Infosys Springboard के 2.5 लाख नौकरी प्रस्ताव—नौकरी मिलने के बराबर नहीं

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय| 1
Infosys Springboard के 2.5 लाख नौकरी प्रस्ताव—नौकरी मिलने के बराबर नहीं

बेंगलुरु से जारी Infosys Foundation की 13 अक्टूबर 2026 की घोषणा के मुताबिक, Infosys Springboard Livelihood Program ने भारत में 2.5 लाख से अधिक नौकरी प्रस्ताव सक्षम किए हैं। फाउंडेशन ने इसे 2030 तक पाँच लाख रोजगार अवसर पैदा करने के अपने लक्ष्य का आधा पड़ाव बताया है। घोषित संख्या प्रस्तावों की है; इससे यह पता नहीं चलता कि कितने उम्मीदवारों ने प्रस्ताव स्वीकार किया और काम शुरू किया।

यह उपलब्धि Infosys Foundation के आजीविका कार्यक्रम की है, Infosys में सीधे नियुक्त हुए कर्मचारियों की गिनती की नहीं। कार्यक्रम प्रशिक्षण को साझेदार संगठनों के जरिए रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। विद्यार्थी या नौकरी खोजने वाले के लिए केंद्रीय फर्क यही है: प्रस्ताव मिलना भर्ती प्रक्रिया में प्रगति है, जबकि नौकरी शुरू करना उसका अगला परिणाम है।

आजीविका कार्यक्रम कहाँ काम करता है

Infosys Springboard के आजीविका कार्यक्रम में प्रशिक्षण से नौकरी प्रस्ताव तक के अलग चरण

कार्यक्रम का दायरा Infosys की अपनी भर्ती से बड़ा है। इसके कार्यान्वयन साझेदारों में Nirmaan Organization, ICT Academy, Magic Bus, Centum Foundation और Aga Khan Rural Support Programme (India) शामिल हैं। वे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के रास्तों पर काम करते हैं; इसलिए कार्यक्रम से जुड़ा नौकरी प्रस्ताव किसी एक कंपनी में पद मिलने का पर्याय नहीं बन जाता।

Infosys Springboard नाम डिजिटल शिक्षा मंच के लिए भी इस्तेमाल होता है, जो पाठ्यक्रमों तक पहुँच देता है। आजीविका कार्यक्रम उस व्यापक शिक्षण व्यवस्था से कौशल प्राप्त युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर केंद्रित है। मंच पर सीखने वालों, आजीविका कार्यक्रम में प्रशिक्षित लोगों और प्रस्ताव पाने वालों को एक ही समूह मानने से कार्यक्रम की प्रगति का गलत अर्थ निकल सकता है।

रोजगार का रास्ता अलग-अलग अवस्थाओं से गुजरता है: कौशल सीखना, किसी पद के लिए आवेदन करना, चयन के बाद प्रस्ताव पाना, उसे स्वीकार करना और काम शुरू करना। हर अवस्था में उम्मीदवारों की संख्या बदल सकती है। नई घोषणा इस पूरी श्रृंखला का हिसाब देने के बजाय प्रस्ताव सक्षम किए जाने का कुल बताती है।

प्रस्ताव पाने वालों की श्रेणियाँ क्या बताती हैं

Infosys Springboard के प्रस्तावों में शिक्षा और अन्य श्रेणियों का आपसी मेल

Business Today की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट में स्नातकों के लिए 1.17 लाख से अधिक, स्नातक स्तर पर पढ़ रहे युवाओं के लिए 96,000 से अधिक, महिलाओं के लिए 1.25 लाख से अधिक और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 1,000 से अधिक प्रस्तावों का विवरण है। रिपोर्ट कार्यक्रम के 20 कार्यान्वयन साझेदारों का भी उल्लेख करती है। ये आँकड़े बताते हैं कि अवसर किन समूहों तक पहुँचे, लेकिन इन्हें जोड़कर नया कुल नहीं निकाला जा सकता।

शिक्षा और लिंग अलग आधार हैं। स्नातक स्तर पर पढ़ रही किसी महिला का प्रस्ताव शैक्षिक श्रेणी और महिलाओं की श्रेणी, दोनों में आ सकता है। इसी तरह दिव्यांग उम्मीदवार किसी शैक्षिक श्रेणी में भी शामिल हो सकता है। श्रेणीवार संख्या को एक-दूसरे से अलग व्यक्तियों की संख्या समझने पर कुल बढ़ा-चढ़ा दिखेगा।

प्रस्तावों के वितरण से कार्यक्रम की पहुँच के बारे में जानकारी मिलती है, पर रोजगार के अंतिम परिणाम के बारे में नहीं। किसी उम्मीदवार को प्रस्ताव मिलने के बाद स्वीकृति, नियुक्ति की शर्तें और काम पर आने की स्थिति अलग प्रश्न हैं। प्रकाशित श्रेणियाँ उन चरणों में पहुँचे लोगों की गिनती नहीं देतीं।

पहले के वित्त वर्ष में चार अलग माप

Infosys Springboard की रिपोर्ट में प्रशिक्षण, प्रस्ताव और नौकरी बाज़ार की रिक्तियों के अलग आँकड़े

Infosys की वित्त वर्ष 2025–26 की डिजिटल कौशल रिपोर्ट में आजीविका कार्यक्रम के तहत 4.1 लाख से अधिक प्रशिक्षित लोग और 2.2 लाख से अधिक ऐसे लोग दर्ज हैं जिन्हें नौकरी प्रस्ताव दिए गए। उसी रिपोर्ट में अलग Infosys Springboard Job Marketplace के लिए 641 प्रकाशित रिक्तियाँ और 13,203 आवेदन दिए गए हैं। प्रशिक्षण, प्रस्ताव, रिक्ति और आवेदन चार अलग माप हैं; किसी एक को दूसरे की संख्या नहीं समझा जा सकता।

रोजगार बाज़ार की रिक्तियाँ और व्यापक आजीविका कार्यक्रम के प्रस्ताव अलग शीर्षकों के तहत दर्ज हैं। बाज़ार पर प्रकाशित एक रिक्ति के लिए कई आवेदन आ सकते हैं, और एक व्यक्ति कई पदों के लिए आवेदन कर सकता है। इसलिए रिक्तियों या आवेदनों को प्रस्तावों से भाग देकर नियुक्ति की दर निकालना इन आँकड़ों का सही उपयोग नहीं होगा।

पुरानी रिपोर्ट में माप ‘प्रस्ताव पाने वाले लोग’ हैं, जबकि नई घोषणा ‘सक्षम किए गए नौकरी प्रस्ताव’ कहती है। दोनों का संबंध रोजगार अवसरों से है, पर प्रकाशित विवरण यह स्पष्ट नहीं करता कि दोनों गिनतियों में एक ही इकाई और पूरी तरह समान पद्धति इस्तेमाल हुई थी। इन कुलों के बीच का अंतर कार्यक्रम की बाद की प्रगति का संकेत देता है; उसे सीधे नई नियुक्तियों की संख्या नहीं कहा जा सकता।

रिपोर्ट आजीविका कार्यक्रम से जुड़े रोजगार क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, खुदरा व्यापार, बिक्री, ग्राहक सहायता, परिचालन, वित्तीय सेवाएँ, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य सेवाओं का उल्लेख करती है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रस्तावों का दायरा केवल सूचना प्रौद्योगिकी की नौकरियों तक सीमित नहीं है। फिर भी क्षेत्र का नाम उम्मीदवार के काम शुरू करने या नौकरी में बने रहने का परिणाम नहीं बताता।

नियुक्ति का परिणाम कब साफ होगा

प्रस्ताव पाने और नौकरी शुरू करने के बीच का अंतर समझने के लिए स्वीकृत प्रस्तावों और काम पर पहुँचे उम्मीदवारों की अलग गिनती चाहिए। काम शुरू करने के बाद कितने लोग नौकरी में बने रहे, यह कार्यक्रम के आजीविका संबंधी लक्ष्य को समझने के लिए एक और उपयोगी माप होगा। फिलहाल घोषित कुल इन परिणामों का विकल्प नहीं है।

इस सीमा का अर्थ यह नहीं कि कार्यक्रम से किसी को नौकरी नहीं मिली। अर्थ इतना है कि प्रकाशित प्रस्ताव संख्या के आधार पर वास्तविक नियुक्तियों की विश्वसनीय संख्या तय नहीं की जा सकती। जब स्वीकृति, काम शुरू करने और नौकरी में बने रहने के आँकड़े अलग प्रकाशित होंगे, तब विद्यार्थियों और नौकरी खोजने वालों को अवसरों के साथ उनका रोजगार परिणाम भी दिखाई देगा।

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