान ने भेद खोला
संचालक मॉडल से अपनी पृष्ठभूमि के संकेत हटाने को कह रहे थे, लेकिन वेबसाइट की दूसरी सामग्री में अनुवाद की असामान्यताएँ बची रहीं। जर्मनी के उस समय के राजनीतिक गठबंधन के लिए प्रचलित ‘यातायात-बत्ती गठबंधन’ के बजाय एक लेख में ‘स्वेतोफोर गठबंधन’ लिखा था। ‘स्वेतोफोर’ रूसी सहित कई स्लाव भाषाओं में यातायात संकेत के लिए प्रयुक्त शब्द है, लेकिन अंग्रेजी या जर्मन राजनीतिक लेखन में यह अस्वाभाविक है।
अमेरिकी समाचार माध्यम जैसा दिखने वाले एक Telegram खाते की परिचय-पंक्ति में भी असहज अंग्रेजी थी। ये चूक अकेले किसी संचालक की राष्ट्रीयता सिद्ध नहीं करतीं। रूसी निर्देशों, VPN के प्रयोग, रूसी भाषा में माँगे गए गतिविधि-सार और समान बहुभाषी वितरण के साथ मिलकर वे जाँच के अन्य प्रमाणों से मेल खाती थीं।
इस मामले में संदिग्ध शोध संस्था की पहचान किसी एक गलती से नहीं हुई। चार प्रकार के संकेत साथ दिखाई दिए:
- प्रकाशित लेखों का पुरानी अकादमिक सामग्री से व्यापक मेल, लेकिन लेखक और स्रोत में बदलाव;
- विशेषज्ञों की घोषित विशेषज्ञता और उनके वास्तविक संस्थागत परिचय के बीच असंगति;
- साझेदारों के चिह्न और नाम, जिनकी पुष्टि संबंधित संस्थाओं के अभिलेखों में नहीं हुई;
- अलग-अलग भाषाओं की सामग्री में ऐसे अनुवाद, जो संचालन की छिपाई गई भाषा की ओर संकेत करते थे।
अभियान की तत्काल पहुँच सीमित आँकी गई। सामान्य सामाजिक मंचों पर पोस्टों को कम दृश्य मिले और IBI के आधिकारिक खातों के ग्राहक भी कम थे। कुछ Telegram चैनलों के अनुयायियों की संख्या 10,000 से 20,000 के बीच थी, लेकिन वेबसाइट, विशेषज्ञ परिचय, पुनर्प्रकाशित शोध और अपना सूचकांक आगे बड़े प्रचार अभियान का आधार बन सकते थे।
खाते बंद हुए, संगठनात्मक कड़ियाँ अब भी अस्पष्ट
OpenAI ने संबंधित ChatGPT खातों पर कार्रवाई कर दी है, लेकिन IBI से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की भूमिका सार्वजनिक रूप से निर्धारित नहीं हुई। ऑनलाइन संकेतों से पता चलता है कि इज़राइल में कुछ वास्तविक लोग IBI का प्रतिनिधित्व कर सकते थे या उससे जुड़ी प्रस्तुतियों में शामिल हुए थे, पर उपलब्ध जाँच उनके, संस्था और रूस स्थित संचालकों के बीच सटीक संबंध तय नहीं करती।
अभी पुष्ट निष्कर्ष यह है कि रूस से संचालित होने की अत्यधिक संभावना वाले खातों ने IBI के प्रचार के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया और अपनी उत्पत्ति छिपाने की कोशिश की। नकल किया गया शोध, गलत लेखक श्रेय, अपुष्ट विशेषज्ञ, निराधार साझेदारी प्रदर्शन और भाषाई चूक उसकी बनाई हुई विश्वसनीयता को कमजोर करने वाले प्रमाण बने। अभियान का वित्तपोषण और सभी संचालकों की संगठनात्मक कड़ी अब भी सार्वजनिक रूप से अस्पष्ट है।
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