भारत का ICT मसौदा: वेबसाइटों के लिए ACR कब और किसे बनानी होगी

सीधा उत्तर: भारत में सार्वजनिक या उपभोक्ता उपयोग के लिए वेबसाइट, ऐप, सॉफ्टवेयर, डिजिटल सामग्री या दूसरी ICT सेवा उपलब्ध कराने वाली भारतीय और विदेशी संस्थाएँ प्रस्तावित नियमों के दायरे में आ सकती हैं। इनके लिए Accessibility Conformance Report यानी ACR बनाने और प्रकाशित करने का प्रस्ताव है; तैयारी अभी शुरू की जा सकती है, लेकिन अनुपालन की कानूनी अवधि अंतिम नियम प्रकाशित होने के बाद ही शुरू होगी।
ये अभी बाध्यकारी अंतिम नियम नहीं हैं। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का मसौदा-पृष्ठ इसे 27 जुलाई 2026 को प्रकाशित प्रस्ताव के रूप में दर्ज करता है और राजपत्र दस्तावेज से जोड़ता है। इसलिए अभी किसी संस्था को केवल मसौदे के आधार पर एक वर्ष या 18 महीने की उलटी गिनती शुरू नहीं माननी चाहिए।
किन वेबसाइटों और सेवाओं पर नियम लागू हो सकते हैं
प्रस्तावित कसौटी यह नहीं है कि वेबसाइट सरकारी है या निजी। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या कोई संस्था किसी आच्छादित ICT मद को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत में लोगों के सार्वजनिक या उपभोक्ता उपयोग के लिए उपलब्ध कराती है। संस्था भारत में हो या विदेश में, मसौदा दोनों को शामिल करता है।
आधिकारिक राजपत्र मसौदे के दायरे और समय-सारणी में वेबसाइट, मोबाइल और टैबलेट ऐप, स्पर्श-आधारित ऐप, सॉफ्टवेयर, उससे जुड़े दस्तावेज और सहायता सेवाएँ, डिजिटल सामग्री, गैर-वेब इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज तथा ICT-आधारित सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं। उसी पाठ में ₹500 करोड़ या अधिक कारोबार वाली संस्थाओं के लिए एक वर्ष और इससे कम कारोबार वाली संस्थाओं के लिए 18 महीने की प्रस्तावित अवधि दी गई है; स्पष्ट रूप से चिह्नित निष्क्रिय अभिलेखित सामग्री को सीमित छूट मिलती है।
दायरे में वह संस्था आ सकती है जो संबंधित मद बनाती या विकसित करती है, उसका डिजाइन करती है, उस पर निर्णायक तकनीकी नियंत्रण रखती है या उसे भारत में उपलब्ध कराती है। इस कारण किसी विदेशी सॉफ्टवेयर सेवा को केवल विदेशी पंजीकरण के आधार पर और किसी निजी ई-कॉमर्स या बैंकिंग ऐप को केवल गैर-सरकारी होने के आधार पर बाहर नहीं माना जा सकता। वास्तविक प्रयोज्यता संस्था की भूमिका, भारत में उपलब्धता और सेवा के उपयोग पर निर्भर करेगी।
₹500 करोड़ की सीमा क्या तय करती है
₹500 करोड़ की सीमा सामान्य छूट नहीं है; यह प्रस्तावित अनुपालन अवधि को दो श्रेणियों में बाँटती है। दायरे में आने वाली छोटी संस्था के लिए भी ACR और सुगम्यता अनुपालन का दायित्व हो सकता है, पर उसे मसौदे के अनुसार अधिक समय मिलेगा।
- ₹500 करोड़ या अधिक कारोबार: संबंधित अनुसूची के मानकों के लिए प्रस्तावित अवधि एक वर्ष है।
- ₹500 करोड़ से कम कारोबार: प्रस्तावित अवधि 18 महीने है।
- आरंभ-बिंदु: दोनों अवधियाँ अंतिम नियमों के राजपत्र में प्रकाशन से जुड़ी हैं, मसौदा-पृष्ठ की तारीख से नहीं।
- अधिकतम अवधि: धारा 46 के प्रयोजन के लिए संदर्भित मानकों का पूर्ण अनुपालन दो वर्ष में प्रस्तावित है।
कारोबार की गणना तुरंत पिछले वित्तीय वर्ष के आधार पर की जानी है। मसौदा प्रयोज्यता तय करते समय संस्था के साथ उसे नियंत्रित करने वाली, उसके नियंत्रण में आने वाली या समान नियंत्रण वाली उन संस्थाओं का समेकित कारोबार जोड़ने की बात भी करता है जो आच्छादित मदें भारत में उपलब्ध कराती हैं। इसलिए किसी समूह के भीतर केवल स्थानीय इकाई का अलग कारोबार देखना पर्याप्त नहीं हो सकता।
ACR में क्या बनाना और प्रकाशित करना होगा

ACR केवल यह घोषणा नहीं है कि कोई वेबसाइट सुगम है। प्रस्तावित रिपोर्ट में यह बताना होगा कि संबंधित मद IS 17802 (भाग 1): 2021 की प्रत्येक लागू आवश्यकता को किस सीमा तक पूरा करती है और उसका परीक्षण IS 17802 (भाग 2): 2022 के अनुसार कैसे किया गया। आवश्यकता-विशिष्ट परिणाम, पद्धति और सत्यापन योग्य उदाहरण देने होंगे; सामान्य दावा पर्याप्त नहीं होगा।
रिपोर्ट निःशुल्क उपलब्ध करानी और संस्था की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर दो रूपों में प्रकाशित करनी प्रस्तावित है: मनुष्य-पठनीय रूप, जैसे सुगम HTML या PDF, और मशीन-पठनीय संरचित रूप, जैसे JSON या XML। दोनों में अंतर होने पर मनुष्य-पठनीय संस्करण प्रभावी होगा, फिर भी दोनों को सही और परस्पर सुसंगत रखना संस्था की जिम्मेदारी रहेगी।
IndiaLaw का नियम-पाठ विश्लेषण स्पष्ट करता है कि आपूर्तिकर्ता की ACR पर बिना समुचित जाँच निर्भर रहने से संस्था की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। रिपोर्ट ऐसे व्यक्ति या संगठन से तैयार, समीक्षित या सत्यापित करानी प्रस्तावित है जिसके पास सुगम्यता मूल्यांकन, संबंधित मानकों, सहायक तकनीकों और मान्य परीक्षण विधियों की प्रमाणित विशेषज्ञता हो।
किसी बड़े बदलाव से सुगम्यता प्रभावित हो सकती है तो तैनाती से पहले दोबारा परीक्षण और ACR अद्यतन करना होगा। बड़े बदलाव के बिना भी कम-से-कम हर दो वर्ष में नई समीक्षा, परीक्षण और अद्यतन प्रस्तावित है। किसी बदलाव को छोटा मानने का आधार दर्ज रखना होगा ताकि सक्षम प्राधिकरण माँगने पर अभिलेख देख सके।
क्या हर पृष्ठ और सामग्री के लिए अलग ACR चाहिए
मसौदे को प्रत्येक वेब पृष्ठ या सामग्री के लिए अलग ACR की माँग के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। सामग्री के मामले में रिपोर्ट उस अंतर्निहित प्रणाली, मंच, सामग्री प्रबंधन प्रणाली, वीडियो-प्रकाशन कार्यप्रवाह या लेखन उपकरण के लिए होगी जो सामग्री बनाता या निर्यात करता है—बशर्ते उससे निकली सामग्री लागू मानकों के अनुरूप सुगम बनाई जाए।
उपयोगकर्ता-जनित सामग्री वाले मंच पर भी ACR मंच के लिए प्रस्तावित है, प्रत्येक पोस्ट के लिए नहीं। मंच को कैप्शन, प्रतिलेख, वैकल्पिक पाठ, ऑडियो विवरण और तार्किक पठन-क्रम जैसी सुविधाएँ जोड़ने की क्षमता देनी होगी, अपलोड के समय उपयोगकर्ताओं का मार्गदर्शन करना होगा और उपलब्ध उपायों को अपनी ACR में बताना होगा।
अभिलेखित सामग्री की छूट संकीर्ण है। सामग्री स्पष्ट रूप से अभिलेखित चिह्नित होनी चाहिए, सक्रिय सार्वजनिक उपयोग या अद्यतन के लिए नहीं होनी चाहिए और केवल रिकॉर्ड के उद्देश्य से रखी जानी चाहिए। पुराना लेकिन अभी उपयोग में आने वाला सहायता-पृष्ठ केवल उसकी उम्र के कारण इस छूट में नहीं आएगा।
तैयारी कब और कहाँ से शुरू करें
अभी सबसे उपयोगी काम अंतिम अनुपालन की घोषणा करना नहीं, बल्कि संभावित दायरा और परीक्षण योग्य इकाइयाँ पहचानना है। भारत में उपलब्ध वेबसाइटों, ऐप, सॉफ्टवेयर, दस्तावेज बनाने वाली प्रणालियों और उपभोक्ता-सामना करने वाली ICT सेवाओं की सूची बनाकर उनके विकास, तकनीकी नियंत्रण और प्रकाशन के जिम्मेदार स्वामी दर्ज किए जा सकते हैं।
- तुरंत पिछले वित्तीय वर्ष और संबंधित नियंत्रक समूह के आधार पर संभावित कारोबार श्रेणी निर्धारित करें।
- हर मद को सक्रिय सेवा, अभिलेखित सामग्री या उपयोगकर्ता-जनित सामग्री मंच के रूप में वर्गीकृत करें।
- IS 17802 के विरुद्ध उपलब्ध परीक्षण प्रमाण, इस्तेमाल की गई विधियाँ, ज्ञात कमियाँ और जिम्मेदार दल दर्ज करें।
- मनुष्य-पठनीय और मशीन-पठनीय ACR के लिए एक नियंत्रित तथ्य-स्रोत तय करें, ताकि दोनों संस्करणों में अंतर न हो।
- बड़े उत्पाद बदलाव से पहले पुनः परीक्षण और रिपोर्ट अद्यतन के लिए विकास प्रक्रिया में स्थान तय करें।
अंतिम नियम में दायरा, समय-सीमा, रिपोर्टिंग प्रारूप या संस्थागत प्रक्रिया बदल सकती है। इसलिए इस चरण की सूची और परीक्षण-अभिलेख तैयारी की सामग्री हैं, कानूनी अनुपालन का अंतिम प्रमाण नहीं; बाध्यकारी योजना अंतिम राजपत्र पाठ और BIS द्वारा अधिसूचित रिपोर्टिंग प्रारूप के आधार पर तय करनी होगी।
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