दिल्ली के हर तीन में एक गिग कर्मी असुरक्षित—सड़क ही उनका कार्यस्थल है

Janpahal ने 3 सितंबर 2026 को मंच-आधारित गिग कर्मियों की व्यावसायिक सुरक्षा पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण जारी किया। दिल्ली संबंधी प्रकाशित निष्कर्ष सड़क पर व्यापक असुरक्षा दिखाते हैं, लेकिन उपलब्ध खबरों के मुख्य पाठ में असुरक्षित महसूस करने वालों का अनुपात करीब तीन-चौथाई है; एक-तिहाई से अधिक का आंकड़ा वास्तविक यातायात दुर्घटना में शामिल होने वालों से जुड़ा है।
अध्ययन में भोजन और किराना पहुंचाने वाले, ई-वाणिज्य वितरण कर्मी, ऐप-आधारित टैक्सी चालक तथा घरेलू और व्यक्तिगत सेवाओं के कर्मी शामिल थे। निष्कर्षों का केंद्रीय अर्थ साफ है: इन कामों में सड़क, यातायात, गर्मी और खराब मौसम निजी यात्रा के जोखिम नहीं हैं, क्योंकि सेवा पूरी करने की जगह और रास्ता ही कार्यस्थल है।
राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने किन कर्मियों और खतरों को शामिल किया

Janpahal की रिपोर्ट-विमोचन सूचना में अध्ययन का दायरा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिम बताया गया था। विमोचन नई दिल्ली में 3 सितंबर को निर्धारित था और अध्ययन मंच-आधारित काम की उन परिस्थितियों पर केंद्रित था जो परंपरागत कार्यालय या प्रतिष्ठान से बाहर बनती हैं।
राष्ट्रीय निष्कर्षों की विमोचन रिपोर्ट के मुताबिक, दस शहरों के 1,000 कर्मियों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया। इनमें 62.2 प्रतिशत ने वाहन से बाल-बाल बचने की घटना, 38 प्रतिशत ने सड़क की दशा के कारण चोट और 27.5 प्रतिशत ने यातायात दुर्घटना की सूचना दी। ये पूरे देश के आंकड़े हैं, इसलिए इन्हें दिल्ली के अलग निष्कर्षों का विकल्प नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रीय स्तर पर 57 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने सप्ताह में 49 घंटे से ज्यादा और 23.4 प्रतिशत ने 70 घंटे से अधिक काम करने की बात कही। लंबे कामकाजी घंटे जोखिम के संपर्क की अवधि बढ़ाते हैं, जबकि भोजन, किराना और ई-वाणिज्य वितरण जैसी भूमिकाओं में सेवा पूरी करने के लिए सड़क पर बने रहना आवश्यक होता है।
दिल्ली में असुरक्षा, निकट टक्कर और दुर्घटना अलग माप हैं

दिल्ली-केंद्रित समाचार रिपोर्ट के शीर्षक में हर तीन में एक कर्मी के असुरक्षित महसूस करने की बात है, लेकिन उसी पृष्ठ का मुख्य पाठ करीब तीन-चौथाई उत्तरदाताओं के असुरक्षित महसूस करने और केवल 5 प्रतिशत के सुरक्षित महसूस करने का आंकड़ा देता है। मुख्य पाठ में चार में पांच से अधिक उत्तरदाताओं के वाहन से बाल-बाल बचने और एक-तिहाई से अधिक के वास्तविक यातायात दुर्घटना में शामिल होने की बात भी अलग-अलग दर्ज है।
इन आंकड़ों को एक ही निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा। असुरक्षित महसूस करना कामकाजी अनुभव पर आधारित प्रतिक्रिया है; वाहन से बाल-बाल बचना एक विशिष्ट घटना है; दुर्घटना में शामिल होना प्रत्यक्ष परिणाम है। उपलब्ध विवरण में करीब एक-तिहाई वाला अनुपात तीसरी श्रेणी से जुड़ता है, सामान्य असुरक्षा से नहीं।
दूसरी दिल्ली-केंद्रित व्याख्या भी करीब 75 प्रतिशत उत्तरदाताओं के सड़क पर असुरक्षित महसूस करने, 80 प्रतिशत से अधिक के वाहन से बाल-बाल बचने और एक-तिहाई से अधिक के दुर्घटना में शामिल होने की बात करती है। दो प्रकाशित विवरणों में यही विभाजन मिलने के कारण चुने गए शीर्षक का अनुपात सर्वेक्षण के मुख्य असुरक्षा आंकड़े के रूप में पुष्ट नहीं होता।
सड़क दुर्घटना और समय-दबाव में जिम्मेदारी कैसे बंटती है

कर्मी के स्तर पर हेलमेट, सुरक्षित गति, वाहन की देखभाल और यातायात नियमों का पालन जोखिम घटा सकते हैं। फिर भी खराब सड़क, तेज रफ्तार यातायात, असुरक्षित मोड़ और सार्वजनिक विश्राम स्थलों की कमी किसी एक कर्मी के नियंत्रण में नहीं होती; सड़क रखरखाव, यातायात प्रवर्तन और बुनियादी सुविधाएं सार्वजनिक निकायों के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
मंचों की जिम्मेदारी उन कामकाजी शर्तों से बनती है जिन्हें वे नियंत्रित करते हैं। राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 59.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने मंच से सुरक्षा प्रशिक्षण या संसाधन नहीं मिलने और 23.4 प्रतिशत ने उपलब्ध प्रशिक्षण को अपर्याप्त बताया। यात्रा का लक्ष्य, समय-सीमा, काम अस्वीकार करने का परिणाम और विराम की व्यवस्था यदि तेजी को सुरक्षा पर प्राथमिकता देते हैं, तो दुर्घटना का खतरा केवल चालक की व्यक्तिगत पसंद का परिणाम नहीं रह जाता।
नीति-निर्माताओं के लिए मुख्य प्रश्न कार्यस्थल की परिभाषा है। जब आय अर्जित करने की गतिविधि सड़क, सार्वजनिक स्थान या ग्राहक के परिसर में होती है, तब सुरक्षा नियमों और सामाजिक संरक्षण में इन्हें काम की जगह मानना जरूरी है; अन्यथा दुर्घटना को सामान्य आवागमन की घटना समझे जाने का खतरा रहता है।
गर्मी, बारिश और बिजली गिरना भी कामकाजी जोखिम हैं
दिल्ली की अत्यधिक गर्मी, भारी बारिश, सर्दी और गरज के दौरान बाहर रहना वितरण तथा यात्री सेवा से जुड़ी भूमिकाओं में प्रत्यक्ष जोखिम पैदा करता है। गर्मी में शरीर पर ताप का दबाव, बारिश में कम दृश्यता और फिसलन, तथा गरज के दौरान बिजली गिरने की आशंका उस समय कामकाजी खतरा बनती है जब कर्मी को सेवा पूरी करने के लिए खुले मार्ग पर रहना पड़ता है।
कर्मी मौसम के अनुकूल कपड़े, पानी, सुरक्षित ठहराव और यात्रा रोकने जैसे उपाय अपना सकता है, पर उसकी सीमा आय से तय होती है। प्रति यात्रा भुगतान पाने वाला व्यक्ति खराब मौसम में काम घटाता है तो कमाई भी घट सकती है। मंच मौसम चेतावनी, भुगतान सहित विश्राम, लक्ष्य में ढील और असुरक्षित परिस्थितियों में काम न लेने पर दंड से संरक्षण दे सकता है; सरकार को चेतावनी व्यवस्था, आश्रय, पेयजल और स्पष्ट व्यावसायिक सुरक्षा मानक उपलब्ध कराने होते हैं।
अभी क्या पुष्ट है और क्या स्पष्ट होना बाकी है
भारत की गिग कार्यशक्ति का आकार बढ़ने के साथ यह प्रश्न और बड़ा होगा। गिग अर्थव्यवस्था पर प्रकाशित आकलन में कार्यशक्ति के 2024–25 के एक करोड़ से बढ़कर 2029–30 तक 2.35 करोड़ होने का अनुमान दिया गया है। इस विस्तार के साथ सड़क और मौसम से जुड़े जोखिमों को औपचारिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने की आवश्यकता भी बढ़ेगी।
फिलहाल रिपोर्ट का विमोचन, शामिल कामों का दायरा और दिल्ली में व्यापक सड़क-असुरक्षा पुष्ट हैं। यह भी स्पष्ट है कि असुरक्षा, निकट टक्कर और वास्तविक दुर्घटना के आंकड़े अलग हैं। आगे पूरी शहरवार तालिकाएं, प्रश्नावली और नमूना-विधि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर दिल्ली के अनुपातों तथा अलग-अलग पेशों के जोखिम की अधिक सटीक तुलना संभव होगी।
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