LEMS पूरा हुआ: चंद्रमा के भूकंप अब वर्षों तक लगातार दर्ज हो सकेंगे

NASA ने 11 अगस्त 2026 को Lunar Environment Monitoring Station यानी LEMS का हार्डवेयर विकास और परीक्षण पूरा होने की घोषणा की। मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट स्थित Goddard Space Flight Center में बना यह उपकरण चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रकंपों और उल्कापिंडों के प्रभाव से पैदा कंपन दर्ज करने के लिए तैयार है।
इस उपलब्धि का अर्थ यह नहीं है कि LEMS को प्रक्षेपण की तारीख मिल गई है। उपकरण को अभी किसी Artemis मिशन में तैनाती का काम नहीं सौंपा गया; तब तक वह Goddard के स्वच्छ कक्ष में रखा रहेगा।
हार्डवेयर पूरा, उड़ान की योजना अधूरी

NASA की 11 अगस्त की घोषणा के अनुसार, LEMS के पूर्ण पेलोड और उसके घटकों ने पांच महीने तक पर्यावरणीय तथा परिचालन परीक्षणों का सामना किया। इनमें प्रक्षेपण के तेज कंपन, चंद्रमा तक यात्रा, विकिरण और दक्षिणी ध्रुव के तापमान जैसी परिस्थितियां शामिल थीं। यह भी जांचा गया कि अंतरिक्ष यात्री उपकरण को सुरक्षित रूप से संभाल और स्थापित कर सकेंगे।
इन परीक्षणों ने पेलोड की तकनीकी तैयारी प्रमाणित की है, उसकी उड़ान नहीं। किसी भावी Artemis मिशन में औपचारिक स्थान मिलने के बाद ही पेलोड एकीकरण, प्रक्षेपण, उतरने के क्षेत्र और तैनाती की समय-सारिणी स्पष्ट हो पाएगी। इसलिए तैयार हार्डवेयर को निकट भविष्य के निश्चित प्रक्षेपण के रूप में पढ़ना गलत होगा।
दो सिस्मोमीटर जमीन की सूक्ष्म गति मापेंगे

छोटे सूटकेस के आकार वाले LEMS में दो अत्यंत संवेदनशील सिस्मोमीटर हैं। University of Arizona का तकनीकी विवरण बताता है कि प्रत्येक सिस्मोमीटर में तीन अलग दिशाओं में लगाए गए संवेदक हैं, जो सतह की गति को तीन परस्पर लंबवत अक्षों पर मापेंगे। दोनों उपकरणों के संकेतों की तुलना से अवांछित शोर घटाने और आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
सिस्मोमीटर गहरे ज्वारीय चंद्रकंप, ठंडा होकर सिकुड़ते चंद्रमा से जुड़े उथले कंपन और सूक्ष्म उल्कापिंडों के प्रहार जैसी घटनाएं पकड़ने के लिए बनाए गए हैं। भूकंपीय तरंगें अलग पदार्थों से गुजरते समय जिस तरह गति और व्यवहार बदलती हैं, उससे वैज्ञानिक दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की पर्पटी और मैंटल के गुणों का अनुमान लगा सकेंगे। संवेदक पास की सतही गतिविधि, यहां तक कि अंतरिक्ष यात्रियों के कदमों से पैदा सूक्ष्म कंपन भी दर्ज कर सकते हैं।
Apollo के 13,000 संकेतों के बाद नया भौगोलिक संदर्भ
Apollo अंतरिक्ष यात्रियों ने 1969 से 1972 के बीच चंद्रमा के निकटवर्ती भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सिस्मोमीटर लगाए थे। वे 1977 तक चले और लगभग 13,000 चंद्रकंप तथा अन्य जमीनी कंपन दर्ज किए। इन आंकड़ों ने चंद्रमा के अंदरूनी संघटन की शुरुआती तस्वीर बनाने में मदद की, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर वैसी दीर्घकालीन प्रत्यक्ष निगरानी नहीं हुई।
LEMS का मुख्य अंतर उसका स्थान और स्वायत्त संचालन है। अंतरिक्ष यात्री इसे सतह पर स्थापित और सक्रिय करेंगे, लेकिन उसके बाद यह अपनी बिजली, तापमान, मापन कार्यक्रम और संचार स्वयं संभालेगा। इससे Apollo के भूमध्यरेखीय अभिलेख में दक्षिणी ध्रुव का नया क्षेत्रीय संदर्भ जुड़ सकता है।
फिर भी एक स्टेशन वैश्विक भूकंपीय जाल का विकल्प नहीं है। वह अकेले पूरे चंद्रमा पर हर घटना का सटीक स्थान निर्धारित नहीं कर सकेगा। उसका उपयोग दक्षिणी ध्रुव की क्षेत्रीय संरचना, कंपन के प्रकार और भावी सतही ढांचों के सामने संभावित भूकंपीय जोखिम समझने में होगा।
“वर्षों तक” का अर्थ अधिकतम दो वर्ष की योजना

NASA के LEMS मिशन परिचय में सतही संचालन की नियोजित अवधि तीन महीने से दो वर्ष तक दी गई है। उपकरण चंद्र दिन और रात दोनों में पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लगातार आंकड़े एकत्र करेगा तथा लगभग महीने में एक बार उन्हें पृथ्वी भेजेगा। शीर्षक में “वर्षों तक” इसी अधिकतम दो वर्षीय योजना को दर्शाता है, अनिश्चितकाल तक चलने वाली वेधशाला को नहीं।
लंबी निगरानी जरूरी है क्योंकि चंद्रकंप नियमित समय पर नहीं आते। छोटा अभियान दुर्लभ घटनाओं या अलग-अलग चंद्र दिन-रात चक्रों में बदलती पृष्ठभूमि को छोड़ सकता है। बड़ा अभिलेख मिलने पर घटनाओं की आवृत्ति, तीव्रता और स्रोतों के बीच अंतर अधिक भरोसे से समझा जा सकेगा।
लगभग दो पृथ्वी सप्ताह लंबी चंद्र रात इस निरंतरता की बड़ी तकनीकी चुनौती है। LEMS को बाहरी बिजली या रेडियोसमस्थानिक तापक के बिना रात में काम करने के लिए बनाया गया है। हल्की लचीली सौर सरणी दिन में ऊर्जा देगी, जबकि तापरोधन, कम ताप-चालकता वाली तारें और ताप नियंत्रक अंदरूनी तापमान संभालेंगे।
LEMS चंद्रमा पर कब पहुंचेगा
अभी इसकी कोई घोषित तारीख नहीं है। LEMS पहले Artemis III के लिए संभावित वैज्ञानिक पेलोड के रूप में चुना गया था, लेकिन Artemis कार्यक्रम की बदली हुई संरचना के बीच वह पुराना संबंध अब निश्चित उड़ान या प्रक्षेपण तिथि साबित नहीं करता। ताजा आधिकारिक स्थिति यही है कि उपकरण किसी Artemis मिशन में नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहा है।
अब अगला निर्णायक कदम LEMS को तैनात करने वाले मिशन का औपचारिक चयन होगा। फिलहाल दो बातें अलग रखनी जरूरी हैं: दो सिस्मोमीटरों वाला स्वायत्त पेलोड बनकर तैयार और परीक्षित है, लेकिन उसे चंद्र सतह तक ले जाने वाली उड़ान, उतरने का स्थान और तैनाती की तारीख तय नहीं हैं।
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