
D-Wave की नई क्वांटम गेट में त्रुटि 0.1% से कम रही

D-Wave Quantum से जुड़े शोधकर्ताओं ने द्वि-रेल कैविटी क्यूबिट के लिए दो-क्यूबिट उलझाव गेट का प्रयोगात्मक प्रदर्शन किया है। 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित Nature के खुले शोध-पत्र में लगभग 500 नैनोसेकंड की गेट अवधि, करीब 0.5% मिटने योग्य त्रुटि और मिटाव पहचानने के बाद शेष Pauli त्रुटि 0.1% से कम दर्ज की गई।
यह अंतर नतीजे को समझने की कुंजी है। 0.1% से कम का आंकड़ा कुल त्रुटि दर नहीं, बल्कि उन प्रयोगों की बची गणना-त्रुटि है जिनमें पहचानी गई मिटने योग्य घटनाओं को अलग किया गया; अलग बेंचमार्क और लंबे गेट क्रम थोड़े अलग परिणाम देते हैं।
एक प्रतिशत नहीं, चार अलग माप
शोध ने गेट के प्रदर्शन को एकल निष्ठा प्रतिशत में समेटने के बजाय चार श्रेणियों में बांटा। इससे पता चलता है कि कौन-सी खराबी हार्डवेयर में पहचानी जा सकती है और कौन-सी गलती गणना के भीतर Pauli त्रुटि के रूप में बचती है।
- गेट अवधि: Swap–Wait–Swap नियंत्रित-Z क्रिया लगभग 500 नैनोसेकंड में पूरी हुई। तेज क्रिया सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट की सीमित सुसंगति अवधि के भीतर उलझाव बनाने में मदद करती है।
- मिटने योग्य त्रुटि: बार-बार गेट चलाने वाली टोमोग्राफी में कुल दर 0.53(2)% प्रति गेट रही। इसमें नियंत्रण क्यूबिट की दर 0.400(4)% और लक्ष्य क्यूबिट की 0.096(4)% थी।
- शेष Pauli त्रुटि: 15 तक दोहराए गए गेट वाले टोमोग्राफी परीक्षण में चयन-पश्चात त्रुटि 0.029(6)% प्रति गेट निकली। इंटरलीव्ड यादृच्छिक बेंचमार्किंग ने 0.108(5)% का अनुमान दिया, जबकि 103 गेट वाले लंबे क्रम से 0.12(1)% की रूढ़िवादी सीमा निकली।
- बिट-फ्लिप त्रुटि: नियंत्रण क्यूबिट के लिए माप 2.8(4) × 10⁻⁶ प्रति गेट था। यानी यह त्रुटि कुछ दस लाखवें हिस्सों के स्तर पर रही और प्रमुख शोर चैनल नहीं बनी।
इन मानों को एक-दूसरे का खंडन नहीं समझना चाहिए। वे अलग प्रयोगात्मक विधियों और अलग गेट गहराइयों से आए हैं; इसलिए शीर्षक का 0.1% से कम परिणाम छोटे टोमोग्राफी क्रम और शोध में दी गई समग्र शेष-Pauli श्रेणी पर लागू होता है, हर परीक्षण पर नहीं।
SWS गेट हानि को पहचानने योग्य कैसे रखती है

प्रत्येक द्वि-रेल क्यूबिट में क्वांटम सूचना दो सुपरकंडक्टिंग माइक्रोवेव कैविटी की एकल-उत्तेजना अवस्था में रखी जाती है। SWS क्रम पहले नियंत्रण क्यूबिट की एक कैविटी से उत्तेजना को दोनों क्यूबिट जोड़ने वाले ट्रांसमॉन कपलर में भेजता है। कपलर लक्ष्य कैविटी के साथ आवश्यक फेज़ अंतःक्रिया करता है और अंतिम स्वैप उत्तेजना को वापस भेजकर नियंत्रित-Z गेट पूरी करता है।
इस क्रिया के दौरान उत्तेजनाओं की कुल संख्या संरक्षित रहती है। फोटॉन खोने पर क्यूबिट गणना-क्षेत्र से निर्वात अवस्था में चला जाता है, जिसे बाद की जांच ज्ञात स्थान वाली मिटने योग्य त्रुटि के रूप में चिह्नित कर सकती है। प्रमुख हानि इस तरह अज्ञात Pauli त्रुटि में छिपने के बजाय डिकोडर के लिए अतिरिक्त सूचना बनती है।
नियंत्रण और लक्ष्य क्यूबिट पर प्रभाव समान नहीं था। कपलर में अस्थायी रूप से रहने वाले नियंत्रण क्यूबिट में हानि और डीफेजिंग अधिक मिली, क्योंकि कपलर की सुसंगति कैविटी से कम थी। यह असमानता बड़े त्रुटि-सुधार परिपथ में भूमिकाओं के सावधान निर्धारण की मांग करेगी।
त्रुटि-सुधार के लिए अलग पहचान क्यों मायने रखती है
क्वांटम त्रुटि-सुधार में केवल त्रुटियों की संख्या नहीं, उनके बारे में उपलब्ध सूचना भी भौतिक खर्च तय करती है। यदि डिकोडर को गलती का स्थान पहले से मालूम हो, तो समान कोड दूरी पर मिटने योग्य त्रुटि को अज्ञात Pauli त्रुटि की तुलना में संभालना आसान हो सकता है।
शोध के सतह-कोड अनुकरण में मापी गई संरचित त्रुटियों वाला SWS मॉडल, समान स्तर के साधारण द्वि-क्यूबिट डीपोलराइजिंग शोर की तुलना में कोड दूरी बढ़ने पर तार्किक त्रुटि को तेजी से घटाता दिखा। यह प्रयोग से निकले त्रुटि मॉडल पर आधारित अनुकरण है, किसी बड़े दोष-सहिष्णु प्रोसेसर पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन नहीं।
7 अगस्त के The Next Platform के तकनीकी विश्लेषण ने भी यही व्यावहारिक अंतर रेखांकित किया: हार्डवेयर में अधिक त्रुटियां पहचान लेने पर एक तार्किक क्यूबिट के लिए जरूरी अतिरिक्त भौतिक क्यूबिट घट सकते हैं। फिलहाल यह संभावित लाभ है; प्रकाशित गेट प्रयोग ने पूर्ण प्रणाली की वास्तविक क्यूबिट बचत नहीं मापी।
प्रयोगात्मक परिणाम और कंपनी की योजना अलग हैं
मौजूदा उपलब्धि दो द्वि-रेल कैविटी क्यूबिट और उन्हें जोड़ने वाले कपलर तक सीमित है। पूरी दोष-सहिष्णु मशीन को अवस्था तैयार करने, मापन, बार-बार मिटाव-जांच, वास्तविक समय नियंत्रण और बड़े क्यूबिट समूह पर समान त्रुटि संरचना बनाए रखने की भी जरूरत होगी।
D-Wave की 1 जून 2026 की आधिकारिक कार्ययोजना में 2026 के लिए 17 भौतिक क्यूबिट, 2030 के लिए 10 तार्किक क्यूबिट और 2032 तक दस लाख से अधिक क्रियाएं करने योग्य 100 तार्किक क्यूबिट का लक्ष्य है। ये कंपनी के भावी पड़ाव हैं, Nature प्रयोग में तैयार या उपलब्ध प्रणालियां नहीं।
अभी पुष्ट परिणाम तेज SWS नियंत्रित-Z गेट, मिटने योग्य और शेष Pauli त्रुटियों का अलग मापन तथा सीमित सतह-कोड अनुकरण है। अगली निर्णायक परीक्षा बड़े क्यूबिट समूह पर वास्तविक मिटाव-जांच के साथ तार्किक त्रुटि में प्रत्यक्ष कमी होगी; लंबे गेट क्रम की गैर-रैखिक गिरावट, दोनों क्यूबिट की असमान त्रुटि और जांच का अपना शोर अभी खुले प्रश्न हैं।
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