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फ्रीलांस भुगतान पर पुराना TDS सेक्शन न लिखें—2026 में नंबर बदल गए

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|6 मिनट पढ़ने का समय| 12
फ्रीलांस भुगतान पर पुराना TDS सेक्शन न लिखें—2026 में नंबर बदल गए

1 अप्रैल 2026 से निवासी फ्रीलांसर को किए जाने वाले ऐसे भुगतान पर, जिनमें TDS काटना जरूरी है, Income-tax Act, 2025 का सेक्शन 393 और उसकी सही तालिका-पंक्ति लिखी जाएगी। पुराने 194C, 194J या 194M का नंबर जारी रखने पर विवरण दाखिल करते समय प्रणालीगत सत्यापन त्रुटि आ सकती है; हालांकि लागू पंक्ति काम की प्रकृति और भुगतानकर्ता की श्रेणी से तय होगी, केवल “फ्रीलांसर” कहलाने से नहीं।

मार्च–अप्रैल की सीमा अनुबंध या चालान की तारीख से नहीं, खाते में राशि जमा करने और वास्तविक भुगतान में से पहले हुई घटना से तय होती है। आयकर विभाग के संक्रमण संबंधी आधिकारिक प्रश्नोत्तर के अनुसार यह घटना 31 मार्च 2026 तक हुई हो तो Income-tax Act, 1961 लागू रहेगा; 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद हुई हो तो नया कानून और सेक्शन 393 लागू होगा।

194C, 194M और 194J अब किस पंक्ति में हैं

सेक्शन 393 ने गैर-वेतन TDS की पुरानी धाराओं को एक ही प्रावधान की अलग तालिका-पंक्तियों में रखा है। इसलिए केवल “393” लिखना पर्याप्त नहीं हो सकता; उपधारा और क्रमांक भी भुगतान की वास्तविक श्रेणी के अनुरूप होने चाहिए।

  • पुराना 194C: निर्दिष्ट भुगतानकर्ता द्वारा अनुबंध के तहत काम या श्रम-आपूर्ति के लिए भुगतान अब सेक्शन 393(1), निवासी भुगतान तालिका के क्रमांक 6(i) में आता है।
  • पुराना 194M: सामान्य कारोबारी TDS श्रेणी से बाहर का व्यक्ति या HUF जब निवासी को ठेके, पेशेवर सेवा, कमीशन या ब्रोकरेज के लिए निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान करता है, तो नया संदर्भ 393(1), क्रमांक 6(ii) है।
  • पुराना 194J: पेशेवर या तकनीकी सेवाओं, निदेशक को निर्दिष्ट भुगतान और कुछ रॉयल्टी के लिए नया संदर्भ 393(1), क्रमांक 6(iii) है।

सेक्शन 393 की वैधानिक तालिका में 6(i) के तहत व्यक्तिगत या HUF ठेकेदार के लिए दर 1% और अन्य ठेकेदार के लिए 2% है; सीमा एक भुगतान पर ₹30,000 या कर-वर्ष में कुल ₹1,00,000 है। क्रमांक 6(ii) में दर 2% और सीमा ₹50 लाख है। क्रमांक 6(iii) में पेशेवर सेवाओं की सामान्य दर 10% है, जबकि अलग तकनीकी सेवाओं, सिनेमाई फिल्मों से जुड़ी निर्दिष्ट रॉयल्टी और केवल कॉल सेंटर कारोबार करने वाले प्राप्तकर्ता के लिए 2% दर दी गई है; संबंधित सीमा ₹50,000 है।

इन पंक्तियों में भुगतानकर्ता भी वैधानिक शर्त है। कंपनी या फर्म से भुगतान और निजी हैसियत में किसी व्यक्ति से भुगतान को स्वतः एक जैसा न मानें। इसी तरह चालान पर “परामर्श” लिख देने से हर सेवा 6(iii) में नहीं चली जाती: अनुबंध के तहत तय काम 6(i) हो सकता है, जबकि कानून में परिभाषित पेशेवर या तकनीकी सेवा 6(iii) में आ सकती है।

दरें नहीं बदलीं, संदर्भ बदला है

नई व्यवस्था ने इन श्रेणियों की TDS दरों और मौद्रिक सीमाओं को बदलने के बजाय उनका वैधानिक पता बदला है। इसका अर्थ यह भी है कि पुराने नंबर से सही दर पर काटा गया कर अपने आप सही रिपोर्टिंग नहीं बन जाता। कटौतीकर्ता को नई अवधि के चालान और TDS विवरण में उपयुक्त सेक्शन-पंक्ति चुननी होगी।

TDS अंतिम आयकर देनदारी नहीं है। यह भुगतानकर्ता द्वारा स्रोत पर काटा गया कर है, जिसका उपलब्ध क्रेडिट प्राप्तकर्ता अपनी आयकर विवरणी में लेता है। PAN उपलब्ध न होने, कम या शून्य कटौती प्रमाणपत्र या किसी विशेष वैधानिक अपवाद के कारण परिणाम अलग हो सकता है; सामान्य मानचित्र ऐसे तथ्यों की जगह नहीं लेता।

पुराने अनुबंध पर कौन-सा कानून चुनें

अनुबंध कब हस्ताक्षरित हुआ, इससे पूरे अनुबंध पर एक ही कानून स्थायी रूप से लागू नहीं हो जाता। प्रत्येक भुगतान या जमा को इस क्रम में अलग जांचें:

  1. उस राशि को फ्रीलांसर के खाते में जमा करने की तारीख और वास्तविक भुगतान की तारीख पहचानें।
  2. दोनों में पहले आई तारीख को TDS की निर्णायक घटना मानें।
  3. घटना 31 मार्च 2026 या उससे पहले हो तो पुराना कानून और संबंधित पुरानी धारा लिखें। उसी राशि का बैंक भुगतान अप्रैल में होने पर दोबारा TDS नहीं काटा जाएगा।
  4. घटना 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद हो तो भुगतान की प्रकृति तथा भुगतानकर्ता की श्रेणी के अनुसार 393(1) की 6(i), 6(ii) या 6(iii) पंक्ति चुनें।

एक सशर्त उदाहरण में फरवरी में अनुबंध हुआ, ₹80,000 का शुल्क 30 मार्च को फ्रीलांसर के खाते में दर्ज हुआ और बैंक भुगतान 10 अप्रैल को किया गया। जमा पहले होने के कारण उस राशि पर पुराना कानून लागू होगा। यदि मार्च में हस्ताक्षरित अनुबंध की पहली जमा 3 अप्रैल और भुगतान 8 अप्रैल को हुआ, तो उस राशि पर नया कानून लागू होगा।

किस्तों वाला एक अनुबंध सीमा के दोनों ओर जा सकता है। मार्च में पहली बार जमा हुई किस्त पुरानी धारा में और अप्रैल में पहली बार जमा या भुगतान हुई अगली किस्त नई पंक्ति में आ सकती है। इसीलिए अनुबंध की तारीख के साथ प्रत्येक राशि की जमा और भुगतान तारीख का अभिलेख भी जरूरी है।

पुराना नंबर दर्ज हो गया तो सुधार किसे करना है

गलत सेक्शन को फ्रीलांसर अपनी आयकर विवरणी में मनमाने ढंग से बदलकर मूल TDS रिपोर्टिंग ठीक नहीं कर सकता। आयकर विभाग की TDS अनुपालन सहायता के अनुसार पुराने नंबर से प्रसंस्करण त्रुटि होने पर कटौतीकर्ता को सुधार विवरण दाखिल करना पड़ सकता है; संक्रमण में गलत वर्ष या सेक्शन से क्रेडिट मेल न खाए तो संशोधित TDS विवरण भी कटौतीकर्ता ही दाखिल करेगा।

  1. कटौती प्रमाणपत्र, चालान या भुगतान विवरण और ग्राहक द्वारा दाखिल TDS विवरण का संदर्भ लें।
  2. PAN, राशि, कर-वर्ष, कटौती और जमा की तारीख तथा दर्ज सेक्शन-पंक्ति मिलाएं।
  3. गलती मिलने पर ग्राहक या उसके लेखाकार को सही पंक्ति और संबंधित लेनदेन बताते हुए लिखित सुधार अनुरोध भेजें।
  4. कटौतीकर्ता के सुधार दाखिल करने के बाद अद्यतन कर-क्रेडिट विवरण दोबारा जांचें।

सुधार लंबित रहने तक चालान, कटौती प्रमाणपत्र, बैंक भुगतान और पत्राचार सुरक्षित रखें। केवल यह देखकर कि कुल TDS राशि सही है, सेक्शन या कर-वर्ष की असंगति को अनदेखा न करें।

AIS और Form No. 168 में सही अवधि देखें

मार्च और अप्रैल 2026 के क्रेडिट अलग अवधियों में दिखाई देंगे। वित्त वर्ष 2025-26 से जुड़ा पुरानी व्यवस्था का TDS, AY 2026-27 के AIS में रहेगा; कर-वर्ष 2026-27 की नई व्यवस्था का क्रेडिट Form No. 168 में दिखेगा। इसलिए किसी प्रविष्टि को गायब मानने से पहले सही वर्ष और सही विवरण देखना जरूरी है।

पुराने AIS में दिखाई गई सक्रिय सूचना पर करदाता प्रतिक्रिया दे सकता है। AIS के आधिकारिक प्रश्नोत्तर बताते हैं कि प्रतिक्रिया के बाद रिपोर्ट किया गया और संशोधित मूल्य साथ दिख सकते हैं तथा उसकी पावती मिलती है। लेकिन प्रतिक्रिया कटौतीकर्ता के गलत TDS विवरण का विकल्प नहीं है: सेक्शन, PAN, वर्ष या क्रेडिट की मूल रिपोर्टिंग गलत हो तो कटौतीकर्ता से संशोधित विवरण दाखिल कराना ही आवश्यक सुधार है।

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