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Unity-3 रिएक्टर नहीं बनाएगा—वह संलयन ईंधन की बंद कड़ी जाँचेगा

|लेखक: QUASA संपादकीय टीम|5 मिनट पढ़ने का समय| 62
Unity-3 रिएक्टर नहीं बनाएगा—वह संलयन ईंधन की बंद कड़ी जाँचेगा

11 अगस्त की ORNL घोषणा में अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने Oak Ridge National Laboratory में UNITY-3 स्थापित करने के लिए धन देने की प्रतिबद्धता जताई। Kyoto Fusioneering इस सुविधा को ORNL के साथ बनाएगी और संचालित करेगी। यह व्यावसायिक बिजली बनाने वाला संलयन रिएक्टर नहीं, बल्कि ट्रिटियम-ब्रिडिंग ब्लैंकेट की जाँच के लिए त्वरक-आधारित अनुसंधान अवसंरचना होगी।

13 अगस्त की Nuclear News रिपोर्ट ने उसी वित्तपोषण और नियोजित परीक्षण व्यवस्था की स्वतंत्र पुष्टि की। सुविधा में 14 MeV न्यूट्रॉन पैदा करने वाला त्वरक और न्यूट्रॉन ऊर्जा तथा ट्रिटियम उत्पादन मापने वाले संवेदक लगाने की योजना है। इसलिए UNITY-3 की उपलब्धि विद्युत उत्पादन नहीं, बल्कि अलग-अलग ब्लैंकेट डिजाइनों के मापे गए प्रदर्शन की होगी।

UNITY-3 में रिएक्टर के बजाय क्या होगा

ORNL में Unity-3 का त्वरक-आधारित न्यूट्रॉन स्रोत ब्रिडिंग ब्लैंकेट मॉड्यूल की जाँच करता हुआ।

संलयन रिएक्टर में पहले अत्यंत गर्म प्लाज्मा बनाकर ड्यूटेरियम और ट्रिटियम के नाभिक मिलाए जाते हैं। UNITY-3 उस अभिक्रिया को लगातार चलाने या उससे ग्रिड के लिए बिजली बनाने के बजाय त्वरक से संलयन-जैसे उच्च-ऊर्जा न्यूट्रॉन पैदा करेगा। इन न्यूट्रॉनों के सामने परीक्षण ब्लैंकेट रखकर देखा जाएगा कि उनमें कितना ट्रिटियम बनता है और गणनात्मक मॉडल वास्तविक माप से कितनी अच्छी तरह मेल खाते हैं।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्लैंकेट प्लाज्मा-कक्ष के बाहर काम करता है, लेकिन उस पर बिजलीघर की दो बुनियादी जिम्मेदारियाँ होती हैं। उसे न्यूट्रॉनों की ऊर्जा ग्रहण करके ऊष्मा बाहर निकालनी होती है और लिथियम के साथ अभिक्रियाओं के जरिये नया ट्रिटियम बनाना होता है। UNITY-3 मुख्यतः इसी नाभिकीय चरण—न्यूट्रॉन का ब्लैंकेट से संपर्क और उसके बाद ट्रिटियम उत्पादन—को प्रतिनिधि परिस्थितियों में मापेगा।

ब्रिडिंग ब्लैंकेट का इनपुट और आउटपुट

ब्रिडिंग ब्लैंकेट में न्यूट्रॉनों से ऊष्मा और ट्रिटियम बनते तथा अलग प्रणालियों तक पहुँचते हुए।

ब्रिडिंग ब्लैंकेट प्लाज्मा-कक्ष को घेरने वाली लिथियम-युक्त प्रणाली है। उसका प्रमुख इनपुट संलयन से निकले न्यूट्रॉन हैं और दो उपयोगी आउटपुट ऊष्मा तथा ट्रिटियम हैं। यह कोई एकल धातु की दीवार नहीं, बल्कि प्रजनक पदार्थ, संरचनात्मक सामग्री, शीतलक और ईंधन निकालने वाली प्रणालियों से जुड़ा घटक है।

  1. ड्यूटेरियम-ट्रिटियम संलयन से निकला न्यूट्रॉन प्लाज्मा क्षेत्र से बाहर निकलकर ब्लैंकेट में प्रवेश करता है।
  2. न्यूट्रॉन की ऊर्जा ब्लैंकेट में जमा होती है और शीतलक उसे ताप विनिमायक की ओर ले जाता है। भावी बिजलीघर में इसके बाद अलग ताप-चक्र भाप या किसी अन्य कार्यशील द्रव के जरिये टरबाइन चला सकता है।
  3. लिथियम के साथ नाभिकीय अभिक्रिया से ट्रिटियम बनता है। इस ट्रिटियम को प्रजनक पदार्थ से निकालना, शुद्ध करना, मापना और सुरक्षित रूप से संभालना पड़ता है।
  4. प्रसंस्कृत ट्रिटियम को ड्यूटेरियम के साथ फिर ईंधन प्रणाली में लौटाना होगा। तभी उत्पादन, निष्कर्षण और पुनः आपूर्ति की श्रृंखला एक बंद ईंधन-चक्र का रूप ले सकती है।

Kyoto Fusioneering का UNITY-1 तकनीकी विवरण ब्लैंकेट और ताप-चक्र को ऊष्मा ग्रहण कर उपयोगी ऊर्जा में बदलने वाली प्रणाली तथा ईंधन-चक्र को हाइड्रोजन समस्थानिकों की पुनर्प्राप्ति, पृथक्करण और पुनर्चक्रण वाली अलग प्रणाली बताता है। इसका अर्थ है कि ब्लैंकेट में ट्रिटियम बन जाना जरूरी है, लेकिन अपने आप में पूरा ईंधन-चक्र नहीं है।

ट्रिटियम उत्पादन संलयन की बंद कड़ी क्यों है

ड्यूटेरियम अपेक्षाकृत उपलब्ध है, लेकिन ट्रिटियम का ऐसा प्राकृतिक भंडार नहीं है जिस पर बड़े संलयन बिजलीघरों की निरंतर आपूर्ति टिक सके। इसी कारण भावी ड्यूटेरियम-ट्रिटियम संयंत्रों के डिजाइन आम तौर पर मानते हैं कि वे लिथियम-युक्त ब्लैंकेट में अपने ईंधन का बड़ा हिस्सा स्वयं बनाएँगे। यदि उत्पादन, हानि और पुनर्प्राप्ति का संतुलन नहीं बैठता, तो प्लाज्मा सफल होने के बावजूद संयंत्र लगातार नहीं चल पाएगा।

इंजीनियरिंग कठिनाई केवल यह दिखाने तक सीमित नहीं है कि लिथियम से ट्रिटियम बन सकता है। यह भी मापना होगा कि ब्लैंकेट की वास्तविक ज्यामिति में कितना ट्रिटियम बनता है, कितना पदार्थों में रुकता है और कितना निष्कर्षण प्रणाली तक पहुँचता है। साथ ही घटक को न्यूट्रॉन विकिरण, ऊष्मीय तनाव, शीतलक प्रवाह, संक्षारण और ट्रिटियम के रिसाव को एक साथ संभालना होगा।

UNITY-3 इस पूरी श्रृंखला को अकेले बंद नहीं करेगा। उसका केंद्र न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रम और ब्लैंकेट में बने ट्रिटियम का मापन है; आगे निष्कर्षण, शुद्धीकरण और ईंधन की वापसी के लिए अन्य प्रणालियाँ जरूरी रहेंगी। फिर भी यह उस शुरुआती धारणा को प्रयोगात्मक आँकड़ों में बदल सकता है जिस पर हर अगला चरण निर्भर करता है—ब्लैंकेट वास्तव में अपेक्षित मात्रा में ईंधन बनाता है या नहीं।

UNITY-1, UNITY-2 और UNITY-3 की भूमिकाएँ अलग हैं

Unity-1 के ताप परिपथ, Unity-2 के ट्रिटियम ईंधन-चक्र और Unity-3 के न्यूट्रॉन परीक्षण की अलग भूमिकाएँ।

Kyoto Fusioneering ने ब्लैंकेट और ईंधन-चक्र की समस्याओं को तीन पूरक परीक्षण सुविधाओं में बाँटा है। कंपनी की 12 अगस्त की परियोजना जानकारी के मुताबिक जापान में UNITY-1 तरल-धातु ब्लैंकेट के गैर-नाभिकीय ताप, प्रवाह, समस्थानिक निष्कर्षण और बिजली-चक्र संबंधी व्यवहार पर केंद्रित है। कनाडा में विकसित हो रहा UNITY-2 निरंतर ड्यूटेरियम-ट्रिटियम ईंधन-चक्र को परखेगा, जबकि UNITY-3 न्यूट्रॉन और ट्रिटियम उत्पादन वाला नाभिकीय आयाम जोड़ेगा।

सरल प्रवाह में UNITY-3 का स्थान इस प्रकार है: न्यूट्रॉन परीक्षण → ब्लैंकेट में ट्रिटियम का मापन → ईंधन निष्कर्षण और प्रसंस्करण → रिएक्टर को ईंधन की वापसी। ऊष्मा की समानांतर राह ब्लैंकेट → शीतलक → ताप विनिमायक → बिजली-चक्र होगी। UNITY-3 पहली राह के उत्पादन चरण को जाँचेगा; वह अंतिम ईंधन वापसी या पूरी ऊष्मा-से-बिजली श्रृंखला का अकेला प्रदर्शन नहीं है।

अब किन आँकड़ों का इंतजार है

अभी घोषित स्थिति वित्तपोषित विकास परियोजना की है, चालू परीक्षण सुविधा की नहीं। सार्वजनिक सामग्री में संचालन शुरू होने की निश्चित तारीख या किसी ब्लैंकेट के सफल परीक्षण का परिणाम नहीं दिया गया है। इसलिए यह कहना समय से पहले होगा कि UNITY-3 ने ट्रिटियम आत्मनिर्भरता या किसी व्यावसायिक ब्लैंकेट डिजाइन को सिद्ध कर दिया है।

अगला निर्णायक चरण सुविधा का निर्माण, उपकरणों का चालू किया जाना और वास्तविक परीक्षण नमूनों से प्राप्त आँकड़े होंगे। उन परिणामों में न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रम, ट्रिटियम उत्पादन और मॉडल से माप का अंतर खास महत्व रखेगा। तभी स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित ब्लैंकेट संलयन बिजलीघर की ईंधन श्रृंखला की इस बंद कड़ी को भरोसेमंद ढंग से जोड़ सकता है या डिजाइन में और बदलाव चाहिए।

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