
Masked Aadhaar डाउनलोड करें—साझा कॉपी में आठ अंक छिपे रहें

UIDAI के ई-आधार निर्देश के अनुसार Masked Aadhaar में आधार संख्या के शुरुआती आठ अंक छिपे रहते हैं और केवल अंतिम चार दिखाई देते हैं। इसे ई-आधार के रूप में डाउनलोड किया जाता है। माय आधार सेवा पृष्ठ पर यह डाउनलोड मुफ्त है और इसके लिए पंजीकृत मोबाइल पर आया ओटीपी चाहिए।
माय आधार में Masked Aadhaar डाउनलोड सेवा चुनें, उपलब्ध विकल्प के अनुसार आधार संख्या, नामांकन संख्या या VID दर्ज करें और ओटीपी से अनुरोध पूरा करें। मिली हुई पीडीएफ़ खोलकर छिपे अंक जाँचें; पहचान की प्रति साझा करनी हो तो इसी फ़ाइल को चुनें। उसका क्यूआर कोड प्राप्तकर्ता को पहचान विवरण जाँचने देता है, जबकि समर्थित प्रमाणीकरण में VID संख्या दर्ज करने का अलग विकल्प है।
आधिकारिक रास्ते से फ़ाइल कैसे लें
अपने ब्राउज़र में UIDAI की वेबसाइट खोलकर माय आधार पृष्ठ पर जाएँ। वहाँ Masked Aadhaar डाउनलोड सेवा पहचानें। साधारण ई-आधार डाउनलोड और मास्क वाली प्रति को एक जैसा न मानें: साझा करने से पहले प्राप्त फ़ाइल में संख्या का दिखाई देने वाला हिस्सा देखना जरूरी है।
- डाउनलोड सेवा खोलें और पृष्ठ पर उपलब्ध विकल्प के अनुसार आधार संख्या, नामांकन संख्या या VID दर्ज करें। जिस विकल्प को चुनें, उसी से संबंधित जानकारी भरें।
- यदि डाउनलोड पृष्ठ पर मास्क वाली प्रति चुनने का अलग विकल्प दिखाई दे, उसे सक्रिय करें। अनुरोध भेजने से पहले अपना चयन फिर देखें।
- आधार से जुड़े मोबाइल पर आया ओटीपी आधिकारिक पृष्ठ में भरें और पीडीएफ़ डाउनलोड करें। ओटीपी फ़ाइल माँगने वाले व्यक्ति या संस्था को न भेजें।
- पीडीएफ़ खोलकर आधार संख्या देखें। फ़ाइल के नाम या पहले से सहेजी हुई किसी प्रति के आधार पर यह अनुमान न लगाएँ कि वर्तमान डाउनलोड मास्क वाला ही है।
यदि पंजीकृत मोबाइल तक पहुँच नहीं है, तो मोबाइल ओटीपी वाला यह डाउनलोड क्रम पूरा नहीं होगा। ऐसी स्थिति में किसी तीसरे पक्ष की डाउनलोड वेबसाइट पर आधार संख्या भरना समाधान नहीं है। पहले आधार से जुड़े मोबाइल की स्थिति ठीक करें, ताकि अनुरोध अपने नियंत्रण में पूरा हो।
पीडीएफ़ खोलने का कूटशब्द

ई-आधार कूटशब्द से सुरक्षित पीडीएफ़ है। उसका कूटशब्द आधार में दर्ज नाम के पहले चार अक्षर बड़े अंग्रेज़ी अक्षरों में लिखकर उनके बाद जन्म का वर्ष जोड़ने से बनता है। आधिकारिक उदाहरण में SURESH KUMAR और जन्म-वर्ष 1990 के लिए कूटशब्द SURE1990 है।
नाम की वही अंग्रेज़ी वर्तनी लें जो आधार रिकॉर्ड में दर्ज है। छोटे नाम या विराम चिह्न वाले नाम के लिए अपनी ओर से अक्षर न जोड़ें: दिए गए उदाहरणों में RIA और 1990 का कूटशब्द RIA1990 है, जबकि P. KUMAR के लिए P.KU1990। इसीलिए कूटशब्द बनाते समय दर्ज नाम के आरंभ को ठीक उसी रूप में देखें।
कूटशब्द फ़ाइल खोलने के काम आता है; वह फ़ाइल खुलने के बाद उसके बाकी पहचान विवरण नहीं छिपाता। नाम, पता, तस्वीर और क्यूआर कोड पीडीएफ़ में मौजूद रह सकते हैं। जिसे पीडीएफ़ पढ़नी होगी, उसके पास कूटशब्द भी पहुँचेगा, इसलिए केवल आधार संख्या मास्क होने के आधार पर पूरी फ़ाइल को निजी जानकारी से मुक्त न समझें।
क्यूआर कोड से पहचान कैसे जाँची जाती है

किसी पीडीएफ़ का खुल जाना उसकी प्रामाणिकता की जाँच नहीं है। UIDAI के क्यूआर रीडर निर्देश बताते हैं कि ई-आधार के सुरक्षित क्यूआर कोड में पहचान विवरण और तस्वीर होती है तथा उस पर UIDAI का डिजिटल हस्ताक्षर होता है। अधिकृत रीडर कोड पढ़कर हस्ताक्षर जाँचता है और उसमें दर्ज विवरण दिखाता है।
प्रति लेने वाला व्यक्ति आधार ऐप, आधार क्यूआर स्कैनर ऐप या UIDAI की विंडोज़ रीडर सुविधा से कोड पढ़ सकता है। स्कैन से मिले नाम, तस्वीर और अन्य प्रासंगिक विवरण को पहचान प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति तथा आवश्यक रिकॉर्ड से मिलाएँ। हस्ताक्षर की सफल जाँच से कोड में दर्ज जानकारी की प्रामाणिकता जाँची जाती है; सामने मौजूद व्यक्ति से उसका मेल देखना अलग कदम है।
यदि कोड पहली कोशिश में न पढ़ा जाए, तो पीडीएफ़ में क्यूआर क्षेत्र पूरा और साफ़ होने तथा सही रीडर इस्तेमाल होने की जाँच करें। कटा या धुँधला कोड पढ़ने में दिक्कत दे सकता है। फ़ाइल आगे भेजने से पहले उसका क्यूआर क्षेत्र देख लेने पर प्राप्तकर्ता को स्पष्ट प्रति मिलती है।
साझा प्रति में क्या छिपता है, क्या दिखता है
मास्क आधार संख्या के शुरुआती हिस्से पर लागू होता है, पूरी पहचान पर नहीं। नाम, तस्वीर, जन्म संबंधी विवरण और पता ई-आधार में रह सकते हैं; सुरक्षित क्यूआर कोड से भी संबंधित विवरण पढ़े जा सकते हैं। जिस संस्था को प्रति भेजते हैं, उसके पास पूरी आधार संख्या भले न पहुँचे, पहचान की दूसरी जानकारी पहुँच सकती है।
जहाँ पहचान की प्रति पर्याप्त है, वहाँ मास्क वाली पीडीएफ़ पूरी संख्या दिखाए बिना कॉपी देने का रास्ता है। भेजने से पहले प्राप्तकर्ता और माँग का उद्देश्य समझें, फिर खुली हुई फ़ाइल में वास्तव में क्या दिख रहा है, यह देखें। गलती से पुराने, बिना मास्क वाले डाउनलोड को चुन लेने पर शुरुआती अंक छिपाने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
यदि संस्था क्यूआर से विवरण सत्यापित करना चाहती है, तो उसे UIDAI के अनुकूल रीडर की जरूरत होगी; सामान्य क्यूआर ऐप से हस्ताक्षर की जाँच होने का अनुमान न लगाएँ। दूसरी ओर, किसी फॉर्म में संख्या दर्ज करने का खाना हो तो पीडीएफ़ भेजना और उस खाने में संख्या भरना अलग काम हैं। स्वीकार्य तरीका उस सेवा की प्रक्रिया से तय होगा।
पूरी संख्या माँगी जाए तो VID कब दें

VID आधार से जुड़ा अस्थायी, बदला जा सकने वाला सोलह अंकों का विकल्प है। समर्थित प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी में इसे आधार संख्या की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है; VID से मूल आधार संख्या निकाली नहीं जा सकती। माय आधार में VID बनाने की सेवा उपलब्ध है और उसके लिए पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी चाहिए।
VID आधार धारक स्वयं बनाता है। भूल जाने पर सक्रिय VID वापस पाया जा सकता है; नया VID बनाने पर पुराना निष्क्रिय हो जाता है। इसलिए जिस प्रक्रिया में VID देना है, उसमें सक्रिय संख्या ही भरें। पहचान की पीडीएफ़ माँगने वाली संस्था को केवल VID भेजना पर्याप्त होगा, ऐसा अनुमान न लगाएँ: इसका उपयोग उन प्रक्रियाओं में है जो इसे प्रमाणीकरण या ई-केवाईसी के लिए स्वीकार करती हैं।
यदि किसी फॉर्म में पूरी आधार संख्या माँगी जा रही है, तो देखें कि क्या उसी प्रक्रिया में VID स्वीकार है। यदि हाँ, संबंधित खाने में VID भरें; यदि संस्था मास्क वाली पहचान प्रति चाहती है, तो डाउनलोड की हुई पीडीएफ़ दें। दोनों विकल्प अलग जरूरतें पूरी करते हैं, इसलिए संस्था से स्वीकार्य रूप स्पष्ट करना गलत संख्या या गलत दस्तावेज़ देने से बचाता है।
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